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टीएस ठाकुर: कोर्ट के सामने सबसे बड़ी चुनौती पुराने मामलों को निपटाना है

कैच ब्यूरो | Updated on: 18 September 2016, 14:08 IST
(एजेंसी)

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर ने शनिवार को कहा कि न्यायपालिका के सामने असली चुनौती उन पुराने मामलों को निपटाने की है, जो अदालतों में अटके हुए हैं.

उन्होंने जोर देकर कहा कि छोटे मामलों को निपटाना आस-पास के गंदे कूड़ाघर को साफ करने जैसा है. गुजरात राज्य न्यायिक अकादमी का उद्घाटन करने के बाद लोगों को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति ठाकुर ने याद किया कि जब वह पंजाब व हरियाणा के मुख्य न्यायाधीश थे, उन्होंने दोनों राज्यों में लोक अदालतें आयोजित की थीं और 14 लाख मामलों का निपटारा किया था.

उन्होंने कहा, "लेकिन तब हमने सोचा कि छोटे मामलों को निपटाना हाथ में झाड़ू लेकर पास के कूड़ा घर को साफ करने जैसा है. असली चुनौती पुराने मामलों पर गौर करने में है जो अदालतों में अटके हुए हैं."

सीजेआई ने कहा कि इस मुद्दे पर गौर करने के लिए फिर उन्होंने दोनों राज्यों के न्यायाधीशों से सबसे पुराने दीवानी और फौजदारी के 200 मामलों की जानकारी उपलब्ध कराने को कहा.

उन्होंने कहा कि जानकारी मिलने के बाद हमनें उनसे कहा कि अब लक्ष्य इन सबसे पुराने मामलों के निपटारे पर है क्योंकि सामान्य मामलों को निपटाना पर्याप्त नहीं है. हमें पुराने, दीर्घकालीन मामलों को निपटाना चाहिए.

सीजेआई ने कहा कि इसका नतीजा यह हुआ कि लगभग छह महीने में न्यायिक अधिकारियों ने सबसे पुराने 5,500 दीवानी और फौजदारी मामलों का निपटारा कर दिया. अपने भाषण के दौरान न्यायमूर्ति ठाकुर ने आशा जताई कि न्यायिक समुदाय के ‘तेजी से बढ़ती मामलों की संख्या’ के प्रति सचेत होने पर चुनौती का सामना किया जाएगा.

सीजेआई ने अप्रैल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में मुख्यमंत्रियों और उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों के संयुक्त सम्मेलन को संबोधित करते हुए देश के लाखों लंबित मामलों को निपटाने के लिए और न्यायाधीशों की नियुक्ति की भावुक अपील की थी.

न्यायमूर्ति ठाकुर ने शनिवार की सुबह गांधीनगर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और कहा, "जब मैंने सुबह नाश्ते पर प्रधानमंत्री से मुलाकात की तो उनसे कहा कि गुजरात आना मुझे इतनी शांति देता है कि एकबार जब आप यहां आते हैं तो आपको लगता है कि आप बहुत बहुत शांतिपूर्ण जगह पर आए हैं."

राज्य में न्यायिक अकादमी की बात करते हुए न्यायमूर्ति ठाकुर ने कहा कि यह संस्था इस क्षेत्र में काम करने वालों को प्रशिक्षण देकर न्यायपालिका की मदद करेगी.

First published: 18 September 2016, 14:08 IST
 
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