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तुर्की के मुताबिक भारत में सक्रिय है आतंकी संगठन फतेउल्लाह गुलेन

कैच ब्यूरो | Updated on: 7 February 2017, 8:20 IST

तुर्की के विदेश मंत्री मेवलो कॉवसोग्लू, जो हाल ही दिल्ली दौरे पर भी आए थे ने दावा किया कि फतेउल्लाह गुलेन हिजमत आंदोलन, जिसे तुर्की सरकार ने आतंकी संगठन करार दे रखा है, अब भारत में अपनी गतिविधियां फैला रहा है. मेवलो का कहना है कि यह अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क भारत में स्कूलों और संस्थाओं के माध्यम से काम कर रहा है.

गौरतलब है गुलेन कभी राष्ट्रपति एर्दोगन के विशिष्ट सहयोगी रहे है और उन्हीं के सिद्धांतों पर चलते हुए आज तुर्की में एर्दोगन से ज्यादा स्वीकार्य हो चुके हैं. एर्दोगन इस्लामिक पंथ का समर्थन करते हुए धर्मनिरपेक्षता को लगभग छोड़ चुके हैं और हाल ही उन्हें इस बात के लिए आलोचना का शिकार होना पड़ा था. 

उनकी हाल में इस बात के लिए आलोचना हो रही थी कि वे कथित तौर पर आतंकियों को अपनी धरती का इस्तेमाल करने की छूट दे रहे थे, जो वहां से आसानी से सीधे पड़ोसी देश सीरिया पहुंच सकते थे. जैसे कि पाकिस्तान ने सोवियत द्वारा अफगानिस्तान पर हमले के अपनी बाद जिहादियों को अपनी धरती का इस्तेमाल एक सेफ रास्ते के रूप में करने दिया था.

हनाफी के अनुयायी गुलेन को एक धर्मनिरपेक्ष नेता नहीं कहा जा सकता, उसे सूफी की ही तरह आधुनिकता और परस्पर विश्वास पर आधारित संवाद का पक्षधर माना जा सकता है.

यही वजह है कि गुलेन के हिजमत आंदोलन से जुड़े कई शिक्षण संस्थान भारत में शिक्षा के जरिए असर डालने में लगे हैं. ‘लर्नियम’ स्कूलों की श्रृंखला इसका एक उदाहरण है, जिसकी शाखाएं दिल्ली और दूसरे भारतीय शहरों में चल रही हैं. हालांकि स्कूल प्रशासन से बात नहीं हो सकी लेकिन तुर्की सरकार का दावा है कि स्कूलों में चल रही गतिविधियां आतंक की श्रेणी में नहीं आती.

हैदराबाद में इसकी एक और शाखा इकबालिया इंटरनेशनल स्कूल के नाम से चल रही है. इसकी वेबसाइट पर बताया गया है कि यहां सभी वर्गों के विद्यार्थियों को पढ़ाया जाता है. इसकी एक प्रबंधन कमेटी भी है. स्कूल का दावा है कि वह सीबीएसई का पाठ्यक्रम पढ़ाता है और अपने विद्यार्थियों को तुर्की भाषा भी पढ़ाता है. अन्य भाषाओं के रूप में स्पैनिश और रूसी भाषाएं भी यहां पढ़ाई जाती हैं. 

पड़ोसी देशों श्रीलंका और पाकिस्तान में भी इसी तरह के स्कूल चलाए जा रहे हैं. इंडिया लॉग फाउन्डेशन नामक एक और संगठन जो खुद को गुलेन आंदोलन का अनुयायी बताता है, भारत में 2005 से सक्रिय है. मुंबई, नई दिल्ली, हैदराबाद, बंगलुरू, मुंबई, नई दिल्ली, हैदराबाद व कोलकाता में इसकी शाखाएं चल रही हैं. 

इसकी वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसकी गतिविधियां विभिन्न संस्कृति और धर्मों के बीच संवाद शुरू करने की दिशा में कार्य कर रही हैं. जैसे उन्होंने संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार और भारत व भूटान संयुक्त राष्ट्र सूचना केंद्र, चिन्मया मिशन, दिल्ली गुरूद्वारा प्रबंधन कमेटी, आर्ट ऑफ लिविंग, आईआईसीसी, पतंजलि व अन्य के संयुक्त तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय संस्कृति और भाषा सम्मेलन का आयोजन किया. इसके अलावा यह फाउंडेशन भारत और तुर्की के व्यापारियों के बीच आपसी समन्वय बनाने का काम भी करता है. 

जुलाई में तख्तापलट की नाकाम कोशिश के बाद तुर्की मुश्किल दौर से गुजर रहा है. समीक्षकों का कहना है कि राष्ट्रपति रिसप तैयब एर्दोगन ने इस मौके का इस्तेमाल अपने राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए किया है. घटना के बाद पत्रकारों सहित कई विद्रोहियों को जेल में डाल दिया गया. 

इसकेे अलावा सरकार ने उन सारे मीडिया प्रतिष्ठानों पर पाबंदी लगा दी, जिन पर निर्वासित धार्मिक गुरु फतेउल्लाह गुलेन से जुड़े होने का आरोप था. सरकार का मानना है कि तख्ता पलट की नाकाम कोशिश के पीछे गुलेन का ही हाथ था. एर्दोगन और उनके साथी अधिकारियों का मानना है कि तुर्की की सशस्त्र सेना का गुलेन का वफादार एक धड़ा इसमें लिप्त था. 

भारत सरकार की एजेंसियां तुर्की द्वारा जताई गई आशंकाओं की जांच कर रही है. विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, सरकारी एजेंसियां गुलेन से जुड़े संगठनों की जांच करने में जुटी हैं. 

जुलाई में तख्तापलट की घटना के बाद तुर्की ने अपनी विदेश नीति में बड़ा बदलाव किया है. एर्दोगन की नीति से हटकर अब तुर्की सीरिया संकट के लिए रूस से मदद मांग रहा है. इससे पहले यह सीरिया में विदेशी लड़ाकों की मदद में लगा हुआ था, जो आईएसआईएस और अलकायदा जैसे आतंकी संगठनों के लिए लड़ रहे हैं.

लगता है तुर्की अमेरिका से खुश नहीं है और गुलेन को निकाल बाहर करना चाहता है. अमेरिका में निर्वासित जीवन बिता रहे गुलेन और एर्दोगन के संबंधों में तब से ही खटास पड़ गई, जब तुर्की के राष्ट्रपति और उनके परिवार के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगे.

इस बीच, दिल्ली यात्रा के दौरान तुर्की के विदेश मंत्री ने बताया कि उनकी सरकार उन सभी देशों को आगाह कर रही है, जहां गुलेन का आतंकी गुट ‘फेटो’ मौजूद हैं. साथ ही इसके खिलाफ कार्रवाई करने को भी कह रही है.

दरअसल इससे पहले जब मेवलो इस्लामाबाद गए थे तो उन्होंने पाक सरकार पर भी गुलेन के गुटों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा था. इतना ही नहीं, तुर्की के विदेश मंत्री ने कई औऱ बातें भी कही. उन्होंने कश्मीर के मौजूदा हालात पर भी टिप्पणी की, जिस पर भारत सरकार का कहना है कि यह सब पाकिस्तान द्वारा आतंकी गुटों को शह दिए जाने का नतीजा है. 

पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को संरक्षण देने की नीति का विरोध करने की बजाय तुर्की के विदेश मंत्री ने जम्मू-कश्मीर पर पाक के रुख को पूरा समर्थन दिया और कहा, 'इस्लामिक संघीय सम्पर्क समूह का एक सक्रिय सदस्य होने के नाते तुर्की संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव से आग्रह करेगा कि वह इस समूह को और गतिशील करे और एक पर्यवेक्षक मिशन कश्मीर में भेजे.'

इस्लामिक देशों के संगठन ओआईसी के महासचिव ईयाद अमीन मदनी 20 अगस्त को इस्लामाबाद पहुंचे थे, जहां उन्हें कश्मीर के बिगड़े हालात की जानकारी दी गई थी. साथ ही मानवाधिकारों के उल्लंघन के बारे में भी उन्हें बताया गया और कहा गया कि दोनों पक्ष इस मसले पर कुछ ऐसी कार्रवाई करने पर विचार कर रहे हैं, जो कि 57 सदस्यीय इस्लामिक संगठन को मंजूर हो.

इससे नाखुश भारत सरकार ने तुर्की के समक्ष यह मसला उठाया है. रिपार्टों के अनुसार इसमें तुर्की सरकार को साफ बता दिया गया है कि कश्मीर भारत-पाकिसतान के बीच द्विीपक्षीय मुद्दा है.

यहां तक कि जून में हुई एनएसजी की महत्वपूर्ण बैठक में तुर्की ने भारत की सदस्यता की बात पर बहस में पाक का साथ दिया था. रिपोर्टों के अनुसार, यद्यपि इसने एनएसजी में भारत के प्रवेश का विरोध नहीं किया था लेकिन यह पाक को एनएसजी सदस्य बनाए जाने की वकालत कर रहा था जबकि पाक की सदस्यता पर बहस नहीं हो रही थी.

खैर, तुर्की के विदेश मंत्री ने अपनी भारत यात्रा के दौरान आश्वासन दिया कि वह स्थाई सदस्यता के लिए भारत का समर्थन करेगा. यह मोदी सरकार के लिए अच्छा है, जो कि चीन को मनाने में लगी हुई है कि वह उसकी राह में रोड़े न अटकाए.

इस बीच, मध्य-पूर्व में जारी उथल-पुथल थमने का नाम नहीं ले रही है. भारत इस संबंध में फिलहाल तटस्थ रवैया अपनाए हुए है. विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर यहां के दो सर्वाधिक प्रभावित देशों इराक और सीरिया की यात्रा पर जाएंगे.

First published: 25 August 2016, 7:40 IST
 
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