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AIIMS के डॉक्टरों का चमत्कार, सिर से जुड़े दो भाईयों को किया अलग

कैच ब्यूरो | Updated on: 22 March 2018, 14:19 IST

मेडिकल साइंस ने नामुमकिन से नामुमकिन बीमारियों का इलाज खोज निकाला है. दिल्ली के AIIMS ने भी कुछ ऐसा ही चमत्कार कर दिखाया. जो आज तक हमारे देश में नहीं हुआ. AIIMS के डॉक्टरों ने सिर से जुड़े दो भाईयों को नई पहचान दी है. इसी के साथ मेडिकल साइंस के फील्ड में भारत के डॉक्टरों ने एक नई मिसाल पेश कर दी है.

दरअसल, छह महीने पहले AIIMS के डॉक्टरों ने जग्गा और कालिया नाम के जुड़वा भाईयों को सर्जरी कर अलग कर दिया. दोनों सिर से जुड़े हुए थे. सर्जरी के बाद दोनों की सेहत में तेजी से सुधार हो रहा है. बता दें कि तीन साल पहले अप्रैल 2015 में ओडिशा के कंधमाल के देहात में जग्गा और कालिया सिर से जुड़े जुड़वां पैदा हुए थे.

जग्गा और कालिया के मां-बाप इन दोनों को अलग-अलग देखना चाहते थे. इसी उम्मीदों के साथ वो उन्हें ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर ले पहुंचे. जहां डॉक्टरों ने उन्हें दिल्ली आने की सलाह दी. उसके बाद जग्गा-कालिया के मां-बाप उन्हें दिल्ली के AIIMSले आए. जहां उनकी दो मैराथन सर्जरी हुई और उन्हें नई जिंदगी मिल गई. बच्चों के सफल ऑपरेशन से पूरे परिवार में खुशी की लहर है. जग्गा कालिया के पिता भूईंया कंहर सबका शुक्रिया अदा करते नहीं थक रहे.

AIIMS के डॉक्टर्स के मुताबिक जग्गा 95-98% ठीक है और कालिया लगभग 70% ठीक हो चुका है. डॉक्टर बताते हैं कि पिछले 30 साल में 10-12 ऐसे ऑपरेशन पूरी दुनिया में हुए हैं. लेकिन भारत में ऐसा ऑपरेशन पहली बार हुआ है. अब परिवार को उम्मीद है वो जल्द ही अपने गांव लौट सकते हैं. उन्हें इंतजार है कि जग्गा की तरह कालिया भी पूरी तरह फिट हो जाए.

 

इस ऑपरेशन में क्या रही खास बातें

बता दें कि दुनियाभर में पिछले 30 साल में इस तरह के 10-12 ऑपरेशन हुए. जिनमें 20-30 फीसदी ऑपरेशन में ही डॉक्टरों को सफलता मिली. जग्गा और कालिया के सिर 360 डिग्री पर जुड़े थे. पहले इनकी दो मेजर सर्जरी की गईं उसके बाद 4-5 माइनर सर्जरी. अब दोनों खतरे से बाहर हैं. बता दें कि इससे पहले दोनों कुपोषण के शिकार थे.

जग्गा और कालिया का वजन बहुत कम था और हीमोग्लोबिन की भी कमी थी. बता दें कि जग्गा और कालिया को जुलाई में एम्स में आए थे. उसके बाद पिछले साल अगस्त और सितंबर में उनकी मैराथन सर्जरी की गई. अगस्त में हुई सर्जरी में 23 घंटे का समय लगा था. वहीं अक्टूबर में हुई सर्जरी के दौरान 20 घंटे का वक्त लगा. इस सर्जरी में 40 फैकल्टी और 70 डाॅक्टरों की टीम शामिल हुई.

First published: 22 March 2018, 14:20 IST
 
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