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मोदी सरकार के ढाई साल: 5 फैसले जो बदल सकते हैं आने वाले भारत की तस्वीर

चारू कार्तिकेय | Updated on: 1 December 2016, 8:16 IST
(मलिक/कैच न्यूज़)
QUICK PILL
  • मोदी सरकार की सबसे बड़ी ख़ूबी यह है कि जब से वह सत्ता में आई है, कमोबेश हर दिन ख़बरों में होती है. वजह अच्छी या बुरी, कुछ भी हो सकती है. 
  • मगर मोदी सरकार के ढाई साल के कार्यकाल में पांच बड़े फ़ैसले ऐसे हैं कि अगर उनका सही तरह से क्रियान्यवन हुआ तो यक़ीनन देश की तस्वीर बदल सकती है.

नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बने ढाई साल हो गए हैं. उनका अब तक का रिकॉर्ड देखें, तो यह उपलब्धियों भरा रहा है. नरेंद्र मोदी जैसे विपरीत धारा में चलने वाली शख्सियत में खामियां ढूंढ़ना बड़ा आसान है. कुछ लोग उनकी बात को आंख बंद कर मानते हैं, तो कई सहज विरोध भी करते हैं. ऐसे में बिना साफ़ मानदंडों के उनके रिकॉर्ड का मूल्यांकन करना थोड़ा मुश्किल होता है. 

उनके ज्यादातर बड़े फैसले आगे जाकर क्या रंग दिखाएंगे, अभी देखना बाकी है. फिर भी उनकी कुछ पहल बहुत अच्छी रहीं हैं. उन्हें उन्होंने देश हित में बताया है, हालांकि अब तक के उनके नतीजे संतोषजनक नहीं रहे हैं. ऐसा ही एक फैसला है नोटबंदी का. 500 और 1,000 के नोटों को बंद करने का. बेशक इस कदम से समस्याएं आईं हैं, और कई मोर्चों पर उसकी नकारात्मक प्रतिक्रियाएं हुई हैं. पर मोदी सरकार के कुछ फैसले ऐसे भी हैं, जिनका व्यापक और सकारात्मक असर हुआ है.

जन धन बैंक खाता

2011 तक कुल 125 करोड़ की जनसंख्या में 35 करोड़ भारतीयों के बैंक खाते नहीं थे. यूपीए सरकार ने भी वंचित वर्ग के लिए वित्तीय सुविधाओं की योजनाएं बनाई थीं, पर एनडीए की प्रधानमंत्री जन धन योजना जबरदस्त हिट हुई है. सरकारी आंकड़ों की मानें, तो इस मुहिम के अंतर्गत 23 नवंबर 2016 तक 25.68 करोड़ बैंक खाते खोले गए. इनमें से महज 23 फीसदी खाते जीरो बैलेंस के हैं. जाहिर है, लोगों ने ना केवल काफी संख्या में बैंकों में अपने खाते खुलवाए, बल्कि अपनी कमाई को बचा कर रखने के लिए उनका उपयोग भी कर रहे हैं.

स्वच्छ भारत अभियान

स्वच्छ भारत अभियान एक राष्ट्रीय मुहिम है, जिसका मकसद देश में स्वच्छता की संस्कृति विकसित करना है. लोगों की यह धारणा हो सकती है कि यह अभियान केवल शौचालय बनाने तक सीमित है, पर इसके और भी कई पहलू हैं. यह बेहतर अपशेष प्रबंधन, मैला ढोने का उन्मूलन और स्वच्छता को लेकर जनमानस का नजरिया बदलने को लेकर भी है. इसका मूल प्रयोजन सामाजिक परिवर्तन है, जो इस अभियान को तारीफ के काबिल बनाता है.

मेक इन इंडिया

मेक इन इंडिया योजना का मकसद भारत को निर्माण के क्षेत्र में महज पावर हाउस बनाना नहीं है. यह योजना लाखों की संख्या में रोजगार और छोटे व्यवसाय की उम्मीद जगाती है. भारत ना केवल रक्षा उपकरण बनाने जैसे बड़े निर्माण में पीछे है, बल्कि बिजली के छोटे बल्ब जैसी रोजमर्रा काम आने वाली साधारण चीजें बनाने में भी पीछे है. 

जैसे-जैसे देश अपनी इस छवि को बदलने की राह पर आगे बढ़ेगा, छोटे वर्कर्स और व्यवसायियों को बड़े बिजनेस वालों से ज्यादा नहीं, तो उन जैसा लाभ मिलने लगेगा. इस महत्वाकांक्षी योजना की यही खूबी है. 

आदर्श ग्राम योजना

एनडीए सरकार की योजनाओं में संसद आदर्श ग्राम योजना गांवों के विकास के लिए एक बहुत ही अच्छी योजना है क्योंकि भाजपा और मोदी पर शहरी भारत का नेतृत्व करने का आरोप लगता रहा है. गुजरात में मोदी सरकार के नेतृत्व में जितना शहरी क्षेत्रों का विकास हुआ उतना गांवों का नहीं. यह तारीफ की बात है कि उनके नेतृत्व में अब गांवों से सांसद आ रहे हैं. जनता के ये नेता अपना समय, ऊर्जा और संसाधन का उपयोग आदर्श गांव बनाने में कर रहे हैं. हालांकि योजना के विस्तार के लिए महज 2200 गांवों का लक्ष्य थोड़ा हास्यास्पद लगता है. 

मसरूफ मोदी

मोदी ने कई अच्छी योजनाएं तो शुरू की ही हैं, साथ ही उनकी शख्सियत का एक और पहलू बड़ा जबरदस्त है. लोगों ने उन्हें लक्ष्य से डिगाने की भरसक कोशिश की, पर सफल नहीं हो सके. वे हमेशा गतिशील रहते हैं, अपने विवेक और अपने लिए फैसलों से. राष्ट्र के कामों में लगातार मसरूफ बने रहते हैं. एक अध्ययन के मुताबिक दो दिन भी पूरे नहीं होते हैं कि उनका एक सार्वजनिक बयान आ जाता है. राजनीतिक रैलियां, सरकारी कार्यक्रम, टेलीविजन, रेडियो, सोशल मीडिया और मोबाइल एप्लिकेशंस आदि के माध्यम से अपनी पहुंच बनाए रखते हैं.

66 की उम्र में किसी राजनेता में इस तरह की ऊर्जा कम ही देखने को मिलती है. कोई नहीं जानता कि उन्हें यह प्रेरणा और कर्मशक्ति कहां से मिलती है, पर यह जरूर है कि वे अपना प्रभामंडल बनाने में सफल हो ही जाते हैं.

First published: 1 December 2016, 8:16 IST
 
चारू कार्तिकेय @CharuKeya

Assistant Editor at Catch, Charu enjoys covering politics and uncovering politicians. Of nine years in journalism, he spent six happily covering Parliament and parliamentarians at Lok Sabha TV and the other three as news anchor at Doordarshan News. A Royal Enfield enthusiast, he dreams of having enough time to roar away towards Ladakh, but for the moment the only miles he's covering are the 20-km stretch between home and work.

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