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धारा 377 पर जीत दिलाने वाली ये दोनों महिला वकील खुद हैं कपल, इंटरव्यू में किया खुलासा

कैच ब्यूरो | Updated on: 20 July 2019, 15:09 IST

सुप्रीम कोर्ट में भारतीय दंड संहिता की धारा 377 (LGBT) के खिलाफ वकील के रुप में बहस करने वाली मेनका गुरुस्वामी और अरुंधति काटजू ने सीएनएन को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि यह न केवल उनकी पेशवर जीत थी बल्कि एक कपल के रूप में भी बड़ी सफलता थी.

दोनों वकीलों ने इंटरव्यू में अपने समलैंगिक संबंधों को भी स्वीकार किया. इन दोनों वकीलों की बदौतल पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया था. इस फैसले के लिए एलजीबीटी समुदाय कई समय से लड़ाई लड़ रहा था.

गुरुस्वामी और काटजू ने 2013 में इस मामले पर भी बहस की थी. 2013 के दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने 6 सितंबर 2018 को पलट दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सहमति से वयस्कों के बीच समलैंगिकता संबंधी गतिविधि अपराध की श्रेणी में नहीं आना चाहिए. पहले धारा 377 में अपराध के लिए 10 साल तक की जेल का प्रावधान था.

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काटजू ने इंटरव्यू में कहा मलयेशिया और श्रीलंकाई अब देख रहे हैं कि कैसे वे अपने देशों में समलैंगिक विरोधी कानूनों को पलटने के लिए इस फैसले का उपयोग कर सकते हैं." ट्विटर पर CNN का इंटरव्यू पोस्ट किए जाने के तुरंत बाद, काटजू ने गुरुस्वामी के साथ अदालत में उनकी एक तस्वीर साझा की. 2018 में ऐतिहासिक फैसले के बाद गुरुस्वामी और काटजू को अंतर्राष्ट्रीय प्रशंसा मिली. टाइम पत्रिका की 2019 के लिए 100 सबसे प्रभावशाली लोगों में उनका नाम था.

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First published: 20 July 2019, 15:09 IST
 
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