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इलाहाबाद: वीसी का यू टर्न, स्मृति ईरानी का कामकाज में कभी दखल नहीं

कैच ब्यूरो | Updated on: 12 May 2016, 11:48 IST

इलाहाबाद यूनीवर्सिटी के कुलपति रतन लाल हंगलू और केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी के विवाद में नया मोड़ आ गया है. वीसी हंगलू अपने पुराने बयान से पलट गए हैं.

वीसी रतनलाल हंगलू ने उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी को एक खत लिखा है, जिसमें उन्होंने कहा है कि स्मृति ईरानी ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कामकाज में कभी दखल नहीं दिया है.

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इससे पहले कुलपति हंगलू ने आरोप लगाया था कि स्मृति ईरानी का मंत्रालय उनके कामकाज में दखल देता है, अगर हालात ऐसे ही रहे तो वो अपने पद से इस्तीफा दे देंगे.

हंगलू ने ये भी कहा था कि कामकाज में दखल से यूनीवर्सिटी पीछे जा रही है और अगर इसी तरह दखलंदाजी देनी है तो किसी सांसद या विधायक को वीसी बना देना चाहिए.

स्मृति ने संसद में दी थी सफाई


बुधवार को संसद में भी इलाहाबाद यूनीवर्सिटी का मामला उठा था. राज्यसभा में मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने सफाई देते हुए कहा कि उनका मंत्रालय विश्वविद्यालय के काम में दखल नहीं देता.

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स्मृति ईरानी ने समाजवादी पार्टी के महासचिव रामगोपाल यादव के आरोपों पर कहा था कि इलाहाबाद यूनीवर्सिटी में समाजवादी पार्टी के नेता वीसी को धमकी दे रहे हैं, जिस पर सपा के सांसदों ने हंगामा मचाया. 

ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा पर विवाद


दरअसल, चार महीने पहले ही इलाहाबाद सेंट्रल यूनीवर्सिटी के वीसी बने प्रोफेसर रतन लाल हंगलू ने कामकाज संभालते ही नये सेशन से सभी प्रवेश परीक्षाएं सिर्फ ऑनलाइन कराए जाने का एलान किया था.

लेकिन छात्रों के विरोध के चलते वीसी ने ग्रेजुएशन क्लासेज में दाखिले के लिए ऑनलाइन के साथ ही ऑफलाइन परीक्षा कराए जाने का भी विकल्प दे दिया था.

यूनीवर्सिटी में दाखिले की प्रक्रिया शुरू होते ही छात्रों ने इस बार की सभी प्रवेश परीक्षाओं में ऑफलाइन का विकल्प दिए जाने की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिया था. 

फैसले का पहले छात्र संगठन विरोध कर रहे थे, लेकिन बाद में इसके विरोध में बीजेपी, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेता भी उतर आए.

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वीसी हंगलू का आरोप है कि समाजवादी पार्टी के नेताओं की ओर से मारने की धमकी का दबाव भी बनाया गया. कुलपति का ये भी आरोप है कि छात्रनेता एडमिशन फॉर्म बेचकर काली कमाई करते हैं, इसी पर नकेल कसने के लिए ऑनलाइन फॉर्म की व्यवस्था की गई थी.

First published: 12 May 2016, 11:48 IST
 
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