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मोदी सरकार पर उद्धव: अहंकारी मत बनो, हिटलर ने भी की थी खुदकुशी

कैच ब्यूरो | Updated on: 12 May 2016, 18:20 IST

उत्तराखंड में केंद्र सरकार की हुई फजीहत के बाद अब बीजेपी की सहयोगी पार्टी शिवसेना ने निशाना साधा है. मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय में केंद्र सरकार और पीएम नरेंद्र मोदी पर जमकर हमला बोला गया है.

शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के लेख में केंद्र सरकार के विवादास्पद फैसलों पर कड़ी टिप्पणी की गई है.

लेख में उद्धव ठाकरे ने कहा है कि केंद्र सरकार को लोकतंत्र का महत्व समझना चाहिए. जनता ने सरकार को राज करने के लिए हाथ में दुधारी तलवार दी है. इसका मतलब यह नहीं कि उस तलवार से खुद की नाक काट ली जाए, अगर ऐसा करते रहेंगे तो उत्तराखंड वाला हाल होगा.

इसके साथ ही उद्धव ठाकरे ने मोदी सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि लोकतंत्र को हल्के में ना लें, वर्ना नाक कटते देर नहीं लगेगी.

उद्धव ठाकरे ने संपादकीय लेख में आगे लिखा है कि उत्तराखंड को देव भूमि का दर्जा प्राप्त है, इसके राजनीतिक शक्ति परीक्षा के परिणाम में कौन जीता और कौन हारा इसकी बजाय लोकतंत्र की जीत हुई ऐसा कहना पड़ेगा. सरकार के बचकानेपन से कांग्रेस पार्टी को जीत की तुरही और ढोल बजाने का मौका मिल गया.

उत्तराखंड में कांग्रेस के 9 विधायकों ने बागवत कर दी, जिससे रावत सरकार अल्पमत में आ गई. विधानसभा में बहुमत परीक्षा हुआ, नहीं तो कांग्रेस की सरकार हार गई होती, लेकिन कई तरह के उपाय लगाकर बहुमत परीक्षण को टाला गया और प्रदेश पर राष्ट्रपति शासन थोपा गया.

लेख में उद्धव ठाकरे ने यह भी कहा है कि उत्तराखंड में कांग्रेस का रास्ता आसान नहीं था, लेकिन केंद्र सरकार की गलतियों का नतीजा है कि आज रावत को फिर से सत्ता मिल गई.

केंद्र सरकार ने देश को कांग्रेस मुक्त करने का यह जो तरीका अपनाया है, वह बिल्कुल सही नहीं है. यह तो देश में सीधे तानाशाही का प्रतीक बन गया, जिसमें लोकतंत्र के द्वारा चुनकर आई सरकारों को जबरन हटाया जा रहा है.

इसके अलावा अब बीजेपी की ओर से कहा जा रहा है कि दिल्ली में आप की केजरीवाल सरकार भी ठीक से काम नहीं कर रही है. इस तरह की बातों से तो ऐसा लगता है कि फिर दिल्ली में भी राष्ट्रपति शासन लगाने की भूमिका बनाई जा रही है.

सरकार को समझना चाहिए कि लोकतंत्र में लोगों की बातें को धैर्यपूर्वक सुना जाता है, लोकतंत्र सिर्फ बौद्धिक जुगाली के लिए नहीं है.

वर्तमान राजनीतिक हालात में ऐसा लग रहा है कि मानो आज देश को न्यायपालिका ही चला रहा है और इसके लिए केवल और केवल सत्ता के शिखर पर बैठ लोग ही जिम्मेदार हैं.

इसका ताजा उदाहरण है उत्तराखंड में न्यायपालिका का हस्तक्षेप. सत्ता के शिखर पर बैठे लोगों की अदूरदर्शिता का परिणाम है. इस मामले में हमने न्यायपालिका के लिए दरवाजे खोले और आखिरकार न्यायपालिका ने लोकतंत्र की रक्षा की.

सरकार में बैठे लोग इस बात को अच्छी तरह से समझ लें कि लोगों ने इस गड़बड़ी और उठापठक के लिए उन्हें सत्ता हाथ में नहीं दी है. जिन्होंने आपको शिखर पर बैठाया, वही आपको धूल में भी मिलाए बिना नहीं मानेंगे.

हमने इतिहास में देखा है कि तानाशाह हिटलर का भी गर्व, अहंकार खत्म हो गया और अंधेरे खंदक में उसने खुद को गोली मार ली थी. इसलिए सरकार को लोकतंत्र की महत्ता को समझना चाहिए.

First published: 12 May 2016, 18:20 IST
 
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