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JNU, BHU, AMU समेत 60 शिक्षण संस्थान खुद तय करेंगे फीस और कोर्स, UGC ने लिया फैसला

कैच ब्यूरो | Updated on: 21 March 2018, 10:44 IST

UGC ने उच्च शिक्षा को लेकर बड़ा फैसला किया है. केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने बड़ा फ़ैसला लेते हुए देश के 60 शिक्षण संस्थानों को स्वायत्तता दी है. केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने पांच केंद्रीय एवं 21 राज्य विश्वविद्यालयों सहित 62 उच्च शैक्षणिक संस्थाओं को पूर्ण स्वायत्तता दी है. उन्होंने कहा कि जिन संस्थाओं को पूर्ण स्वायत्तता दी गई है. वे अपनी दाखिला प्रक्रिया, फीस की संरचना और पाठ्यक्रम तय करने के लिए स्वतंत्र होंगे.

गौरतलब है की इन संस्थानों में अभी तक यूजीसी के द्वारा कई पाठ्यक्रम चलाए जाते हैं. जिसका लाभ आर्थिक रूप से कमजोर और पिछड़े वर्ग से आने वाले छात्रों को होता है. इस फैसले से बड़ी सांख्य में छात्र-छात्राओं की पढ़ाई नकारात्मक रूप से प्रभावित होगी. इस फैसले के साथ ही ये सभी संस्थान सरकारी अनुदानों से मुक्त हो जायेंगे. इस फैसले का असर हर उस वर्ग पर पड़ेगा जिसको सरकार की तरफ से अभी तक सहूलियत दी जा रही थी.

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने बड़ा फ़ैसला लेते हुए देश के 60 शिक्षण संस्थानों को स्वायत्तता दी है. 5 केंद्रीय विश्वविद्यालय जिनमें जेएनयू, बीएचयू, अलीगढ़ विश्वविद्यालय भी शामिल हैं. 21 राज्य विश्वविद्यालय, 24 डीम्ड यूनिवर्सिटी, 2 प्राइवेट विश्वविद्यालय और 8 निजी संस्थानों को स्वायत्ता दी गई है. अब ये सभी 60 शिक्षण संस्थान अपनी फ़ीस, अपना कोर्स, भर्तियां, वेतन ख़ुद ही निर्धारित कर सकेंगे.

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केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने मंगलवार को कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने पांच केंद्रीय एवं 21 राज्य विश्वविद्यालयों सहित 62 उच्च शैक्षणिक संस्थाओं को पूर्ण स्वायत्तता दी है. उन्होंने कहा कि जिन संस्थाओं को पूर्ण स्वायत्तता दी गई है वे अपनी दाखिला प्रक्रिया, फीस की संरचना और पाठ्यक्रम तय करने के लिए स्वतंत्र होंगे.

इस फैसले के बाद ये 60 संस्थान UGC के नियामक के अंदर तो रहेंगे मगर कोई नया कोर्स शुरू करने के लिए उन्हें UGC की अतिरिक्त अनुमति नहीं लेनी होगी. ये शिक्षण संस्थान अपने फीस का स्ट्रक्चर, एडमिशन प्रक्रिया आदि के लिए स्वतंत्र होंगे. इस फैसले के साथ HRD मिनिस्ट्री ने अभी तक ये तय नहीं किया है कि पिछड़े तबके या आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए मुहैया की जाने वाले सुविधाओं का क्या प्रारूप होगा.

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इस फैसले से उच्च शिक्षा में बहुत बड़ा बदलाव आएगा. देखना ये है कि इस फैसले से किस तरह के सकारात्मक बदलाव आते हैं. सरकार एक तरह से शिक्षा क्षेत्र से हाथ खींचती नजर आ रही है. शिक्षण संस्थानों के निजीकरण से उन छात्र छात्राओं के भविष्य पर खतरा मंडराता नज़र आ रहा है जो कि अभी सरकारी अनुदानों की सहायता से अपनी उच्च शिक्षा को जारी रख पाने में सक्षम रहे हैं. एक ओर देश में बेरोजगारी की मार झेल रहे छात्र उच्च शिक्षा के इस बड़े बदलाव को किस प्रकार से झेलेंगे.

First published: 21 March 2018, 10:23 IST
 
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