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आधार के लिए चेहरा बनेगा पहचान, 1 जुलाई से मिलेगी फेस ऑथेंटिकेशन की सुविधा

कैच ब्यूरो | Updated on: 15 January 2018, 17:05 IST

आधार कार्ड की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी (यूआईडीएआई ) ने बड़ा कदम उठाया है. यूआईडीएआई ने 1 जुलाई 2018 से आधार कार्ड में चेहरे की पहचान को भी जोड़ने का फैसला किया है. इससे पहले आधार सत्यापन के लिए आंखो की पुतलियों और उंगुलियों के निशान लिये जाते थे.

ये फैसला उन लोगों को फायदा देगा, जिन्हें उपर्युक्त दोनों तरीकों से आधार ऑथेंटिकेशन में दिक्कत होती है. इसके बाद वो अपने चेहरे की पहचान से भी अपना आधार सत्यापन करा सकेंगे. यूआईडीएआई ने साफ कर दिया है कि चेहरे की पहचान के साथ-साथ आधार कार्ड बनाने वाले व्यक्ति को एक और प्रमाण की जरूरत होगी.

इस नयी योजना के मुताबिक आधार कार्ड को सत्यापित करने के लिए आधार नंबर वाले को चेहरे के साथ फिंगर प्रिंट, आइरिस या ओटीपी की जरूरत होगी. यूआईडीएआई ने जानकारी दी कि इसके लिए 31 मार्च 2018 तक सारी जानकारी उपलब्ध करा दी जाएगी.

दरअसल एक अखबार द्वारा 100 करोड़ लोगों के आधार कार्ड की जानकारी मिलने के दावे के बाद यूआईडीएआई ने आधार की सुरक्षा से जुड़ी चिंता दूर करने के लिए हाल ही में 16 अंकों का 'वर्चुअल आईडी ' लाने का ऐलान किया था. हालांकि यूआईडी ने अखबार के दावे का खंडन करते हुए अखबार के रिपोर्टर के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई थी.

यूआईडीएआई ने इस बारे में जानकारी दी थी कि वर्चुअल आईडी को वेबसाइट से जेनरेट कर सिम वेरिफिकेशन से लेकर विभिन्न जरूरतों के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है. वर्चुअल आईडी बना लेने के बाद सत्यापन के लिए ओरजिनल आधार नंबर साझा करने की जरूरत नहीं रह जाएगी.

गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले ही कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने भरोसा दिलाया था कि आधार सिस्टम में स्टोर फिंगरप्रिंट और आइरिश डेटा पूरी तरह सुरक्षित है. करोड़ों कोशिशों के बावजूद इनकी सुरक्षा में सेंध नहीं लगाया जा सकता है.

First published: 15 January 2018, 16:54 IST
 
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