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उमा भारती अब कभी नहीं लड़ेंगी कोई चुनाव, बताया ये दर्द

कैच ब्यूरो | Updated on: 12 February 2018, 9:12 IST

बीजेपी की फायरब्रांड नेता और केंद्रीय पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री उमा भारती ने 2019 का चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा की है. उन्होंने कहा कि वे झांसी से ही नहीं बल्कि कहीं से भी चुनाव नहीं लड़ेंगी. इसका कारण उन्होंने खुद के ऊपर हावी हो रही बीमारी को बताया है. उन्होंने कहा कि उनकी कमर और घुटनों की बीमारी चलने-फिरने नहीं देती. इसलिए उन्होंने निर्णय लिया है कि वे चुनाव नहीं लड़ेंगी.

अपने संसदीय क्षेत्र झांसी में रविवार को संवाददाताओं से चर्चा के दौरान अपनी उम्र और स्वास्थ्य का हवाला देते हुए उमा भारती ने कहा, "अब मैं कोई चुनाव नहीं लड़ूंगी, मगर पार्टी के लिए काम करती रहूंगी." उन्होंने कहा कि वे झांसीवासियों के स्नेह और प्यार की कर्जदार हैं.

 

पार्टी की पुरानी यादों को संजोते हुए उन्होंने कहा, "भारतीय जनता पार्टी के जब दो सांसद थे, तब से लेकर अब तक पार्टी के लिए काम कर रही हूं. पार्टी के लिए बहुत मेहनत की है, इसी का नतीजा है कि अब इस उम्र में शरीर जवाब दे गया है. तबीयत ठीक रही तो पार्टी के लिए प्रचार करेंगी." उमा भारती भले ही स्वास्थ्य का हवाला दे रही हों लेकिन उनके बयान में गंगा मंत्रालय छूटने का मलाल साफ दिख रहा है.

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अपने काम को लेकर उन्होंने कहा कि सांसद की हैसियत से संतुष्ट नहीं हूं लेकिन मंत्री की हैसियत से संतुष्ट हूं. राम मंदिर के सवाल पर उन्होंने कहा कि न्यायालय अपना फैसला सुना चुका है, लिहाजा आपसी सहमति से राम मंदिर का निर्माण हो जाना चाहिए.

 

गौरतलब है कि उमा भारती खजुराहो, भोपाल के बाद झांसी से सांसद है. वे बड़ा मलेहरा और चरखारी से विधायक रह चुकी हैं. वे बुंदेलखंड की बड़ी प्रभावशाली नेता और पूरे देश में हिंदूवादी नेता के तौर पर अपनी पहचान रखती हैं.

खुद को बताया राजनीति का 'मोगली'
केंद्रीय स्वच्छता एवं जल संरक्षण मंत्री उमा भारती ने यहां रविवार को कहा कि वह वर्तमान दौर की राजनीति में 'मोगली' हैं. यहां आयोजित तीन दिवसीय शैव महोत्सव के समापन अवसर पर मंच संचालक ने जब साध्वी उमा भारती का परिचय 'प्रखर वक्ता' के रूप में दिया, तो उमा ने मोगली का किस्सा सुना डाला.

 

उन्होंने कहा, "मोगली नाम का बच्चा जंगल में पैदा हुआ था, जिसे भेड़िए उठा ले गए, बाद में वह मिल गया. मैं सोचती हूं कि अगर मोगली राजनीति में आ जाए तो वह क्या-क्या करेगा, वही कुछ मैं भी करती हूं. किसी के बारे में ऐसी चर्चा हो जाती है कि वह ऐसा है और यह बात आगे चलती रहती है, इसी तरह मेरे साथ हुआ. कहीं प्रवचन दिए तो लोगों ने प्रखर वक्ता कह दिया और आज भी वह कहा जा रहा है. वास्तव में मैं प्रखर वक्ता हूं नहीं."

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उन्होंने आगे कहा, "मैं तीन-चार दिन पहले अपने बारे में सोच रही थी, तभी मुझे मोगली की कहानी याद आ गई. यह मनगढ़ंत कहानी नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश की ही घटना है. मोगली भेड़ियों के पास से वापस आ जाता है. मैं सोचती हूं कि अगर मोगली राजनीति में आ जाए तो वह क्या क्या करेगा, वही मैं भी करती हूं. कभी कुछ कह दिया, बाद में लगता है कि अरे यह क्या कह दिया."

First published: 12 February 2018, 9:12 IST
 
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