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स्टडी रिपोर्ट: मुस्लिमों को दिल्ली-एनसीआर में किराए के मकान की मुश्किल

कैच ब्यूरो | Updated on: 18 May 2016, 14:08 IST

देश के कई मेट्रोपोलिटन शहर मसलन दिल्ली और मुंबई में यह बात कई बार सामने आई कि अल्पसंख्यक (मुस्लिमों) को लोग किराये पर मकान देने से कतराते हैं.

अभी हाल में ऐसी ही एक घटना देखने को मिली, जब पुणे में सिविल परीक्षा की तैयारी करने आए कई मुस्लिम लोग अपना सरनेम हिंदू लगाकर घर तलाश रहे थे.

इसी तरह के मामले में फिनलैंड की युनाइटेड नेशन्स यूनीवर्सिटी, वर्ल्ड इंस्टीट्यूट ऑफ डेवेलपमेंट इकोनॉमिक्स रिसर्च (यूएनआईडब्लूआईडीईआर) ने अपने रिसर्च में बताया है कि दिल्ली, गुड़गांव (गुरुग्राम) और नोएडा में लोग मुस्लिम समुदाय के लोगों को अपना घर किराए पर नहीं देना चाहते हैं. 

एक चौथाई को ही मिला घर


रिसर्च के मुताबिक दिल्ली, गुड़गांव (गुरुग्राम) और नोएडा में मुस्लिम समुदाय के लोगों को घर तलाशने के लिए कम से कम 45 जगह आवेदन देना पड़ता है, जिसमें से 10 लोग ही उन्हें घर देने पर राजी होते हैं.

वहीं हिंदू समुदाय के लोग 28 जगह पर आवेदन करते हैं, तो उन्हें सभी लोग घर देने को तैयार रहते हैं. इस रिसर्च के लिए संस्थान ने 2015 के दो महीने के आंकड़े लिए हैं, जो भारत की मशहूर वेबसाइट्स के थे, जो देश में लोगों की घर ढूंढ़ने में मदद करती हैं.

First published: 18 May 2016, 14:08 IST
 
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