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गुजरात की दलित अस्मिता यात्रा को मिल रहा वैश्विक समर्थन

राजीव खन्ना | Updated on: 7 February 2017, 8:24 IST

गुजरात के गिर सोमनाथ जिले में अहमदाबाद से उना तक शुरू हुए दलित अस्मिता मार्च का संदेश न केवल देश बल्कि विदेशों में भी गुंजायमान हो रहा है. गुजरात के दलितों द्वारा अपने अधिकारों के लिए शुरू किए गए इस आंदोलन ने चारों ओर से तर्कवादियों, कार्यकर्ताओं, दलित समर्थकों और तमाम दलित समुदायों का समर्थन प्राप्त किया है. यह सभी समर्थक दलितों पर होने वाले अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाने के लिए आगे आ रहे हैं.

हिंदूवादी संगठनों को परेशान करने के लिए जिग्नेश मेवानी और अन्य दलित युवकों के नेतृत्व में शुरू हुई इस यात्रा में तमाम राज्यों से प्रतिनिधियों के समूह गुजरात में पहुंच रहे हैं.

जुड़ते जा रहे हैं लोग

मेवानी कहते हैं, 'पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार के प्रतिनिधिमंडल हमारे पास पहले ही पहुंच चुके हैं. हमें उम्मीद है कि 14 अगस्त को रोहित वेमुला की मां भी हमारे साथ जुड़ेंगी और 15 अगस्त को उना में यात्रा खत्म होने तक साथ रहेंगी.'

गुजरात समेत देश भर में दलितों पर होने वाले अत्याचारों के मुद्दे पर जर्मनी के गॉटिंगेन विश्वविद्यालय में भी एक विरोध प्रदर्शन किया गया जिसमें न केवल भारतीय बल्कि बुनियादी मानवाधिकारों के लिए प्रतिबद्ध समिति के तमाम शोधकर्ताओं और छात्रों ने भी हिस्सा लिया.

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पाकिस्तान स्थित सिंध के लरकाना के विद्वान सूफी हुसैन ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'आज, गॉटिंगेन विश्वविद्यालय और गेटे इंस्टीट्यूट गॉटिंगेन, जर्मनी में हम छात्रों और शोधकर्ताओं ने भारत में दलितों पर होने वाली अमानवीय हिंसा के विरोध में एक विरोध प्रदर्शन आयोजित किया. ऐतिहासिक दृष्टि से दलितों को शवों और मानव मल को हटाने के लिए मजबूर किया जाता है. हम दलितों के खिलाफ होने वाली हिंसा के इस कृत्य की निंदा करते हैं और प्रदर्शनकारियों के समर्थन में खड़े हैं.'

इसी तरह कनाडा में भी इस मुद्दे पर चर्चा की गई और इस पर विशेषरूप से एनआरआई रेडियो नेटवर्क पर बात की गई. एक वरिष्ठ पत्रकार और कार्यकर्ता गुरप्रीत सिंह ने कैच न्यूज को बताया कि जब से मोटा समधियाला में दलित युवकों को शारीरिक दंड देने की घटना सामने आई है, इसे भारतीयों समेत दक्षिण एशियाई मुल्कों के लोगों द्वारा गंभीरता से लिया गया है.

गुरप्रीत कहते हैं, "सरे में 30 जुलाई को आयोजित प्रदर्शन में भारी तादाद में दक्षिण एशियाई समूह के लोग सामने आए. बरजिंदर सिंह और हरबंस सिंह औज्ला जैसे कार्यकर्ताओं ने केंद्र की मौजूदा भाजपा सरकार के शासन में अल्पसंख्यकों और दलितों और पर होने वाले अत्याचारों पर चिंता जताई. दलित कार्यकर्ता परम कैंथ ने कहा कि हिंदु चरमपंथियों द्वारा निचली जाति के हिंदुओं या अछूतों पर हमले किए जा रहे हैं. बरजिंदर सिंह ने कहा कि वे (हिंदूवादी ताकतें) दलितों के साथ ही सभी अल्पसंख्यकों को निशाना बना रही हैं. पहले उन्होंने मुसलमानों पर निशाना साधा और अब उन्होंने दलितों को चुना है. कनाडा में कार्यकर्ताओं ने इस यात्रा में शामिल लोगों के प्रति अपनी एकजुटता दिखाई."

वक्त आ चुका है कि हिंदू तालिबानों को एहसास करा दिया जाए कि वे एक जानवर (गाय) की रक्षा के लिए जानवर बन गए हैं

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इसी तरह मेलबर्न में रहने वाले दलितों, विशेषकर पंजाब के लोगों ने एक वीडियो क्लिप के जरिये इस यात्रा को अपना समर्थन जताया है. वीडियो में बोलने वाले वक्ता को भारत में दलितों पर होने वाले हमलों की भर्त्सना करते हुए सुना जा सकता है. साथ ही उन्होंने बीते हजारों सालों से दलितों पर होने वाले अन्यायों पर भी निशाना साधा.

मेवानी की फेसबुक वॉल पर एक पोस्ट में लिखा है, 'दलितों और मुसलमानों पर अत्याचार अपने चरम पर पहुंच चुका है. अब वक्त आ चुका है कि हिंदू तालिबानों को यह एहसास करा दिया जाए कि वे एक जानवर (गाय) की रक्षा के लिए पूरी तरह जानवर बन चुके हैं. आज से लेकर 15 अगस्त तक हमनें गुजरात दलित यात्रा के समर्थन में देश के सभी राज्यों और शहरों से लोगों के समर्थन को लेकर एकजुट होने पर सहमति जताई है.'

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उन्होंने कैच न्यूज को बताया कि आंबेडकर एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका, आंबेडकर इंटरनेशनल मिशन, बोस्टन स्टडी ग्रुप, आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर, आंबेडकर एसोसिएशन ऑफ कैलीफोर्निया समेत अमेरिका के तमाम संगठनों और प्रगतिशील समूहों ने उना मार्च के समर्थन को सहमति देते हुए यह संदेश दिया है कि वे अगले तीन दिनों में अपने संबंधित स्थानों पर इस संबंध में कार्यक्रम आयोजित करेंगे.

उन्होंने कहा, 'अमेरिका और कनाडा के आंबेडकरवादियों ने 12 अगस्त को कोप्ले स्क्वायर और हार्वर्ड स्क्वायर क्षेत्रों में हमारी यात्रा के समर्थन और प्रसार के लिए विरोध प्रदर्शन करने का फैसला लिया है. '

बदलाव तो जरूर आएगा

यात्रा के आयोजकों ने कहा कि दिल्ली स्थित जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्रों का एक दल पहले ही उनसे साथ जुड़ चुका है, अब उन्हें उम्मीद है कि तमाम अन्य विश्वविद्यालयों के छात्र भी अगले तीन दिनों में उनके साथ जुड़ेंगे.

बुधवार को तातम गांव में इस यात्रा से जुड़ने वाले जालंधर के कार्यकर्ता रविकांत ने कहा, 'हम यहां यात्रा के समर्थन में इसलिए आए हैं क्योंकि हमें लगता है कि यह केवल गौ रक्षकों द्वारा की जाने वाली हिंसा या अत्याचार की घटनाएं नहीं हैं. हिंदू जाति व्यवस्था में निहित हो इसकी जड़े काफी गहरी हैं जिसकी वजह से हमने हजारों सालों तक नुकसान उठाया और अब इसे बंद किया जाना है.'

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उन्होंने कहा, 'इससे पंजाब में जातिवाद के खिलाफ हमारे संघर्ष को तेज करने के लिए काफी बेहतर अनुभव मिल जाएगा. हमें विश्वास है कि इस संबंध में जागरूकता फैलाने और चर्चा करने से जनजागरण किया जा सकता है.'

अहमदाबाद के एक राजनीतिक पर्यवेेक्षक ने कहा, 'यह काफी अच्छा है कि यह संदेश पूरी दुनिया में पहुंचा है. देखते हैं कि अगली बार जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन मुल्कों की यात्रा पर जाएंगे तो इन मुद्दों पर कैसे अपने प्रिय अप्रवासी भारतीयों का सामना करेंगे.'

First published: 12 August 2016, 8:22 IST
 
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