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दुबई में घर खरीदने वाले 7,500 भारतीयों की आयकर विभाग ने शुरू की जांच

कैच ब्यूरो | Updated on: 19 October 2018, 10:59 IST

आयकर (आईटी) विभाग ने कम से कम 7,500 भारतीयों के खिलाफ जांच शुरू की है, जिन्होंने पिछले कुछ वर्षों में दुबई में संपत्तियां खरीदी हैं. कर विभाग की इंटेलिजेंस एंड क्रिमनल इन्वेस्टिगेशन (आई एंड सीआई) शाखा ने भारतीय नागरिकों का डेटा इकट्ठा किया है जिन्होंने दुबई में रियल एस्टेट में निवेश किया है और विदेशों में ऐसे निवेश हैं. साथ ही इनके धन के स्रोत जांच की जा रही है. सूत्रों ने कहा कि कर प्राधिकरण भी जांच कर रहा है कि क्या भारतीयों द्वारा अधिग्रहित इन रियल एस्टेट परिसंपत्तियों को कर एजेंसी को घोषित किया गया था.

दुबई लैंड डेवलपमेंट के अनुसार 2018 के पहले तीन महीनों में दुबई में कम से कम 1,387 भारतीय नागरिकों ने दुबई में 1,550 अचल संपत्ति लेनदेन के माध्यम से एईडी 3 अरब का निवेश किया है. अकेले 2017 में भारतीय निवेशकों ने दुबई में एईडी 15.6 बिलियन का निवेश किया. आंकड़ों के अनुसार 2013 और 2017 के बीच पांच वर्षों में भारतीय नागरिकों ने दुबई में एईडी 83.65 बिलियन के पॉपर्टी खरीदी है.

 

भारतीय कानूनों के तहत भारतीयों के लिए दुबई में संपत्ति खरीदना गैरकानूनी नहीं है. 1999 के फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट के अनुसार रेजिडेंट और नॉन रेजिडेंट को विदेशों में अचल संपत्तियों की अनुमति है. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) नियम के तहत एक रेजिडेंट विदेशों में संपत्तियों और प्रतिभूतियों में सालाना 250,000 डॉलर तक निवेश कर सकता है.

हालांकि भारतीय कर नियम भारत में रेजिडेंट और सामान्य निवासियों को वित्तीय वर्ष 2011-12 के बाद से एफए (विदेशी संपत्ति) अनुसूची के तहत आईटी रिटर्न में विदेशी संपत्तियों का खुलासा करना आवश्यक है. कर अधिनियम (ब्लैक मनी एक्ट) लागू करने के बाद विदेशी संपत्तियों का खुलासा नहीं करने पर जुर्माने का प्रावधान है.

ब्लैक मनी एक्ट के तहत अघोषित विदेशी आय और परिसंपत्ति का कर 30 प्रतिशत पर कर लगाया जाता है. द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार कथित वित्तीय अपराधों के लिए भारत में विभिन्न एजेंसियों द्वारा जांच की गई कम से कम 29 भारतीयों और ओपेक ऑफशोर इकाइयों के लिंक दुबई में 20 से अधिक प्रमुख रियल एस्टेट परियोजनाओं में संपत्तियों से जुड़े लोगों के वैश्विक डेटाबेस पर आते है.

First published: 19 October 2018, 10:50 IST
 
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