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बजट 2018 LIVE: सेना के लिए खजाना खोलेगी मोदी सरकार!

कैच ब्यूरो | Updated on: 1 February 2018, 10:54 IST

वित्तमंत्री अरुण जेटली आज मोदी सरकार का पांचवां और अंतिम पूर्णकालिक बजट पेश करेंगे. इस बजट से हर तबके को कुछ ना कुछ उम्मीदें हैं. क्योंकि जीएसटी लागू होने के बाद मोदी सरकार का यह पहला बजट है. सेना भी वित्तमंत्री अरुण जेटली की बजट पोटली पर नजर गड़ाए हुए है कि उसके लिए भी वित्तमंत्री कुछ ना कुछ नई योजनाओं की घोषणा करेंगे.

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सेना को रक्षा बजट में बढ़ोतरी की उम्मीद

पााकिस्तानी आतंकवाद और चीन से लगातार मिल रही चुनौतियों की वजह से सेना को और सशक्त करने की जरूरत है. इसके लिए गुरुवार एक फरवरी को वित्तमंत्री अरुण जेटली सेना के बजट में कुछ फेरबदल कर सकते हैं. सेना को उम्मीद है कि इस बार देश का रक्षा बजट जीडीपी के मौजूदा 1.56 प्रतिशत से बढ़कर 3 फीसदी तक लाया जा सकता है. इससे सेना मजबूत होगी. साथ ही आतंकवाद, घुसपैठ जैसी तमाम चुनौतियों से निपटने में सक्षम होगी. लेकिन इस तरह की संभावनाएं कम ही नजर आ रही हैं.

पाकिस्तान और चीनी से निपटने की चुनौती

बतादें कि पिछले कई सालों से देश के सामने पाकिस्तान और चीन का रवैया दुश्मनी भरा रहा है. जिससे सरहद पर लगातार तनाव बढ़ता रहा है. पिछले साल डोकलाम में चीन ने भारत के सामने कई चुनौतियां दीं और चीनी सेना दो महीने तक डोकलाम में टिकी रही. जिसने दोनों देशों में भारी तनाव पैदा कर दिया. यही नहीं लाइन ऑफ कंट्रोल पर ना केवल रिकार्ड संख्या में युद्धविराम का उल्लंघन किया गया. बल्कि सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भी पाकिस्तान की ओर से घुसपैठ की तमाम कोशिशें होती रहीं. ऐसे में सेना प्रमुख जनरल विपिन रावत भी चीन और पाकिस्तान से दोतरफा युद्ध की संभावना से इनकार नहीं कर रहे.

रक्षा मामलों की संसदीय समिति भी कर चुकी है बजट बढ़ाने की सिफारिश

हाल ही में रक्षा मामलों की संसदीय समिति ने भी रक्षा क्षेत्र का बजट जीडीपी के मौजूदा 1.56 फीसदी से बढ़ाकर 3 प्रतिशत तक करने की सिफारिश की थी. बतादें कि दुनिया के तमाम देशों का सेना बजट हमारे देश से कहीं ज्यादा होता है. अमेरिका अपनी जीडीपी का कुल 4 प्रतिशत बजट खर्च करताहै. वहीं रूस 4.5, इजराइल 5.2, चीन 2.5 और पाकिस्तान 3.5 प्रतिशत रक्षा बजट के लिए आवंटित करता है.

हथियारों की खरीद के लिए कम पड़ सकती है धनराशि

इस बार सातवें वेतन आयोग और वन-रैंक-वन-पेंशन जैसे फैसलों के बाद हथियारों की खरीद के लिए धनराशि और कम पड़ सकती है. सरकार पर स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत ज़रूरतों के साथ वोटरों को लुभाने वाली योजनाओं पर ज्यादा धन देने के लिए दबाव होगा. इसलिए रक्षा बजट में बढ़ोतरी की उम्मीद लगाना बेमानी है.

First published: 1 February 2018, 10:54 IST
 
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