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तीन तलाक पर विधेयक को मोदी सरकार की मंज़ूरी, कानून तोड़ने पर खानी होगी जेल की हवा

कैच ब्यूरो | Updated on: 15 December 2017, 16:39 IST

मोदी सरकार ने तीन तलाक पर बने विधेयक को मंजूरी दे दी है. शुक्रवार को कैबिनट की बैठक में इस बिल को मंजूरी दे दी गई. एक बार में तीन तलाक पर रोक लगाने के लिए बनाए गए इस विधेयक को सरकार अगले हफ्ते संसद में पेश कर सकती है. संसद का शीतकालीन सत्र शुक्रवार से शुरू हो गया है. ये सत्र 5 जनवरी तक चलेगा.

मोदी सरकार ने इस बिल को ‘द मुस्लिम वीमेन प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स इन मैरिज एक्ट’ नाम दिया है. इस विधेयक को शीतकालीन सत्र में पेश करने की सरकार ने पहले ही तैयारी कर ली है. राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में बनाए गए मंत्रियों के समूह ने इस बिल को तैयार किया है. 

इस बिल के मुताबिक एक बार में तीन तलाक लेने वाले शख्स को तीन साल की तक सजा हो सकती है. इसके अलावा इस अपराध को गैर जमानती बनाया गया है. तीन तलाक लेने वाले व्यक्ति पर जुर्माना लगाने का प्रावधान भी इस विधेयक में किया गया है.

ये बिल पीड़ित महिला को अपने और नाबालिग बच्चों के लिए गुजारा भत्ता मांगने के लिए मजिस्ट्रेट से गुहार लगाने की शक्ति देगा. पीड़िता को कितना गुजारा भत्ता देना है, उसकी धनराशि मजिस्ट्रेट तय करेगा. इस बिल के तहत, एक बार में किसी भी तरह का तीन तलाक (बोलकर, लिखकर या ईमेल, एसएमएस और व्हाट्सऐप जैसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से) गैरकानूनी होगा.

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस साल अगस्त में तीन तलाक पर प्रतिबंध लगा दिया था. कोर्ट के फैसले के बावजूद तीन तलाक के कई मामले सामने आ रहे हैं. इस तरह से तलाक देने पर दंडित किए जाने का प्रावधान नहीं होने के कारण ऐसा हो रहा है.

हम आपको बता दें कि गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में तीन तलाक पर कानून बनाने के लिए एक एक मंत्री समूह का गठन पीएम मोदी ने किया था. इसमें राजनाथ के अलावा वित्त मंत्री अरुण जेटली, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद, पीपी चौधरी और जितेंद्र सिंह शामिल थे. इस मसौदे को राज्यों के पास सलाह के लिए भेजा गया था. इस बिल को झारखंड, असम, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों का समर्थन मिला है.

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने एक बार मे तीन तलाक देने पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था, "तीन तलाक मुस्लिमों में शादी खत्म करने का सबसे खराब तरीका है." प्रधान न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा था, "ऐसे भी संगठन हैं जो कहते हैं कि तीन तलाक वैध है, लेकिन मुस्लिम समुदाय में शादी तोड़ने के लिए यह सबसे खराब तरीका है और यह अनवांटेड है."

पांच जजों की संविधान पीठ में जस्‍ट‍िस कुरियन जोसफ, जस्‍ट‍िस आरएफ नरीमन, जस्‍ट‍िस यूयू ललित और जस्‍ट‍िस अब्दुल नजीर भी शामिल थे, जबकि चीफ जस्टिस जेएस खेहर बेंच की अध्यक्षता कर रहे थे. 

हम आपको बता दें कि तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मोदी सरकार की तरफ से पेश अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने 5 सदस्यीय संविधान पीठ से कहा था, "अगर अदालत तुरंत तलाक (तीन तलाक) के तरीके को खारिज कर देती है, तो केंद्र सरकार मुस्लिम समुदाय के बीच शादी और तलाक से जुड़ा एक नया कानून लाएगी."

First published: 15 December 2017, 16:39 IST
 
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