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यूपी में अपना हाल जानने के लिए भाजपा ने शुरू किया इंटरनल सर्वे

सुहास मुंशी | Updated on: 7 February 2017, 8:23 IST

यूपी में भाजपा ने गांधी जयंती को स्वच्छ भारत दिवस के रूप में मनाने के अलावा विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी का वृहत स्तर पर आकलन करने के लिए एक सर्वे भी शुरू किया. आदेश अमित शाह ने दिया था, जिन्हें बूथ-स्तर पर प्रबंधन के लिए पार्टी की स्थिति का जायजा लेना है.

पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शाह पूरे प्रोजेक्ट को खुद देख रहे हैं. उत्तरप्रदेश के भाजपा नेताओं ने बूथ-प्रभारियों से मिलने और पार्टी की मजबूती और कमियों का जायजा लेने के लिए पूरे राज्य में 2 अक्टूबर से 19 दिन का दौरा शुरू किया है.

कैसे करेंगे सर्वे?

भाजपा नेता राज्य के 403 निर्वाचन क्षेत्रों में 1.21 लाख बूथों का दौरा करेंगे, और 21 अक्टूबर तक अपना सर्वे पूरा करेंगे. पूरे राज्य में पार्टी और संघ के नेताओं को सभी 15 से 18 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में बूथ प्रभारियों से मिलने और हर बूथ पर पार्टी की मजबूती और कमियों पर नोट लिखने को कहा है.

सही आकलन के लिए, सभी नेताओं को अपने क्षेत्र से बाहर काम दिया गया है. मसलन यूपी में पार्टी के प्रभारी ओम माथुर, 17 अन्य विधानसभा सीटों के अलावा गोरखपुर जाएंगे, जबकि भाजपा अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य साहरनपुर, बदायूं और 15 अन्य निर्वाचन क्षेत्रों का दौरा करेंगे और बूथ प्रभारियों से मिलेंगे.

पार्टी ने अपने जमीनी स्तर के कार्यकताओं को उत्साहित करने के लिए 'बूथ जीता, चुनाव जीता' और 'मेरा बूथ सबसे मजबूत' जैसे नारे दिए हैं. नेता बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं से मिलकर, केंद्र में मोदी सरकार की ढाई साल की उपलब्धियों के बारे में बताएंगे. और वे मुद्दे भी बताएंगे जिन पर उन्हें राज्य की सत्तासीन समाजवादी पार्टी को घेरना है. यह कवायद पूरी करने के बाद राज्य के नेता इलाहाबाद में 25 अक्टूबर को आगे का कैंपेन तैयार करने के लिए शाह से मिलेंगे.

कवायद का मुद्दा

यूपी में भाजपा के प्रवक्ता चंद्र मोहन ने कहा, 'यह पूरी कवायद पार्टी की मजबूती और कमियों को समझने के लिए है, ना कि लोगों के बीच कैंपेन करने के लिए. हम उन सभी मुद्दों पर विचार करेंगे, जो राज्य के सभी हिस्सों में लोगों को प्रभावित करते हैं और उसी के हिसाब से हमारी प्रतिक्रियाएं और कैंपेन का शेड्यूल तय करेंगे. यह प्रक्रिया हमें बिल्कुल सही आकलन दे कि आज हम राज्य में कहां खड़े हैं, और हमें हमारे अतिरिक्त प्रयास किस दिशा में करने हैं.'

पार्टी के एक सूत्र के मुताबिक जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा पार सर्जिकल स्ट्राइक और दलितों पर अत्याचार जैसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर जनता की प्रतिक्रियाओं और भावनाओं को भी शामिल किया जाएगा, यह जानने के लिए कि वे ग्रामीण और शहरी इलाकों में कितने महत्व के हैं.

केंद्र के नेता सर्जिकल स्ट्राइक पर अब तक चुप हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने उन पर प्रतिक्रिया नहीं की और ना ही शाह ने सिवाय ट्विटर पर बधाई संदेश देने के कुछ कहा.

इसका एक कारण यह बताया जा रहा है कि यदि पाकिस्तान तनाव बढ़ाने का फैसला लेता है, तो पार्टी तय नहीं कर पाई है कि उसे क्या प्रतिक्रिया करनी है. दूसरी वजह यह है कि रणनीति के जानकारों ने भारत के रक्षा प्रतिष्ठान को कम से कम गर्वोक्ति करने को कहा है, क्योंकि पाकिस्तान ने यह मानने से इनकार किया है भारत की ओर से कोई सर्जिकल स्ट्राइक हुए हैं.

First published: 5 October 2016, 7:48 IST
 
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