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उत्तर प्रदेेश बीजेपी अध्यक्ष का थाने-कचहरी से गहरा रिश्ता है

आवेश तिवारी | Updated on: 8 April 2016, 23:20 IST
QUICK PILL
  • उत्तर प्रदेश बीजेपी के नवनियुक्त अध्यक्ष केशव मौर्या के ऊपर हत्या और धोखाधड़ी के लगभग एक दर्जन मामले दर्ज हैं. गौरतलब है कि केशव मौर्या की नियुक्ति सबके लिए सरप्राइज है. मौर्या का नाम संभावितों की सूची में दूर-दूर तक नहीं था.
  • मौर्या की नियुक्ति से केंद्रीय बीजेपी नेतृत्व ने दो मकसद पूरे किए हैं. मौर्या पिछड़ी जाति के हैं राजनैतिक रसूख के लिहाज से बेहद हल्के.

बीजेपी के गले में फंस गया था उत्तर प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष का मसला. राजनाथ सिंह और अमित शाह के धड़ों में फंसकर प्रदेश अध्यक्ष का मसला काफी लंबा खिंच गया था. ऐसे में शुक्रवार को दोपहर में अचानक से बीजेपी के लखनऊ कार्यालय से जारी हुआ केशव प्रसाद मौर्या का नाम लोगों को चौंका गया.

जाहिर है उनका नाम सामने आते ही उनके बारे में जानने की लोगों में उत्सुकता बहुत बढ़ गई थी. कैच की शुरुआती जांच में पता चला है कि केशव मौर्या का अतीत बेहद दागदार रहा है. उनके खिलाफ तक़रीबन एक दर्जन आपराधिक मामले दर्ज है. आरोपों की फेहरिश्त में हत्या, धोखाधड़ी और दंगा-फसाद के मामले शामिल हैं.

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इसके अलावा उनके ऊपर सरकारी कर्मचारी को कामकाज के दौरान धमकी देने जैसे गंभीर मामले भी शामिल हैं. निर्वाचन आयोग को दिए गए अपने हलफनामे में मौर्या ने खुद के खिलाफ चल रहे मामलों की जो सूची दी है उससे पता चलता है कि कौशाम्बी जिले के पश्चिम शरीरा, पडंसा, कोखराज, मंझनपुर के अलावा इलाहबाद जनपद के कर्नलगंज और जार्जटाउन थाने में केशव मौर्या के खिलाफ कुल 11 मामले लंबित है.

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ये मामले अलग-अलग अदालतों में चल रहे हैं. हालांकि किसी भी मामले में उन्हें अभी तक सजा नहीं हुई है. मौर्या के खिलाफ हत्या का एक मुकदमा 2014 में दर्ज किया गया है जिसकी सुनवाई कौशाम्बी सेशन कोर्ट में नियमित तौर पर हो रही है.

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मौर्या कौशाम्बी में ही धोखाधड़ी के भी एक मामले में मुकदमा झेल रहे हैं. दबंग नेता के तौर पर मशहूर फूलपुर से सांसद मौर्या लंबे समय तक विहिप से जुड़े रहे हैं. इसके अलावा उन्होंने 18 वर्ष तक संघ के प्रचारक के रूप में भी काम किया है.

गौरतलब है कि फूलपुर संसदीय सीट से कभी पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू चुनाव लड़कर सांसद बने थे और हाल फिलहाल में यह सीट हिस्ट्रीशीटर अतीक अहमद की संसदीय क्षेत्र के रूप में प्रसिद्ध रही. केशव मौर्या ने 2002 में इलाहबाद की शहर पश्चिमी विधानसभा सीट से बीजेपी प्रत्याशी के रूप में अपने राजनीतिक सफर शुरुआत की थी. उन्हें बसपा प्रत्याशी राजू पाल ने हराया था. इसके बाद वर्ष 2007 के चुनाव में भी वे इसी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव हार गए.

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2012 के चुनाव में मौर्या ने अपनी सीट बदलते हुए सिराथू विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और उन्हें भारी जीत मिली. दो वर्ष तक विधायक रहने वाले केशव ने पहली बार फूलपुर संसदीय सीट पर बीजेपी का परचम फहराया है. मोदी लहर में इस सीट पर पांच लाख वोट हासिल कर उन्होंने एक इतिहास बनाया था.

First published: 8 April 2016, 23:20 IST
 
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