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योगी ने डिंपल यादव समेत कर्इ दिग्गज नेताआें की 'Z प्लस' सुरक्षा हटार्इ

कैच ब्यूरो | Updated on: 23 April 2017, 13:45 IST

पीएम मोदी के लाल बत्ती कल्चर खत्म करने के बाद अब यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने वीआईपी कल्चर खत्म करने की ओर एक बड़ा कदम उठाया है. सीएम योगी ने पूर्ववर्ती सरकार के कई मंत्रियों और नेताओं की सुरक्षा में कैंची चला दी है. 

उन्होंने सपा की कन्नौज से सांसद और पूर्व सीएम अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव, पूर्व कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव, आजम खान, राज्यसभा सदस्य राम गोपाल यादव समेत कई नेताओं को प्रदान की जाने वाली सुरक्षा में कटौती कर दी है. डिंपल, शिवपाल और आजम की ‘जेड’ श्रेणी की सुरक्षा को घटाकर ‘वाई’ श्रेणी कर दिया गया है.

योगी सरकार ने सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव, पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और बीएसपी प्रमुख मायावती की सुरक्षा बरकरार रखी है. वहीं, बीजेपी के फायर ब्रांड नेता और राज्यसभा सांसद विनय कटियार की सुरक्षा ‘वाई’ श्रेणी से बढ़ाकर ‘जेड’ श्रेणी कर दी गई है.

बीजेपी नेता विनय कटियार को मिली जेड श्रेणी की सुरक्षा

बीजेपी के फायरब्रांड नेता विनय कटियार की सुरक्षा को बढ़ाया गया है. अब उनको जेड श्रेणी की सुरक्षा मुहैया कराई गई है. सुरक्षा समिति की बैठक के बाद शासन ने यह निर्णय लिया. 

आशू मलिक व अभय सिंह समेत 100 लोगों की सुरक्षा वापस
सरकार बनते ही सीएम योगी ने जता दिया था कि उनकी सरकार के लिए वीआईपी सिर्फ आम जनता है. यही वजह है कि सरकार ने सुरक्षा समिति की बैठक के बाद आशू मलिक, राकेश यादव, अभय सिंह और अतुल प्रधान समेत करीब 100 नेताओं की सुरक्षा वापस ले ली है. हाल ही में गृह विभाग की बैठक के बाद पूर्व सरकार में नेताओं और मंत्रियों को दी गई सुरक्षा के संबंध में रिपोर्ट मंगाई. जिसके बाद सुरक्षा घटाने का फैसला लिया गया. 

कैसे और किन्हें मिलती है सुरक्षा
किसी राजनीतिक या विशिष्ट व्यक्ति को वीआईपी सुरक्षा देने का फैसला खतरे के आकलन के बाद होता है. चार श्रेणियों में सुरक्षा प्रदान की जाती है, जिसे जेड प्लस, जेड, वाई एवं एक्स श्रेणी कहा जाता है. सुरक्षा हासिल करने के लिए सुरक्षा मांगने वाले आवेदक को संभावित खतरे के बारे में बता कर सरकार के समक्ष आवेदन करना होता है.

राज्य सरकार व्यक्ति द्वारा बताए खतरे के आकलन पर खुफिया एजेंसियों से रिपोर्ट मांगती है. इसकी पुष्टि होने पर राज्य में गृह सचिव, महानिदेशक और मुख्य सचिव की एक समिति यह तय करती है कि उसे संभावित खतरे के मद्देनजर किस श्रेणी की सुरक्षा दी जाए. ऐसे व्यक्ति का ब्यौरा औपचारिक मंजूरी के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय को भी दिया जाता है. 

सरकार के इस कदम को वीआईपी संस्‍कृति को खत्‍म करने की मुहिम से जोड़कर देखा जा रहा है. इसी के तहत सीएम योगी ने प्रमुख सचिव गृह को सिर्फ जरूरत के मुताबिक सुरक्षा देने के निर्देश दिए थे .

First published: 23 April 2017, 13:29 IST
 
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