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इत्तेहाद फ्रंट: सभी दलों में दलदल है इसलिए उत्तर प्रदेश में मुस्लिम बना रहे हैं एक नया दल

पत्रिका स्टाफ़ | Updated on: 6 August 2016, 8:13 IST

यूपी का मुस्लिम वोटर किधर जाएगा, इस बारे में मोटी मोटा कहा जा सकता है कि वह समाजवादी पार्टी के साथ रहेगा. लेकिन जानकारों की मानें तो अब वह मौका और दस्तूर के हिसाब से अपने नफे-नुकसान को ध्यान में रखकर वोट करता है. बावजूद इसके हर दल मुसलमानों को रिझाने की जुगत में लगे हैं.

तमाम दलों के दलदल में मुसलमानों का हितैषी एक नया दल उत्तर प्रदेश में आकार ले रहा है. मजेदार बात यह है कि यह कोई एक दल न होकर खुद ही कई दलों का मिश्रण है. खुद को मुस्लिम वोटर का हितैषी बताने वाला यह मोर्चा लगातार खुद को मजबूत कर रहा है. हालांकि इसका भविष्य क्या होगा अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी.

मुस्लिम समाज की दावेदार पार्टियों ने उत्तर प्रदेश में एक साझा मंच इत्तेहाद फ्रंट के नाम से खड़ा किया है. इसमें आवामी विकास पार्टी हाल ही में शामिल हुई है. इसके साथ ही इस फ्रंट में शामिल होने वाले दलों की संख्या आठ तक पहुंच गई है.

फ्रंट की अगली बैठक नौ अगस्त को राजधानी लखनऊ के राजाबाजार की आगामीर ड्योढ़ी स्थित चारयारी मंजिल में होगी. इंडियन मुस्लिम लीग के प्रदेश अध्यक्ष डॉ मतीन खान ने बताया कि इस बैठक में विधानसभा चुनाव की रणनीति पर चर्चा की जाएगी.

डॉ मतीन की मानें तो आगामी विधानसभा चुनाव में यह फ्रंट कांग्रेस और जदयू के साथ महागठबंधन भी बना सकता है. उनके इस आत्मविश्वास को हम 'सियासत में सबकुछ संभव है' वाले फलसफे की बुनियाद पर सच मान लेते हैं.

उन्होंने कहा कि फ्रंट की पूरी कोशिश है कि प्रदेश के विधानसभा चुनाव में मुसलमानों के साथ अति पिछड़ों और अति दलितों का एक मजबूत फ्रंट खड़ा किया जाय.

मुस्लिम समाज की दावेदार पार्टियों ने उत्तर प्रदेश में एक साझा मंच इत्तेहाद फ्रंट के नाम से खड़ा किया है

कौमी एकता दल, इत्तेहाद-ए-मिल्लत कान्फ्रेंस और एआईएमआईएम के भी इस फ्रंट में शामिल होने के बाबत सवाल पूछे जाने पर डॉ मतीन ने कहा कि अभी इन दलों की मंशा साफ नहीं है.

सपा से नाराज कौमी एकता दल के अफजाल अंसारी ने कहा कुछ दिन पहले कहा था कि सपा, बसपा और भाजपा के खिलाफ वे एक नये मोर्चे का गठन करेंगे. इसके बाद अटकलें थी कि शायद कौमी एकता दल भी इसी इत्तेहाद फ्रंट में शामिल होगा.

डॉ. मतीन ने कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की संभावनाओं पर कुछ ज्यादा ही जोर दिया. उन्होंने कहा कि यह और बेहतर होगा अगर तीसरे मोर्च को कांग्रेस का समर्थन मिलता है.

दूसरी तरफ एआईएमआईएम के यूपी प्रमुख शौकत अली ने कहा कि वो भी यूपी चुनाव में तीसरे मोर्चे के पक्ष में हैं. लेकिन नए मोर्चे को दलित और पिछड़ों के लिए लड़ना होगा. उन्होंने कहा कि हम उत्तर प्रदेश में बीजेपी, बसपा या भाजपा को आने से रोकना चाहते हैं.

यहां हमें तो तीन परिस्थितियों पर गौर करना होगा. इस तरह का कोई मुस्लिम दलों का मोर्चा दरअसल मुसलमानों को और अलग थलग करने का काम करेगा. दूसरा इस तरह के मोर्चे अतीत में भी उत्तर प्रदेश में बनते रहे हैं लेकिन उन्हें बड़ी आबादी ने हमेशा खारिज ही किया है. तीसरा इस तरह से मुस्लिमों की अलग पार्टी का ख्वाब देखने वाले इतिहास के कुछ कड़वे पलों को भूल जाते हैं जब इसी तर्ज पर बनी एक पार्टी ने देश के विभाजन की नींव रखी थी.

राजनीति के पंडितों का मानना है कि मौजूदा हालात बने रहे तो 2017 में मुस्लिम वोटों का जबर्दस्त विभाजन होगा, जिसका सीधे तौर पर फायदा भारतीय जनता पार्टी को मिलेगा. क्योंकि भाजपा अभी तक ये मानती रही है कि वो मुस्लिम वोट पा कर नहीं, बल्कि मुस्लिम वोटों के विभाजन से सत्ता तक पहुंचने में कामयाब होती है.

इत्तेहाद फ्रंट में शामिल दल

  • पीस पार्टी
  • राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल
  • इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग
  • वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया
  • परचम पार्टी ऑफ इंडिया
  • नेशनल लीग
  • मुस्लिम मजलिस
  • आवामी विकास पार्टी

First published: 6 August 2016, 8:13 IST
 
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