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यूपी एमएलसी चुनावः भारी दलबदल के बीच बाकी दलों की एका ने किया बीजेपी को पस्त

अतुल चंद्रा | Updated on: 11 June 2016, 18:48 IST

उत्तर प्रदेश विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव में विभिन्न पार्टियों के विधायकों के क्रॉस वोटिंग के बीच भारतीय जनता पार्टी के अतिरिक्त उम्मीदवार दया शंकर सिंह को हार का सामना करना पड़ा. दया शंकर सिंह कांग्रेस प्रत्याशी विवेक सिंह से तीन वोटों से हार गए. शुक्रवार को यूपी की 13 एमएलसी सीटों के लिए चुनाव हुए थे.

इस नतीजे से कांग्रेस के राज्य सभा प्रत्याशी कपिल सिब्बल को राहत मिली होगी. क्योंकि बीजेपी ने उनका खेल खराब करने के लिए प्रीति महापात्रा को समर्थन दिया है.

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दया शंकर सिंह को कुल 23 वोट मिले जबकि उनकी पार्टी के दूसरे प्रत्याशी भूपेंद्र सिंह की जीत के बाद केवल 12 वोट ही बचे थे. फिर वो तीन वोट से हार गए. कांग्रेस प्रत्याशी विवेक सिंह को कुल 26 वोट मिले. दया शंकर एमएलसी के चौदहवें प्रत्याशी थे जिस वजह से मतदान जरूरी हो गया था.

यूपी में कांग्रेस के 29 विधायक हैं. उनमें से एक खराब स्वास्थ्य के चलते वोट देने नहीं आ पाए. बाकियों ने समाजवादी पार्टी (सपा) को वोट दिया.

कांग्रेस के विधायक

कांग्रेस पार्टी को 27 की जगह कुल 26 वोट मिले. इनमें भी राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) के चार विधायकों के वोट शामिल थे. आरएलडी ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि उसके आधे विधायक सपा को वोट देंगे और आधे कांग्रेस को. कांग्रेस के कितने विधायकों ने खुद अपनी पार्टी को वोट नहीं दिया ये अभी तक साफ नहीं हुआ है.

बीजेपी और कांग्रेस से ज्यादा हैरानी करने वाली जिसके तीन प्रत्याशियों दिनेश चंद्रा, अतर सिंह राय और सुरेश कश्यप को कुल मिलाकर 90 वोट मिलने की बात कही जा रही है जबकि पार्टी के पास केवल 80 विधायक हैं और उसके पास सात विधायक कम थे. 

वहीं एमएलए राजेश त्रिपाठी ने पार्टी छोड़ दी है और दो अन्य विधायकों बाला प्रसाद अवस्थी और सीएल वर्मा ने बगावत कर दी है. इसलिए कुल मिलाकर उसके 10 वोट कम हो गए. चूंकि तृणमूल कांग्रेस ने बीएसपी को समर्थन दिया था इसलिए अंततोगत्वा उसे नौ विधायकों की जरूरत थी. 

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कहा जा रहा है कि सपा के छह विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की फिर भी उसके आठों प्रत्याशी जीत गए

90 वोट मिलने के मतलब है कि कम से कम नौ विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की. हालांकि प्रत्येक प्रत्याशी द्वारा प्राप्त वोटों की जानकार अभी नहीं मिल सकी है.

माना जा रहा है कि सपा के छह विधायकों ने अपनी पार्टी को वोट नहीं दिया. हालांकि सपा के आठों प्रत्याशी चुनाव जीतने में सफल रहे.

कहा जा रहा है कि सपा विधायक गुड्डु पंडित ने बीजेपी को वोट दिया था. गुड्डु पंडित ने वोट देने के बाद कहा, "वोट देते समय मैंने अपना दिमाग इस्तेमाल किया. मैंने वहीं वोट दिया जहां मैं सुरक्षित महसूस करता हूं."

गैर बीजेपी दलों की एकता

यूपी विधान परिषद चुनाव में बीजेपी के अतिरिक्त प्रत्याशी को जिस तरह हार मिली है उससे साफ है कि सभी गैर-बीजेपी दलों ने एकजुटता दिखाई है. हालांकि इन दलों ने पहले किसी गैर-बीजेपी समीकरण की घोषणा नहीं की थी. 

जहां आरएलडी ने कांग्रेस और सपा दोनों को वोट दिया वहीं पीस पार्टी के मुखिया मोहम्मद अयूब ने "सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ" कांग्रेस को वोट दिया.

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बाहुबली विधायक राजा भैया ने अपना समर्थन सपा को दिया था. राजा भैया ने कहा, "सभी सपा प्रत्याशी जीतेंगे. कुछ विधायकों के क्रॉस वोटिंग से फर्क नहीं पड़ेगा. हमें दूसरी पार्टियों के विधायकों का समर्थन प्राप्त है."

बाहुबली मुख्तार अंसारी ने भी "सांप्रदायिक शक्तियों को हराने" के लिए कांग्रेस और सपा को वोट दिलवाया. मुख्तार की पार्टी कौमी एकता दल के सदन में दो विधायक हैं.

First published: 11 June 2016, 18:48 IST
 
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