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मुख्तार अंसारी के कौमी एकता दल का समाजवादी पार्टी में विलय

कैच ब्यूरो | Updated on: 22 June 2016, 10:11 IST
(फेसबुक)

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले एक अहम सियासी घटनाक्रम में पूर्वांचल के इलाकों में प्रभाव रखने वाली पार्टी कौमी एकता दल का समाजवादी पार्टी में विलय हो गया है. कैच ने विलय के बारे में अपनी रिपोर्ट के जरिए पहले ही संकेत दे दिए थे.

लखनऊ में सपा सरकार में कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव की मौजूदगी में कौमी एकता दल का औपचारिक तौर पर सपा में विलय हुआ है. खास बात यह है कि कौमी एकता दल के नेता मुख्तार अंसारी की गिनती पूर्वांचल के बड़े माफिया डॉन में होती है.

मुख्तार अंसारी अभी मऊ सदर सीट से विधायक हैं, जबकि उनकी ही पार्टी के सिगबतुल्लाह अंसारी मुहम्मदाबाद विधानसभा सीट से एमएलए हैं. पार्टी की कमान मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी के पास थी. अफजाल अंसारी गाजीपुर लोकसभा सीट से सांसद रह चुके हैं.

अफजाल अंसारी ने दिए थे संकेत

मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी ने बताया था कि पार्टी के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की भावनाओं के अनुरूप वह समझौते की योजना बनाकर लखनऊ जा रहे हैं. शीघ्र ही सपा के बड़े नेताओं के साथ बैठक कर विलय की घोषणा कर दी जाएगी.

शनिवार को गाजीपुर के मुहम्मदाबाद स्थित अंसारी स्कूल में कौमी एकता दल की बैठक को लेकर सरगर्मियां तेज थीं. दल के राष्ट्रीय, प्रदेश सहित कई जिलों के पदाधिकारियों ने शिरकत की.

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बैठक के दौरान सबने एक स्वर से कहा कि वक्त का तकाजा है कि सांप्रदायिक ताकतों को रोकने के लिए सारे राग-द्वेष भुला कर उनके खिलाफ लामबंद हुआ जाए.

सभा में मौजूद वक्ताओं ने एक सुर से कहा था कि सपा ही वह पार्टी है, जो सांप्रदायिक ताकतों को करारा जवाब दे सकती है. उसकी मजबूती के लिए उसका साथ दिया जाए.

कौन हैं मुख्तार अंसारी?

मुख्तार अंसारी 1996 में मऊ सीट से बसपा के टिकट पर विधायक चुने गए थे. इसके बाद वे 2002 और 2007 में वे निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरे और जीत हासिल की. 2007 में मुख्तार अंसारी और उनके भाई अफजाल बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में शामिल हो गए.

बसपा प्रमुख मायावती ने रॉबिनहुड के रूप में मुख्तार अंसारी को प्रस्तुत किया और उन्हें गरीबों का मसीहा भी कहा था. मुख्तार अंसारी ने जेल में रहते हुए बसपा के टिकट पर वाराणसी से 2009 का लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन वह बीजेपी के मुरली मनोहर जोशी से 17,211 मतों के अंतर से हार गए. उन्हें जोशी के 30.52% मतों की तुलना में 27.94% वोट हासिल हुए थे.

दोनों भाइयों को 2010 में बसपा से निष्कासित कर दिया गया. 2012 के विधानसभा चुनाव के पूर्व मुख्तार ने कौमी एकता दल का गठन किया. इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व सांसद अफजाल अंसारी हैं. इस पार्टी को विधानसभा चुनाव में सिर्फ दो सीटें मिली, जबकि 2014 के लोकसभा चुनाव में पार्टी कोई भी सीट जीतने में असफल रही.

मुख्तार की आपराधिक छवि

कौमी एकता दल के नेता मुख्तार अंसारी अपनी आपराधिक छवि के लिए कुख्यात हैं. उन पर मऊ में 2005 में हुए सांप्रदायिक दंगों में भी आरोप लगे थे. हालांकि मुख्तार आरोपों से लगातार इनकार करते रहे हैं.

सपा सरकार के शासनकाल में हुए दंगों के दौरान मुख्तार अंसारी की खुली जिप्सी से दंगाग्रस्त इलाकों में घूमने वाली तस्वीर काफी चर्चित हुई थी. सात ऐसे मामले थे जिनमें मुख्तार अंसारी पर केस दर्ज हुआ था.

हालांकि इस मामले में तत्कालीन राजस्व परिषद की सदस्य नीरा यादव की जांच में कुछ साबित नहीं हो सका था. इसके अलावा मुख्तार पर बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की हत्या की साजिश रचने का भी आरोप है.

पूर्वांचल में डॉन बृजेश सिंह से गैंगवार

1995 में मुख्तार अंसारी ने राजनीति की मुख्यधारा में कदम रखा. 1996 में मुख्तार पहली बार विधानसभा के लिए चुने गए. उसके बाद से ही मुख्तार और पूर्वांचल के माफिया डॉन बृजेश सिंह के बीच रंजिश की खबरें आने लगीं.

2002 आते-आते इन दोनों के गैंग पूर्वांचल के सबसे बड़े गिरोह बन गए. कहा जाता है कि इसी दौरान एक दिन बृजेश सिंह ने मुख्तार अंसारी के काफिले पर हमला कराया. दोनों तरफ से गोलीबारी हुई. इस हमले में मुख्तार के तीन लोग मारे गए. बृजेश सिंह इस हमले में घायल हो गया था. उसके मारे जाने की अफवाह थी.

हालांकि बाद में बृजेश सिंह के दिल्ली पुलिस में गिरफ्त में आने पर इस पर ब्रेक लगा. इसके बाद बाहुबली मुख्तार अंसारी पूर्वांचल में अकेले गैंग लीडर बनकर उभरे. मुख्तार चौथी बार मऊ सदर से विधायक हैं. 

कृष्णानंद राय की हत्या

2005 में मुख्तार अंसारी जब जेल में बंद थे. इसी दौरान बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय और उनके 6 अन्य साथियों की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई. हमलावरों ने 6 एके-47 राइफलों से 400 से ज्यादा गोलियां चलाई थीं.

मारे गए सातों लोगों के शरीर से 67 गोलियां बरामद की गई थीं. इस हमले का एक महत्वपूर्ण गवाह शशिकांत राय 2006 में रहस्यमय हालात में मृत पाया गया था.

बताया जाता है कि उसने कृष्णानंद राय के काफिले पर हमला करने वालों में से मुख्तार अंसारी और मुन्ना बजरंगी के निशानेबाजों अंगद राय और गोरा राय को पहचान लिया था. 

कृष्णानंद राय की हत्या के बाद मुख्तार अंसारी के सबसे बड़े दुश्मन बृजेश सिंह ने कई साल पहचान छिपाकर काटे. 2008 में उसे दिल्ली पुलिस ने उड़ीसा से गिरफ्तार किया था. इस बीच माफिया डॉन बृजेश सिंह की भी अब यूपी की सियासत में एंट्री हो चुकी है. बृजेश सिंह ने इसी साल मार्च में हुए विधान परिषद चुनाव में जीत हासिल की थी.

बृजेश ने जेल में रहते हुए एमएलसी का चुनाव लड़ा था. निर्दलीय प्रत्याशी रहे बृजेश सिंह ने समाजवादी पार्टी की मीना सिंह को हराकर चुनाव जीता था. एमएलसी की शपथ के लिए बृजेश को शाहजहांपुर जेल से जमानत पर छोड़ा गया था.

First published: 22 June 2016, 10:11 IST
 
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