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उत्तर प्रदेश: छोटे दलों को साधकर मोदी को साधेंगे नीतीश कुमार

अनिल के अंकुर | Updated on: 4 May 2016, 8:05 IST
QUICK PILL

जनता दल युनाईटेड के नेता बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार की तैयारी पीएम नरेन्द्र मोदी से मुकाबला करने की है. यूपी में नीतीश कुमार और उनके दल की सक्रियता अचानक बढी है. यह इस बात का संकेत है कि वह यहां 2017 के विधानसभा चुनाव के जरिए 2019 के लोकसभा चुनाव की तैयारी में हैं.

आखिर ऐसा क्यों कर रहे हैं नितीश

दरअसल, मोदी और उसके पहले के अधिकांश प्रधानमंत्री यूपी के थे. राजनीतिक नजरिए से उत्तर प्रदेश बेहद महत्वपूर्ण राज्य है. सो नितीश कुमार भी उसी राह पर चल दिए हैं. यूपी में उन्हें कुर्मी नेता के रूप में उभारने की कोशिश की जा रही है; ऐसा इसलिए भी है क्योंकि यूपी में किसी और दल में कुर्मी जाति का कोई बड़ा नेता नहीं दिख रहा है. 

पूर्व मंत्री बेनी वर्मा बाराबंकी तक सिमट कर रह गए हैं. केन्द्रीय मंत्री संतोष गंगवार की पहचान बरेली बेल्ट तक सीमित हैं. विनय कटियार कभी पूरे कुर्मी समाज के नाता माने ही नहीं गए. सारे कुर्मियों को एक मंच के नीचे लाने की उनकी क्षमता भी संदेहास्पद है. 

मौजूदा कदम से इस बात की प्रबल संभावना है कि मिशन 2017 के तहत नीतीश कुमार एक प्रयोग करेंगे और उसके बाद यूपी के जरिए दिल्ली के राजनैतिक मंच पर अपनी छवि उभारने की कोशिश करेंगे. इस संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि अगर कोई सूरत बनी तो 2019 के चुनाव में लोकसभा जाने के लिए नीतीश कुमार यूपी की ही किसी सीट को चुनें. 

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यही कारण है कि नीतीश कुमार और उनके सहयोगी शरद यादव लगातार यूपी की राजनीति में दिलचस्पी दिखा रहे हैं. 2019 में पीएम बनने के लिए कुर्मी नेता बनने की तैयारी में जुट गए हैं. उन्हें साफ तौर पर मिशन 2019दिख रहा है. इस लिहाज से वे मोदी की राह पर चल रहे हैं. 

उनके नजदीकी साथियों का कहना हे कि अगर मोदी गुजरात से आकर यूपी के वाराणसी से चुनाव लड़ सकते हैं और जीतकर प्रधानमंत्री पद संभाल सकते हैं तो नीतीश भी बिहार से यूपी में अपना जलवा दिखा सकते हैं. इसलिए कुर्मी वोटों को एक जुट करने के साथ यादव वोट को संभालने के लिए शरद यादव बार-बार यूपी आ रहे हैं. 

अगर मोदी गुजरात से आकर यूपी के वाराणसी से चुनाव लड़ सकते हैं और जीतकर प्रधानमंत्री पद संभाल सकते हैं तो नीतीश भी बिहार से यूपी में अपना जलवा दिखा सकते हैं

दिल्ली में गैर भाजपाई सरकार में प्रधानमंत्री को लेकर जो नाम सबसे आगे हैं उनमें नीतीश कुमार और सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के नाम सबसे आगे हैं. 

लालू का भी नितीश को पूरा समर्थन

बिहार में जेडीयू के सहयोगी आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव भी मंच से नीतीश कुमार को पीएम पद का उपयुक्त नेता बता रहे हैं. लालू के इस समर्थन के बाद तो नीतीश की पीएम बनने की इच्छाओं को और मजबूती मिल गई है. 

इस बात से नितीश का खेमा काफी उत्साहित है और उनके दल के पदाधिकारी यहां के छोटे दलों को जदयू के साथ जोड़ने और एक गठबंधन करने की फिराक में हैं. एक खास बात है कि इस गठबंधन में सपा को इसलिए दूर रखा जा रहा है कि पीएम की होड में कहीं सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव अड़ंगा न लगा दें. ॉ

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याद रहे कि जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश निरंजन ने हाल ही में कहा था कि अब उन्हें सपा की जरूरत नहीं है और अगर सपा साथ आती है तो उसे जेडीयू की शर्तों पर आना होगा.

एक अनूठा सच यह भी

देश में सबसे ज्यादा पीएम देने वाले यूपी में लोकसभा की 80 सीटें हैं. अक्सर देश की राजनीति पर इस संख्या का बड़ा असर रहता है. यहां एख प्रचलित कहावत है कि दिल्ली का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर जाता है. यही कारण है कि गुजरात से तीन बार मुख्यमंत्री रहे नरेंद्र मोदी ने भी संसद जाने के लिए उत्तर प्रदेश का रुख किया. 

नीतीश कुमार बिहार में शराबबंदी के बाद अब यूपी में शराबबंदी का आंदोलन खड़ा करने की कोशिश में हैं. इस आंदोलन के जरिए नीतीश मध्यम वर्गीय परिवारों में अपनी पैठ बनाने की कोशिश करेंगे. 

छोटे दलों को भी अच्छे लगने लगे हैं नितीश

यूपी के छोटे दलों की बात करें तो उन्हें भी नितीश कुमार अब अच्छे लगने लगे हैं. बात चाहे पीस पार्टी की हो या फिर राष्ट्रीय लोकदल की. अपना दल को भी नितीश इसीलिए भा रहे हैं क्योंकि अपना दल के संस्थापक सोनेलाल पटेल की मौत के बाद से उस पार्टी की प्रमुख कृष्णा पटेल का मानना है कि यूपी की कुर्मी जाति को एकजुट करने की जरूरत है और इस मिशन में नीतीश कुमार की भूमिका अहम हो सकती हैं.

First published: 4 May 2016, 8:05 IST
 
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