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अखिलेश की सभाओं में पुलिस विभाग लगा रहा लाईट और टेंट

आवेश तिवारी | Updated on: 6 August 2016, 8:03 IST
(पत्रिका)

लगातार बढ़ते अपराध के लिए चर्चा में चल रहे उत्तर प्रदेश से एक और दिलचस्प खबर है. यहां मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सभाओं में लाईट, साउंड सिस्टम और टेंट लगाने का खर्चा उत्तर प्रदेश पुलिस के फंड से दिए जाने का अजीबोगरीब मामला सामने आया है.

प्रदेश के गृहविभाग ने बकायदा शासनादेश जारी करके उन जिलों के पुलिस खातों से करोड़ों की राशि अखिलेश यादव की सभाओं में टेंट और लाइट सिस्टम की व्यवस्था करने पर खर्च की है. मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जहां भी सभाएं या रैलियां की हैं, वहां प्रदेश का पुलिस विभाग भुगतान कर रहा है.

आश्चर्यजनक यह है कि अखिलेश यादव के प्रदेश के किसी गांव में छोटे से छोटे कार्यक्रम में भी एक से डेढ़ करोड़ रुपए की धनराशी खर्च की गई है. महत्वपूर्ण बात यह है कि उत्तर प्रदेश पुलिस मौजूदा समय में भारी धनसंकट से जूझ रही है.

उत्तर प्रदेश पुलिस की स्थिति इतनी खराब है कि 15 अगस्त, 26 जनवरी जैसे राष्ट्रीय महत्व के आयोजन भी चंदा मांग कर किये जाते हैं.

उत्तर प्रदेश के थाने में अपनी दरख्वास्त लेकर जाने वाले वादियों को एप्लीकेशन के लिए कागज़ का खर्च भी खुद उठाना पड़ता है.

पुलिस सुधारों से जुडी तमाम कवायद धनाभाव में दम तोड़ रही है, थानों में सामान्य स्टेशनरी खरीदने के लिए भी पैसे नहीं है और करोड़ो रुपए पुलिस विभाग मुख्यमंत्री के आयोजन पर तंबू-कनात और लाउडस्पीकर पर खर्च कर रहा है.

इस संबंध में जब हमने उत्तर प्रदेश के इलाहाबद पुलिस मुख्यालय से जुड़े अपर पुलिस महानिदेशक भागीरथ पी से बात की तो उन्होंने कहा कि लाइट, साउंड का खर्चा भी सुरक्षा से जुड़ा हुआ है, हम जिलों को इसके लिए अतिरिक्त फंड जारी करते रहे हैं.

जब उनसे पूछा गया कि क्या इसके लिए फंड की कमी आड़े नहीं आ रही तो उन्होंने कहा कि हमारे पास और कोई विकल्प ही नहीं है.

सरकार का कार्यक्रम या पार्टी का

मुख्यमंत्री जिन कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हैं, वे कार्यक्रम दरअसल उनकी पार्टी के कार्यक्रम होते हैं. चुनावी मौसम में यह बात और भी महत्वपूर्ण हो जाती है.

लिहाजा यह सवाल उठता है कि मुख्यमंत्री जिन जनसभाओं को संभोधित करते हैं उसका खर्च उनकी पार्टी या फिर उनके स्थानीय कार्यकर्ता उठाएं. लेकिन बड़ी चालाकी से इस सारे खर्च का बोझ सरकारी खजाने पर डाला जा रहा है.

इस संबंध में उत्तर प्रदेश पुलिस के एक अधिकारी नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं, 'जब तक चुनाव की अधिसूचना नहीं जारी होती है तब तक ये लोग सरकारी खर्च पर चुनावी प्रचार कर रहे हैं. यही इनकी रणनीति है. इसीलिए इन दिनों मुख्यमंत्री की सभाएं बढ़ गई हैं. इसके अलावा इसके पीछे एक भ्रष्टाचार का तंत्र भी काम कर रहा है. जहां भी मुख्यमंत्री के कार्यक्रम होते हैं, वहां तंबू, लाइट और साउंड का ठेका कुछ चुनिंदा लोगों को दिया जाता है और इसका बिल बढ़ा-चढ़ा कर दिखाया जाता है.'

तीन कार्यक्रमों में ढाई करोड़ का भुगतान

उत्तर प्रदेश में सीएम अखिलेश यादव के सार्वजानिक कार्यक्रमों का भुगतान पुलिस विभाग के माध्यम से कराया जा रहा है.

पिछले सप्ताह उत्तर प्रदेश में गृह विभाग के संयुक्त सचिव अमर दीप सिंह ने अपर पुलिस महानिदेशक, पुलिस मुख्यालय इलाहाबाद को लिखे गए एक पत्र में कहा है कि दो करोड़ पचहत्तर लाख पच्चीस हजार का भुगतान करने का आदेश दिया गया है.

यह बिल बस्ती, सिद्धार्थनगर और रामपुर जिलों में पिछले दो वर्षों के दौरान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के दौरे से संबंधित हैं. महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि खुद बैरिकेटिंग और लाईट साउंड लगाने वाले टेंट हाउस के लोगों को नहीं पता है उनका पैसा बकाया है.

रामपुर में नवम्बर 2014 में हुए सीएम के कार्यक्रम के लिए डेढ़ करोड़ की राशि जिस गांधी टेंट हाउस को दी जानी है, उसके मालिक दीपक जैन से जब पत्रिका ने पूछताछ की तो उसने ऐसे किसी भुगतान के बकाया होने की बात से ही इनकार कर दिया.

दिलचस्प यह भी ही कि गृह विभाग ने बिलों के भुगतान के पूर्व यह सुनिश्चित करने को कहा है कि देख लिया जाए कि यह भुगतान किसी अन्य विभाग के द्वारा तो नहीं कर दिया गया है.

पुलिस की जुबानी उनकी अपनी कहानी

कुछ समय पहले अधिवक्ता गौरव अग्रवाल ने सूचना के अधिकार के तहत पुलिस मुख्यालय और जिलों की पुलिस से गणतंत्र दिवस के समारोह के खर्च के बारे में जानकारी मांगी थी.

जवाब में मुख्यालय ने कहा कि आरटीआई के जवाब में सिर्फ वही सूचना दी जाती है, जो लोक प्राधिकरण के पास पहले से मौजूद हो, काल्पनिक प्रश्नों का जवाब नहीं दिया जाता है.

लेकिन जिला पुलिस की ओर से चौंका देने वाले जवाब मिले. अमेठी, आगरा, वाराणसी जिले की पुलिस ने कहा कि प्राइवेट फंड या अन्य मदों से गणतंत्र दिवस के कार्यक्रम में होने वाला खर्च किया जाता है. सरकार की ओर से इसके लिए कोई राशि उपलब्ध नहीं करायी जाती है.

अमरोहा पुलिस ने कहा कि गैर सरकारी संस्थाएं और देशभक्तों की ओर से इस दिवस के कार्यक्रम का खर्च उठाया जाता है क्योंकि सरकारी मद में खर्च की कोई व्यवस्था नहीं है. जबकि डॉ भीमराव आंबेडकर के नाम पर बने आंबेडकर नगर जिले की पुलिस ने कहा कि इस दिवस के कार्यक्रम का खर्च उच्चाधिकारियों के विवेक पर निर्भर है.

First published: 6 August 2016, 8:03 IST
 
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