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बिहार की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में महागठबंधन नहीं बनेगा, नीतीश-अजित साथ रहेंगे

अतुल चंद्रा | Updated on: 6 October 2016, 7:19 IST
QUICK PILL
  • समाजवादी पार्टी की तरफ से कोई रुचि नहीं दिखाए जाने और कांग्रेस के उदासीन रवैये के बाद यह साफ हो गया है कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी से मुकाबला करने के लिए बिहार की तरह कोई महागठबंधन नहीं बनने जा रहा है.
  • बसपा ने चुनाव पूर्व किसी तरह के गठबंधन  की संभावनाओं को पूरी तरह से खारिज कर दिया है. वहीं कांग्रेस राहुल गांधी की किसान यात्रा से उत्साहित होकर विधानसभा चुनाव अकेले लड़ने की घोषणा कर चुकी है. ऐसे में नीतीश कुमार और चौधरी अजित सिंह की पार्टी के बीच चुनाव पूर्व गठबंधन की संभावनाएं नजर आ रही हैं. 

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की उत्तर प्रदेश में 10 जनसभाओं की तरफ किसी का खास ध्यान नहीं गया लेकिन मंगलवार को राष्ट्रीय लोक दल के सुप्रीमो अजित सिंह के साथ की गई रैली के बाद स्थिति बदल गई है.

चौधरी अजित सिंह ने नीतीश कुमार के साथ बागपत में रैली की. नीतीश कुमार की बागपत में की गई रैली यह बताती है पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गठबंधन को लेकर अपना रुख बदल चुके हैं. 

रैली में कुमार ने जनता दल यूनाइटेड और राष्ट्रीय लोक दल के बीच होने वाले गठबंधन को लेकर कोई चर्चा नहीं की. अजित सिंह के बेटे जयंत चौधरी की तारीफ करते हुए कुमार ने कहा, 'उत्तर प्रदेश में एक नई कहानी लिखी जा सकती है क्योंकि हम सभी एक साथ हैं.'

जयंत चौधरी को संभावित गठबंधन की तरफ से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर पेश किया जा सकता है. नीतीश कुमार ने रैली में समाजवादी और बहुजन समाज पार्टी के साथ भारतीय जनता पार्टी को भी निशाने पर लिया. हालांकि इस दौरान उन्होंने कांग्रेस को लेकर कुछ भी बोलने से परहेज किया. 

समाजवादी पार्टी पर उनका हमला इस लिहाज से अहम है कि  बिहार में उनकी सहयोगी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल ने समाजवादी पार्टी कोे अपना समर्थन दे रखा है. उत्तर प्रदेश में गठबंधनों की दिशा कई दिशाओं में जा रही है.

हर दिन बदलता समीकरण

शुरुआत में जेडीयू और आरजेडी ने कहा था कि वह उत्तर प्रदेश में बीजेपी और सपा के खिलाफ एक साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे. लेकिन तुरंत बाद आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद ने अपना रुख बदलते हुए कहा कि पार्टी उत्तर प्रदेश चुनाव में कोई उम्मीदवार नहीं लड़ाएगी. 

लालू ने कहा कि उनकी पार्टी राज्य में धर्मनिरपेक्ष ताकतों के साथ खड़ी होगी. लालू यादव ने कहा था कि मुलायम सिंह यादव उनके समधी हैं और वह उनका विशेष ख्याल रखेंगे. लालू का झुकाव सपा की तरफ है. जबकि सपा ने बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान आखिरी समय में खुद को महागठबंधन से अलग कर लिया था. हालांकि नीतीश कुमार ने अपनी बागपत की रैली में समाजवादी पार्टी की सरकार को लेकर कोई नरमी नहीं दिखाई.

वाराणसी, मिर्जापुर और गाजीपुर की रैली में जबरदस्त प्रतिक्रिया मिलने के बाद नीतीश कुमार ने उत्तर प्रदेश में अकेले चुनाव लड़ने का फैसला लिया था. लेकिन उनकी बदली रणनीति बताती है कि उत्तर प्रदेश में बिहार की तरह महागठबंधन की रणनीति बनने की संभावना खत्म हो गई है.

नीतीश कुमार की बदली रणनीति के वाजिब आधार हैं. उत्तर प्रदेश में ओबीसी का 39 फीसदी वोट है जबकि 18 फीसदी मुस्लिम हैं. वहीं जाट मतदाताओं की आबादी 5 फीसदी है. वहीं अजित सिंह मुजफ्फरनगर दंगों के बाद जाटों में अपने कमजोर पड़ चुके समर्थन को फिर से पाने के लिए बेताब हो रहे हैं.

मायावती पहले ही उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पहले किसी तरह की गठबंधन को सिरे से खारिज कर चुकी हैं.

आरएलडी सुप्रीमो जेडीयू के साथ गठबंधन के संकेत दिए थे क्योंकि उत्तर प्रदेश की राजनीति के बड़े दलों ने उन्हें बीजेपी के खिलाफ मुकाबले बनने वाले मोर्चे में शामिल करने की जरूरत नहीं समझी. जबकि उन्होंने राम मनोहर लोहिया और चौधरी चरण सिंह की विचारधारा से ताल्लुक रखने वाले दलों के साथ आने की अपील की थी.

मायावती पहले ही उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पहले किसी तरह की गठबंधन को सिरे से खारिज कर चुकी हैं. समाजवादी पार्टी फिलहाल परिवार के झगड़े में उलझी हुई है. 

नीतीश कुमार की योजना ओबीसी वोट बैंक को अपने पाले में खींचने की है. ऐसे में समाजवादी पार्टी कभी भी वैसी पार्टी के साथ गठबंधन बनाना नहीं चाहेगी जो कमजोर ही सही लेकिन ओबीसी  वोट बैंक में सेंध लगाने की क्षमता रखता है.

समाजवादी पार्टी प्रेसिडेंट शिवपाल यादव ने हाल ही में बिहार जैसे महागठबंधन के समर्थन में बात की थी ताकि सांप्रदायिक ताकतों को खत्म किया जा सके लेकिन पार्टी ने अभी तक इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया है.

कांग्रेस ने भी अभी तक उत्तर प्रदेश में महागठबंधन की दिशा में कोई पहल नहीं की है. किसान रथ यात्रा से उत्साहित पार्टी के वाइस प्रेसिडेंट राहुल गांधी ने हाल ही में कार्यकर्ताओं से कहा कि बिहार की तरह उत्तर प्रदेश में कोई महागठबंधन नहीं बनेगा और पार्टी प्रदेश में अकेले चुनाव लड़ेगी.

इस साल मई की शुरुआत में अजित सिंह ने मुलायम सिंह जबकि जयंत चौधरी ने राहुल गांधी से मुलाकात की थी ताकि महागठबंधन की संभावनाओं को तलाशा जा सके. लेकिन सपा की गैर प्रतिबद्धता और बीएसपी एवं कांग्रेस की तरफ से महागठबंधन की संभावनाओं को खारिज किए जाने के बाद नीतीश कुमार और अजित सिंह की चुनाव पूर्व गठबंधना बना सकते हैं.

First published: 6 October 2016, 7:19 IST
 
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