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यूपी के चर्चित गेस्ट हाउस कांड पर आज सुप्रीम कोर्ट सुना सकता है फैसला

कैच ब्यूरो | Updated on: 15 September 2016, 11:34 IST
(एजेंसी)

उत्तर प्रदेश के लगभग 23 साल पुराने बहुचर्चित गेस्ट हाउस कांड में आज सुप्रीम कोर्ट फैसला सुना सकता है. जानकारों के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट का फैसला समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह यादव और उनके भाई शिवपाल यादव के लिए मुश्किलें पैदा कर सकता है.

वैसे भी मुलायम का समाजवादी परिवार इस समय भयंकर अंर्तकलह से जूझ रहा है, वहीं गेस्ट हाउस कांड पर फैसला मुलायम कुनबे के लिए बड़ी परेशानी का सबब बन सकता है.

गौरतलब है कि 23 साल पुराने बहुचर्चित गेस्ट हाउस कांड में बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने समाजवादी पार्टी के कुछ बाहुबली नेताओं पर जानलेवा हमला करने का केस दर्ज कराया था.

बसपा सुप्रीमो मायावती के साथ 2 जून 1995 की रात उन्मादी भीड़ ने आबरू लूटने और जान से मारने की कोशिश की थी. पिछले दिनों मायावती ने खुद इस घटना की याद दिलाई.

मायावती ने आजमगढ की रैली में साफ तौर पर ऐलान किया था कि मुख्यमंत्री को उन्हें बुआ कहने का हक नहीं है, क्योंकि वे 2 जून 1995 की उस घटना को नहीं भूली हैं, जब अखिलेश यादव के पिता मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री थे और उनके समर्थक उन पर अत्याचार करने पर उतारू थे.

उस दिन को लेकर तमाम बातें होती रहती हैं लेकिन, यह आज भी एक कौतुहल का ही विषय है कि 2 जून 1995 को लखनऊ के राज्य अतिथि गृह में हुआ क्या था?

दरअसल पूरा मामला ये है कि गेस्ट हाउस कांड से पहले साल 1993 में सपा-बसपा के बीच चुनावी समझौता हुआ था.

चुनाव में इस गठबंधन की जीत हुई और मुलायम सिंह यादव प्रदेश के मुखिया बने, लेकिन आपसी मनमुटाव के चलते 2 जून 1995 को बसपा ने सरकार से किनारा कर लिया और समर्थन वापसी की घोषणा कर दी.

मायावती ने जब सपा सरकार से समर्थन वापसी की घोषणा की थी, उस वक्त वो मीराबाई मार्ग स्थित गेस्ट हाउस में ठहरी हुई थीं. उनके समर्थन वापसी से मुलायम सिंह की सरकार अल्पमत में आ गई. सरकार को बचाने के लिए जोड़-घटाव किए जाने लगे.

इसी बीच सपा के कुछ नाराज बाहुबली नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मायावती पर लखनऊ के मीराबाई मार्ग स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में हमला कर दिया. मायावती गेस्ट हाउस के कमरा नंबर-1 में ठहरी हुई थीं.

खबरों के मुताबिक साल 1995 के गेस्टहाउस कांड में कथित तौर पर कुछ सपा नेताओं ने मायावती को कमरे में बंद करके मारा और उनके कपड़े फाड़ दिए तभी बीजेपी के तत्कालीन एमएलए ब्रम्हदत्त द्विवेदी ने उन्हें बचाया था, बाद में ब्रम्हदत्त द्विवेदी की भी हत्या हो गई थी.

First published: 15 September 2016, 11:34 IST
 
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