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आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए संविधान आरक्षण की अनुमति नहीं देता : जस्टिस चेलमेश्वर

कैच ब्यूरो | Updated on: 24 January 2019, 13:02 IST

सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जस्टिस जे चेलमेश्वर ने बुधवार को कहा कि संविधान केवल सांसदों को समाज के सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण देने में सक्षम बनाता है, न कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) के लिए. वह आईआईटी-बॉम्बे में एक छात्र द्वारा पूछे गए सवाल का जवाब दे रहे थे, जहां उन्होंने अंबेडकर पेरियार फुले स्टडी सर्कल द्वारा आयोजित 'संविधान के सात दशक' शीर्षक से पहला अम्बेडकर स्मारक व्याख्यान दिया.

उन्होंने कहा “संविधान का पाठ केवल संसद या विधान सभा को समाज के सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों को आरक्षण देने के लिए सक्षम बनता है न कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए.'' उन्होंने कहा ''वर्तमान प्रावधान अदालत में किस हद तक कायम रहेगा, मुझे नहीं पता और यह देखा जाना है. मैं केवल यह कह सकता हूं कि संविधान में इसका प्रावधान नहीं है,”

 

गौरतलब है कि संसद ने इस महीने की शुरुआत में 124 वें संविधान (124 वां संशोधन) विधेयक को पारित किया था, जिसमें सामान्य वर्ग में ईडब्ल्यूएस के लिए नौकरियों और शिक्षा में 10 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया गया था. बिल को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक याचिका दायर की गई है.

चेलमेश्वर से सेवानिवृत्ति के बाद सरकारी पदों पर न्यायाधीशों की नियुक्ति के बारे में भी पूछा गया, जिसके जवाब में उन्होंने कहा "यह मेरी व्यक्तिगत पसंद थी (सेवानिवृत्ति के बाद किसी भी सरकारी पद से इनकार करने के लिए). कठिनाई यह है कि बहुत सारे कानून सेवानिवृत्त न्यायाधीशों या न्यायाधीशों की आवश्यकता को पूरा करते हैं. फिर आप यह नहीं कह सकते कि कोई न्यायाधीश नियुक्त नहीं किया जा सकता है ”

अपने घंटे भर के भाषण के दौरान, चेलमेश्वर ने संविधान में लोकतंत्र के लिए सुरक्षा उपायों की बात की, जिसमें चुनावी प्रतिनिधियों की नियुक्ति भी शामिल थी, लेकिन कहा कि उल्लंघन हुए हैं. चेलमेश्वर ने न्यायिक सुधारों की आवश्यकता और किसी भी फैसले की अकादमिक चर्चा करने की भी बात की.

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First published: 24 January 2019, 13:02 IST
 
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