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वेटर का काम करते-करते बन गया IAS, सफलता की कहानी पढ़कर करेंगे सलाम

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 April 2019, 12:10 IST

कलेक्टर बनना ज्यादातर लोगों का सपना होता है, हर साल लाखों की तादात में युवा यूपीएससी की परीक्षा देते हैं, लेकिन बहुत से लोगों के हाथों में निराशा हाथ में आती है. कुछ ऐसी ही कहानी एक कैंटीन में वेटर का काम करने वाले के. जयागणेश की है. जिन्हें कई बार असफलता का चेहरा देखना पड़ा, लेकिन उनकी सच्ची लगन ने उनको उनका मुकाम हासिल कराने में मदद की.

जी, हां जयागणेश एक ऐसे यूपीएससी उम्मीदवार हैं, जिन्हें एक-दो बार नहीं, बल्कि छह बार यूपीएससी में निराशा हासिल हुई. लेकिन सातवीं बार उन्होंने 156वीं रैंक हासिल की. सबसे आश्चर्य की बात ये है कि अपने इस मुकाम हासिल करने के दौरान जयागणेश को एक वेटर का भी काम करना पड़ा था.

बता दें कि के. जयागणेश के पिता एक लेदर फैक्ट्री में सुपरवाइजर का काम करते थे. जहां उन्हें महज साढ़े चार हजार रुपए सैलेरी दी जाती थी, घर की आर्थिक स्थिति काफी खराब होने का बावजूद जयागणेश ने ये सफलता हासिल की. जयगणेश के चार भाई-बहन है, जिसमें जयागणेश सबसे बड़ा भाई है औऱ इसलिए उस अपने घर की सारी जिम्मेदारी भी थी.

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जयागणेश ने 12वीं में 91 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं, जिसके बाद उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है. जयागणेश को इंजीनियरिंग करने के बाद कहीं जॉब मिल गई थी, जहां उनकी सैलेरी 25 हजार रुपए मिलती थी. गांव के हालात देखकर अचानक उन्हें आईएएस बनने का ख्याल आया.

इसके बाद उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियर के जॉब से इस्तीफा दे दिया. इस्तीफा देने के बाद जयागणेश चेन्नई में आईएएस की तैयारी करने लगे. इस दौरान उन्हें एक सरकारी कोचिंग सेंटर के बारे में पता चला. इस कोचिंग सेंटर में आईएएस की तैयारी कराई जाती थी. लेकिन अपना और घर का खर्च चलाने के लिए उन्हें पैसों की जरूरत थी, जिसके लिए उन्हें सत्यम सिनेमा हॉल में बतौर बिलिंग ऑपरेटर का काम करना पड़ा, जहां उन्हें सिर्फ तीन हजार रुपए सैलेरी मिलती थी.

इस दौरान उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा दी. साल 2004 में वे आईएएस की मेन्स की परीक्षा में फेल हो गए, जिसके बाद उन्होंने सिनेमा हॉल की नौकरी छोड़ दी और वेटर की नौकरी करने लगे. इस नौकरी में उन्हें पढ़ने का टाइम मिला.

अपने पहले दो प्रयास में जयागणेश प्री एग्जाम भी क्लीयर नहीं हो पाए थे, जिसके बाद उन्होंने एक कोचिंग में समाजिक शास्त्र पढ़ाना शुरू किया. अपने छठवे परीक्षा में उन्होंने इंटेलिजेंस ब्यूरो की परीक्षा दी.
जयागणेश ने छठे प्रयास में प्री और मेन्स की परीक्षा तो पास कर ली, लेकिन इंटरव्यू क्लीयर नहीं कर पाए. इसके बाद सातवें प्रयास में उन्होंने ये सफलता हासिक की. जिसमें उन्हें 156 रैंक हासिल हुई.

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First published: 5 April 2019, 12:10 IST
 
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