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उरी हमलाः भारत के पास जवाबी कार्रवाई के विकल्प क्या हैं?

कैच ब्यूरो | Updated on: 20 September 2016, 7:48 IST

उरी में रविवार की अलसुबह हुआ आतंकी हमला देखा जाए तो संभवतः कश्मीर में भारतीय सेना को अब तक सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाला हमला है. एक ही हमले में इससे पहले कभी सेना के इतने जवान शहीद नहीं हुए थे.

फिलहाल भारतीय रक्षा तंत्र और देश भर में इस हमले को लेकर गहरा रोष व्याप्त है. रक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'उरी में भारतीय सेना पर हमला करके पाक ने ‘सारी हदें पार कर दी हैं.’

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री और भारतीय सेना के प्रवक्ता के बयान से दोनों देशों के बीच कटुता और तनाव का संकेत मिलता है. इससे पहले 2002 में कालूचक में सेना के शिविर पर बड़ा हमला हुआ था. तीन फिदायीन आतंकवादियों ने हिमाचल रोडवेज की एक बस पर हमला किया और उसके बाद सेना के एक शिविर पर. हमले में हताहत ज्यादातर लोग आम नागरिक और तीन सैनिक नहीं.

उस समय भी केंद्र में भाजपा की सरकार थी. अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे और जसवंत सिंह रक्षा मंत्री. यद्यपि धीरे-धीरेे तनाव कम हो गया था. सिंह ने अपनी किताब ‘ए कॉल टू ऑनर’ में लिखा है कि कालूचक की घटना ऐसी थी कि जैसे भारत-पाक के बीच खुला युद्ध छिड़ गया हो.

बढ़ता तनाव

एक ओर दोनों देशों की सीमाओं पर सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच इस पर वार्ता चल रही है लेकिन भारतीय रक्षा प्रतिष्ठान इस वक्त पाकिस्तान को समुचित जवाब देने पर गंभीरता से विचार कर रहा है.

प्रधानमंत्री ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, उरी हमले के जिम्मेदार लोगों को ‘सजा’ जरूर दी जाएगी. पीएमओ के अधिकारी जितेन्द्र सिंह ने कहा, ‘अगर जवाब नहीं दिया तो इसे कायरता समझा जाएगा.’ इससे पता चलता है कि सरकार जवाब देने को कितनी गंभीरता से ले रही है.

विकल्प

रक्षा मंत्रालय के एक सूत्र ने बताया, 'वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा फिलहाल दो विकल्पों पर विचार किया जा रहा है.

एक तो पाकिस्तानी रेंजर्स की संदिग्ध चौकियां चिन्हित करके उन पर हमला किया जाए. यह हमला दोनों ओर से होने वाली रोजमर्रा की छिटपुट गोलीबारी से बड़ा होगा.'

दूसरा, पाकिस्तान के कुछ इलाके चिन्हित कर, उनमें घुसकर आतंकी शिविरों पर प्रभावी हमला किया जाए. सूत्र बताते हैं, ‘इससे पाकिस्तान को भारी नुकसान हो सकता है लेकिन कहीं न कहीं हम यह भी जानते है कि वह पाकिस्तान है, म्यांमार नहीं. ऐसा करना खतरे से खाली नहीं होगा. कोई भी इश तरह की कार्रवाई एक खुले युद्ध की शुरुआत कर सकती है.’

भारत चाहे जो विकल्प चुने, एक बात तो साफ है कि यह सरकार सीमा पार से पाक प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ अब तक जारी रवैए में बदलाव करेगी. यूपी व दूसरे कई राज्यों मेें विधानसभा चुनावों के मद्देनजर भाजपा सरकार को इस बात का अंदाजा है कि इसकी प्रतिक्रिया बेहद कड़ी होनी जरूरी है.

पाकिस्तान की भूमिका

सैन्य अभियान के भारतीय महानिदेशक (डीजीएमओ) लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह ने एक बयान में कहा उरी में  प्रशासनिक बेस पर हमला करने वाले चार आतंकी पाकिस्तानी आतंकी गुट जैश-ए-मुहम्मद के थे. उनके पास ‘युद्ध जैसी सामग्री’ थी, जिस पर पाकिस्तानी मार्किंग थी. डीजीएमओ ने कहा, उन्होंने पाकिस्तान में अपने समकक्ष अधिकारी से बात कर घटना पर चिंता जताई है.

‘वे विदेशी आतंकवादी थे जो जैश-ए- मुहम्मद तंजीम से जुड़े थे. चूंकि आतंकियों के पास पाकिस्तानी मार्किंग वाली वस्तुएं थीं. इसलिए मैंने पाकिस्तानी डीजीएमओ से बात करके उन्हें अपनी चिंताओं से अवगत करवा दिया है.

प्रतिक्रियाएं

भारतीय शिविर पर इस भयावह हमले की सभी राजनीतिक दलों ने कड़ी आलोचना की और सैनिकों के प्रति शोक जताया. प्रधानमंत्री ने उरी हमले की कड़ी निंदा की है और वादा किया है कि इसकी ‘सजा’ दी जाएगी. प्रधानमंत्री के आवास पर सोमवार को हुई बैठक में लिए गए फैसले की जानकारी किसी को नहीं दी गई है लेकिन अटकलें है कि सरकार कुछ कड़े कदमों पर विचार कर रही है.

मोदी ने ट्विटर पर कहा, ‘हम उरी में कायरतापूर्ण हमले की कड़ी निंदा करते हैं. साथ ही राष्ट्र को आश्वस्त किया कि इस शर्मनाक कृत्य के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा.’

उन्होंने कहा, ‘हम उरी के शहीदों को नमन करते हैं. राष्ट्र के लिए उनकी सेवाएं सदा याद की जाएंगी. मेरी संवेदनाएं शोक संतप्त परिवार के साथ है.’

रक्षा मंत्री मनोहर पारिर्कर ने कहा, ‘उरी में सेना के शिविर पर हमले की निंदा करता हूं. सैनिकों के महान बलिदान के लिए उनकी शहादत को नमन! 17 बहादुर सैनिकों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा. उन्हें मेरा सलाम.’

गृह मामलों के राज्य मंत्री हंसराज अहीर ने कहा, ‘इस वक्त पाकिस्तान उखड़ा हुआ है, क्योंकि वे ईद पर ऐसे ही किसी हमले को अंजाम देना चाहते थे, जिसमें विफल रहे. हम पाक की ऐसी हरकतें और बर्दाश्त नहीं करेंगे. इसका समुचित जवाब देंगे.’

पीएमओ में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा, ‘भारत निंदा तो काफी कर चुका लेकिन ऐसे हमलों में जवाबी कार्रवाई न करना भी एक तरह का आतंकवाद ही है.'

सिंह ने एएनआई  से बात करते हुए कहा, यह कायरता है, बहादुरी नहीं, क्योंकि जवाब न देना भी कायरता है. आतंकवाद पर कड़ी प्रतिक्रया व्यक्त करते हुए भाजपा नेता राम माधव ने कहा, 'अब कोरी रणनीति के दिन लद गए हैं. उरी हमले के बाद पाक के प्रति हमारी नीति होनी चाहिए ‘एक दांत के बदले पूरा जबड़ा’.

उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री ने कहा है कि उरी के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा. अगर आतंकवाद कमजोर और कायरों का हथियार है तो बार-बार के आतंकी हमलों को सहना अकुशलता और मूर्खता का प्रतीक माना जाएगा. भारत को जवाब देना ही होगा.'

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्विटर पर कहा, वे उरी आतंकी हमले की कड़ी निंदा करते हैं. उन्होंने कहा, मेरी संवेदनाएं हमले में मारे गए शहीदों के परिजनों के साथ हैं.’

वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व गृह मंत्री पी. चिदम्बरम ने कहा उरी हमले को देखते हुए सीमा पर सेना की तैनाती करनी जरूरी हो गई है ताकि आतंकियों की घुसपैठ रोकी जा सके. एक बयान में चिदम्बरम ने कहा, सीमा पार से ऐसे आतंकी  हमलों को रोकने के लिए सीमाओं का मजबूत होना जरूरी हो गया है. सरकार को अपनी सीमाएं मजबूत करने के लिए सारे संसाधन, मैनपावर और सामग्री लगा देनी चाहिए ताकि आतंकियों की घुसपैठ रोकी जा सके.

First published: 20 September 2016, 7:48 IST
 
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