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ट्रंप अपने नेवी चीफ को भेज रहे हैं भारत, चीन के खिलाफ बन रही है ये रणनीति

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 May 2019, 13:10 IST

अमेरिकी नौसेना के प्रमुख एडमिरल जॉन रिचर्डसन अपने समकक्ष और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मिलने के लिए रविवार से शुरू होने वाली तीन दिवसीय भारत यात्रा शुरू करेंगे. अमेरिकी नेवी चीफ की इस यात्रा को इंडो-पैसिफिक में चीन के खिलाफ रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है. 12 से 14 मई की यात्रा रिचर्डसन की नौसेना के प्रमुख के रूप में भारत की दूसरी यात्रा होगी.

यह यात्रा दो भारतीय नौसैनिक जहाजों द्वारा विवादित दक्षिण चीन सागर में अमेरिका, फिलीपींस और जापान की से हाथ मिलाने के बाद की जा रही है. एक बयान में अमेरिकी नौसेना ने कहा कि यह यात्रा सूचनाओं को साझा करने और दोनों नौसेनाओं के बीच रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने के लिए की जा रही है.

इंडो-पैसिफिक एक विशाल महासागर है जिसमें अफ्रीका के पूर्वी तट से लेकर अमेरिका के पश्चिमी तट से शुरू होने वाले दक्षिण चीन सागर सहित कई देश शामिल हैं. चीन लगभग पूरे दक्षिण चीन सागर पर दावा करता है, जबकि ब्रुनेई, मलेशिया, फिलीपींस, वियतनाम और ताइवान भी दावेदार हैं. अमेरिका ने दक्षिण चीन सागर में नेविगेशन का स्वतंत् अभ्यास आयोजित किया, जिसने बीजिंग से कहा कि यह संप्रभुता का उल्लंघन है. भारतीय नौसेना नियमित रूप से इस क्षेत्र में अन्य देशों के अलावा सिंगापुर और वियतनाम में पोर्ट कॉल आयोजित करती है.

जबकि जापान और फिलीपींस दोनों अमेरिकी संधि सहयोगी हैं, भारत नहीं है. लेकिन भारत ने हाल के वर्षों में संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी का विस्तार किया है. विशेष रूप से, नई दिल्ली ने समुद्री आत्म-रक्षा बल के साथ नौसेना अभ्यास की पूर्व द्विपक्षीय मालाबार श्रृंखला को अब एक नियमित भागीदार बनाने के लिए त्रिपक्षीय करने का आश्वासन दिया.

जापान वियतनाम को बड़े, अधिक सैन्य रूप से शक्तिशाली चीन के खिलाफ एक रक्षा बनाने में मदद कर रहा है क्योंकि वियतनाम का कहना है कि बीजिंग की सेना दक्षिण चीन सागर के अपने कानूनी हिस्से से अधिक पर कब्जा कर रही है. जापान के रक्षा मंत्री ताकेशी इवेया और उनके वियतनामी समकक्ष न्गो जुआन लिच ने 3 मई को समुद्री सुरक्षा, टोक्यो स्थित एनएचके टेलीविजन पर "अग्रिम सहयोग" के लिए मुलाकात की.

अक्टूबर में मंत्रियों ने दक्षिण चीन सागर के आसपास के मुद्दों पर चर्चा करने के लिए टोक्यो में मुलाकात की. जापानी रक्षा मंत्रालय की वेबसाइट पर कहा गया है कि उन्होंने "रक्षा सहयोग और विनिमय" ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए, जो नियमित उप-स्तरीय स्तरीय वार्ता निर्धारित करता है.

First published: 11 May 2019, 13:05 IST
 
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