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टेलीकॉम कंपनियों की दलील, सस्ते मोबाइल के कारण होता है कॉल ड्राप

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 March 2016, 18:10 IST

सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई के दौरान टेलीकॉम कंपनियों की तरफ से यह दलील दी गई कि भारत में कॉल ड्राप होने की सबसे बड़ी वजह उपभोक्ताओं के द्वारा सस्ते मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया जाना है.

सुप्रीम कोर्ट में टेलीकॉम कंपनियों ने कहा कि भारत में छत्तीस फीसदी कॉल ड्रॉप के मामले सस्ते मोबाइल की वजह से होते हैं. टेलीकॉम कंपनियों ने अपनी दलील में कहा कि जो उपभोक्ता ब्लैक मार्केट से फोन से खरीदते हैं उन्हें कॉल ड्रॉप की ज्यादा समस्या होती है.

हमेशा मोबाइल टावर पास में नहीं होते इसकी वजह से उन्हें सिग्नल पूरे नहीं मिल पाते हैं. सुप्रीम कोर्ट में सेल्यूलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया की ओर से यह दलील वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दी.

पढ़ें:सुप्रीम कोर्ट ने कॉल ड्रॉप के मामले में टेलिकॉम कंपनियों को दिया झटका

सेल्यूलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने कॉल ड्रॉप को लेकर उभोक्ताओं को दिये जाने वाले हर्जाने के दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. टेलि‍कॉम कंपनि‍यों ने सुप्रीम कार्ट से कहा कि‍ कॉल ड्रॉप की समस्‍या पूरी तरह से ऑपरेटर्स की वजह से नहीं है.

कंपनि‍यों ने कोर्ट से यह भी कहा कि‍ कॉल ड्रॉप से नि‍पटना असंभव है. इतना ही नहीं कंपनि‍यों ने यह भी कहा कि‍ दुनि‍या में ऐसा कोई सि‍स्‍टम नहीं जहां जीरो कॉल ड्रॉप हो.

सिब्बल का कहना था कि वैश्विक मानदंडों के अनुसार दो फीसदी कॉल ड्राॅप की मंजूरी है और ट्राई ने भी इसे मान्यता दी है. वहीं ट्राई के फैसले के पक्ष में अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी को दूरसंचार कंपनियों की इस दलील पर जवाब देना है. सुप्रीम कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को हो सकती है. 

गौरतलब है कि ट्राई ने कॉल ड्रॉप की औसत स्वीकार्य दर 2.0 प्रतिशत निर्धारित की है, लेकिन देश में औसत दर इससे कहीं अधिक 4.73 प्रतिशत है। वहीं वैश्विक मानक 3.0 प्रतिशत है.

सर्वे के अनुसार, अधिकतर कॉल ड्रॉप नेटवर्क में व्यवधान और अन्य क्वॉलिटी संबंधित मुद्दों के कारण होता है. वहीं स्पेक्ट्रम का अभाव व उपयोगकर्ताओं की अधिक संख्या भी इस समस्या के लिए जिम्मेदार है.

First published: 11 March 2016, 18:10 IST
 
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