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अखिलेश बनाम शिवपाल : क्या सपा चुनावी रेस से पहले ही बिखर जाएगी?

अतुल चंद्रा | Updated on: 21 October 2016, 8:46 IST
QUICK PILL
  • उप्र के विधानसभा चुनावों में अब जब कुछ ही महीने रह गए हैं, तब सत्तारुढ़ समाजवादी पार्टी में संकट कम होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं. 
  • समाजवादी पार्टी यूपी के अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने कानपुर में यह कहकर इस आशंका को और बल दे दिया है कि कुछ लोग पार्टी को तोडऩे की कोशिश कर रहे हैं.
  • सीनियर कैबिनेट मंत्री और सूबे के अध्यक्ष शिवपाल सिंह ने बिना किसी का नाम लिए कहा है कि कुछ ‘ढोंगी समाजवादी’ पार्टी लाइन से हटकर इसे तोडऩे की कोशिश में हैं. क्या वह राम गोपाल यादव और अपने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के संदर्भ में ऐसा कह रहे थे?

    यह संकेत जनेश्वर मिश्र ट्रस्ट के कार्यालय के बाहर लगे बोर्ड की तरफ भी हो सकता है. इस बोर्ड पर लिखा है, 'जनेश्वर-लोहिया के लोग अखिलेश के साथ'. अब तो यह साफ़ है कि कोई भी पक्ष झुकने को तैयार नहीं. कम से कम अखिलेश यादव तो नहीं ही. उन्होंने अपना चुनावी अभियान 3 नवम्बर से ‘विकास से विजय’ नारे के साथ शुरू करने का फैसला किया है. 

    अखिलेश की लोकप्रियता

    यहां यह कदम भी मायने रखता है कि अखिलेश यादव उस समारोह से भी गायब रहेंगे, जब पार्टी अपना 25वां स्थापना दिवस मनाएगी. पार्टी के पुराने नेता इस आयोजन में शिरकत करेंगे लेकिन अखिलेश और उनके सभी निष्ठावान समर्थक भी दूरी बनाए रखेंगे.

    समाजवादी पार्टी की सैनिक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष रिटायर्ड कर्नल सत्यवीर सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में एक प्रस्ताव पारित किया गया. वह यह कि युवा नेताओं को झूठे आरोपों पर निकाले जाने के फरमान के विरोध में युवा पदाधिकारी 5 नवम्बर को जनेश्वर मिश्र पार्क में पार्टी के रजत जयन्ती समारोह में शामिल नहीं होंगे. बैठक में मौजूद नेताओं ने साफ कर दिया है कि उनकी निष्ठा और आस्था अखिलेश यादव के नेतृत्व में है.

    इस आयोजन में भाग लेने के बजाए ये कार्यकर्ता अखिलेश यादव के साथ उनके चुनावी अभियान में मौजूद रहेंगे. मुख्यमंत्री के एक निकटतम सहयोगी आनन्द भदोरिया कहते हैं कि जो लोग बाहर किए गए हैं, उनके लिए ‘बहिष्कार’ शब्द उपयुक्त नहीं कहा जा सकता. उन्होंने स्थितियों को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि हम आयोजन में नहीं जाएंगे क्योंकि हमें बुलाया ही नहीं किया गया है.

    बताते चलें कि मुलायम सिंह यादव की अपने बेटे और भाई के साथ हुई बैठक के एक दिन बाद ही अखिलेश ने चुनावी अभियान शुरू करने की घोषणा की है. इस बैठक से पहले दोनों ने अलग-अलग अखिलेश के साथ बैठक की थी. दावा किया गया था कि मेल-मिलाप और मेल-जोल हो गया है.

    इस बैठक से पहले पार्टी के उपाध्यक्ष किरणमोय नन्दा ने अखिलेश के कहा था कि टिकट किसे दिया जाए, इसे मुख्यमंत्री को ही तय करना चाहिए. पार्टी में बवाल का मुख्य कारण यही है. उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले ही सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह ने कहा था कि चुनाव बाद विधायक ही तय करेंगे कि सपा की ओर से सीएम प्रत्याशी कौन होगा? 

    नन्दा ने यह भी कहा कि यदि टिकट केवल शिवपाल के ही समर्थकों को दिए गए तो अखिलेश के लिए विधायक दल का नेता चुना जाना बहुत मुश्किल होगा. सब जानते हैं कि यह शिवपाल ही हो सकते हैं.

    शिवपाल का दुख

    मुलायम सिंह के छोटे भाई पिछले हफ्ते इटावा में थे. जब कुछ लोगों ने उनसे कहा कि सालों तक पार्टी के लिए अपना खून-पसीना बहाया है. इसके बदले में उन्हें कुछ भी नहीं मिला, जबकि वे काबिल भी हैं. इस पर शिवपाल ने कहा कि कुछ लोगों को उत्तराधिकार के नाते ईनाम मिल जाता है जबकि कुछ लोग काफी मेहनत करने के बाद भी वंचित रह जाते हैं. 

    जब मुलायम सिंह ने खुद मीडिया के सामने कहा था कि विधायक ही अपने नेता का चयन करेंगे तो पार्टी के महासचिव और राज्यसभा सांसद रामगोपाल यादव ने इसपर तीखी प्रतिक्रिया जताई थी. 

    रामगोपाल ने मुलायम सिंह को चिट्ठी लिखकर कहा कि अखिलेश को मुख्यमंत्री का उम्मीदवार नहीं बनाना गलती होगी. शहरी विकास मंत्री आजम खान भी अखिलेश के पक्ष में आ गए हैं. उन्होंने अखिलेश की तुलना मुलायम सिंह से करते हुए यहां तक कह डाला कि उनमें नेतृत्व के गुण नेताजी से ज्यादा हैं.

    कहना न होगा कि आजम खान की निकटतम दोस्ती अमर सिंह और शिवपाल के साथ थी, पर बाद में इस दोस्ती में खटास आ गई. इसके बाद ही किरणमोय नन्दा ने साफ़ कहा कि सीएम फेस अखिलेश यादव ही होंगे.

    First published: 21 October 2016, 8:46 IST
     
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