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दलितों के बीच फंसा उत्तर प्रदेश का चुनाव, कांग्रेस का 'भीमभोज' अभियान

महेंद्र प्रताप सिंह | Updated on: 20 August 2016, 22:44 IST

उत्‍तर प्रदेश में अपनी खोई पैैठ बढ़ाने के लिए कांग्रेस हर संभव प्रयास कर रही है. इसके लिए वो दलित वोट बैंक को फिर से जोड़ने की कोशिश में जुटी है. दलित वोटरों को रिझाने के लिए अंबेडकर की विचारधारा को ध्‍यान में रखते हुए दलित समाज को अपने से जोड़ने के लिए पार्टी अब कांग्रेस भीम ज्योति यात्रा के बाद जिला व ब्लाक स्तर पर ‘भीमभोज’ प्रोग्राम का आयोजन करेगी.

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती पर 20 अगस्त को कांग्रेस प्रदेश में भीम भोज का आयोजन कर रही है. इस आयोजन की कमान पार्टी के अनुसूचित विभाग को सौंपी गयी है.

कांग्रेस की नीतियों के प्रचार के साथ विपक्षी दलों द्वारा लिए गए दलित विरोधी फैसलों को प्रचारित किया जाएगा

इस भोज के जरिए कांग्रेस का लक्ष्‍य सूबे में सामाजिक समरसता की स्थापना करना है. भोज में सूबे के सभी जिलों में सवर्ण समाज के लोगाें को दलितों के साथ भोजन के लिए आमंत्रित किया गया है. भोज में युवाओं के अलावा महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर रहेगा.

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सूबे में 2017 में विधानसभा चुनाव होने हैं. कार्यक्रम के तहत हर जिले में किसी बड़े दलित नेता के घर भोजन तैयार कराया जाएगा और वहीं सवर्ण लोगों को आमंत्रित किया जाएगा. यहां वह दलितों के साथ भोजन कर सूबे में सामाजिक समरसता को बढ़ाएंगे.

प्रदेश उपाध्यक्ष व अनुसूचित विभाग चेयरमैन भगवती प्रसाद के मुताबिक सभी इकाइयों से शनिवार को भोज आयोजित करने को कहा गया है. कांग्रेस की नीतियों के प्रचार के साथ विपक्षी दलों द्वारा लिए गए दलित विरोधी फैसलों को प्रचारित किया जाएगा. 

आयोजन काेे सफल करनेे के लिए विशेष संदेश दिए गए हैं. गुजरात में दलितों के उत्‍पीड़न को ध्‍यान में रखते हुए पार्टी ऐसा आयोजन कर चुनावी फायदा उठाने की कोशिश में है.

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लखनऊ के तेलीबाग इलाके में आयोजित होने वाले भीमभोज में कांग्रेस के राज्यसभा संजय सिंह भी शामिल होंगे. अनुसूचित जाति विभाग की संयोजक सिद्धि श्री के मुताबिक तेलीबाग बाजार के निकट अपरान्ह एक बजे आयोजित भीम भोज आयोजन होगा.

पहले निकल चुकी है भीम ज्योति यात्रा

गौरतलब है कि सूबे में अपने खोए राजनैतिक वर्चस्‍व को दोबारा हासिल करने के लिए कांग्रेस ने कुछ महीने पहले दलितों को पार्टी से जोड़ने के लिए भीम ज्योति यात्रा भी निकाली थी. 

यात्रा का मकसद था दलितों को गुमराह कर रही राजनीतिक पार्टियों से सावधान करना था. बाद में लखनऊ में एक एससी-एसटी सम्‍मेलन का आयोजन भी किया गया था. यात्रा कानपुर होते हुए बुंदेलखण्ड क्षेत्र में समाप्त हुई.

खोई हुई पहचान वापिस लाने शुरू किए कई अभियान

विगत लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद कांग्रेस का आंतरिक ढांचा पूरी तरह चरमरा गया है. इसमें सुधार लाने की पहल कहा से हो इसे लेकर कांग्रेस का हाई कमान खुद काफी चिन्तित नजर आ रहा है. आजादी के बाद से अब तक जिन वोटों पर कांग्रेस अपना आधिपत्य समझती थी. वह उसकी झोली से निकलकर दूसरों के पास जा चुका है.

मोदी सरकार बनने के बाद भूमि अधिग्रहण मुद्दे के अलावा कांग्रेस की तरफ से कोई ऐसा आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर नहीं किया जा सका जिससे जनता में यह विश्वास पनपे कि कांग्रेस विपक्ष में भी रहकर अपनी भूमिका का निर्वाह कर रही है. 

इसके चलते कांग्रेस ने खास कर उत्तर प्रदेश के लिए दलित पंचायतों के माध्यम से दलितों को पार्टी से जोड़ने का अभियान शुरू किया गया था और इसके संचालन की जिम्मेदारी अनसूचित जनजाति प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डाॅ. पीएल पुनिया के कंधों पर डाली गई थी.

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बात बहुत पुरानी नहीं है. चौदहवीं लोकसभा के चुनाव से राहुल गांधी ने दलितों के घर रात बिताने और खाना खाने का एक अभियान शुरू किया था. 

कांग्रेस आलाकमान ने उत्तर प्रदेश में ठंडे कमरे में रहने के अभ्यस्त हो चुके कांग्रेसी नेताओं को आदेश दिया था कि वे भी दलितों के घरों तक अपनी पहुंच बनाने की कोशिशें शुरू करें. लेकिन राहुल गांधी के दलितों के घर गुजारी रात मीडिया की सुर्खियों से अधिक कुछ नहीं बटोर पाई.

जब दलित के घर गुजारी रात

जून, 2008 को कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी अमेठी दौरे पर थे. अचानक एक दलित परिवार के घर के बाहर उनका काफिला रुका. उन्होंने नीचे उतरकर दलित के घर रात बिताई और घर की बनी रोटियों से अपना पेट भरा था. 

अपनी छोटी सी झोपड़ी में राहुल को देख दलित की आंखों में आंसू आ गए. उसने कभी नहीं सोचा था कि उसके घर में इतना बड़ा नेता रात गुजारने वाला है.

राहुल ने दलित से आग्रह किया कि वह आज रात उनके घर में भोजन करेंगे और वहीं ठहरेंगे. यह सुनकर दलित की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. फिर क्या घर के बाहर ही राहुल की खाट बिछाई गई. राहुल ने चौपाल लगाकर लोगों की समस्याओं को सुना था. 2008 में राहुल गांधी सु‍नीता कोरी के घर आकर रुके थे.

First published: 20 August 2016, 22:44 IST
 
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