Home » इंडिया » Catch Hindi: uttarakhand: 10 dos and don'ts for Harish Rawat
 

प्रिय हरीश रावत, दोबारा सीएम बनने पर याद रखें ये 10 बातें

राजू गुसाईं | Updated on: 10 February 2017, 1:49 IST

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि उत्तराखंड में हरीश रावत सरकार के पास बहुमत है. केंद्र ने कहा है कि बुधवार शाम तक राज्य में लगा राष्ट्रपति शासन हटा लिया जाएगा.

राज्य विधानसभा में मंगलवार को बहुमत परीक्षण हुआ था. विधान सभा अध्यक्ष ने मत विभाजन का नतीजा सुप्रीम कोर्ट को सौंप दिया था. जिसकी घोषणा बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को करना था. लेकिन अदालत के फ़ैसले से पहले एटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने माना कि हरीश रावत के पास बहुमत है.

हरीश रावत को फिर से सत्ता की बागडोर संभालने के बाद 10 चीजों से बचना होगा.


1) खराब राजनीतिक सलाहकारों को अपने से दूर रखें


हरीश रावत जो राजनीतिक संकट झेल रहे हैं उसमें उनके राजनीतिक सलाहकारों की बड़ी भूमिका रही है. उनके राजनीतिक सलाहकार रंजीत रावत की वजह से हरक सिंह रावत, अमृता रावत जैसे दूसरे नेता भड़के. रावत के एक सलाहकार उन्हें देहरादून एयरपोर्ट लेकर गए थे जहां उनका कथित स्टिंग ऑपरेशन हुआ.


2) आबकारी नीति में बदलाव न करें


हरीश रावत सरकार की एक शराब कारोबारी का पक्ष लेने के लिए काफी आलोचना हुई थी. राज्य में प्रचलित शराब ब्रांडों पर अघोषित पाबंदी लग गई थी. उनकी जगह चालू ब्रांड की शराबें बेची जाती थीं.

पढ़ेंः उत्तराखंड के शक्ति परीक्षण में कांग्रेस ने किया बहुमत हासिल करने का दावा

उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगने के बाद राज्यपाल केके पॉल ने एक जन शिकायत के बाद नई आबकारी नीति को रद्द किया ताकि प्रचलित ब्रांडों की शराब मिल सके.

हरीश रावत को किसी खास शराब कारोबारी को प्रश्रय देने से बचना चाहिए

'डेनिस व्हिस्की'  नाम की एक शराब के मालिक रावत परिवार के एक सदस्य हैं. ऐसे में पुरानी आबकारी नीति लागू करने से उनके नजदीकी लोगों को नुकसान होगा.

3) अवैध बालू खनन के खिलाफ कार्रवाई करें


बीजेपी अवैध बालू खनन से जुड़े लोगों की सत्ता के गलियारों तक पहुंच का मुद्दा उठाती रही है.

राष्ट्रपति शासन में स्थिति सुधरी थी क्योंकि राज्यपाल केके पॉल अवैध खनन को लेकर काफी सख्त थे. राष्ट्रपति शासन में खनन माफिया को संरक्षण मिलना बंद हो गया था.


4) अपने मुंहलगों को बढ़ावा न दें


हरीश रावत ने अपने पसंदीदा आईएएस राकेश शर्मा के लिए एक नया पद बना दिया था. केंद्र ने रिटायमेंट के बाद शर्मा को सेवा विस्तार देने से मना कर दिया था. उसके बाद रावत ने उनके लिए सीएम का चीफ प्रिंसिपल सेक्रेटरी का पद सृजित किया था.

पढ़ेंः उत्तराखंड सियासी संकट के 5 प्रमुख मोहरे

राष्ट्रपति शासन के बाद शर्मा को इस्तीफा देना पड़ा. जिसके बाद राज्य के प्रधान सचिव शत्रुघ्न सिंह अपना नियमित कामकाज करने लगे. अगर रावत दोबारा शर्मा को वापस लाते हैं तो इससे ब्यूरोक्रेसी में नाराजगी उभरेगी.

5) पार्टी के सदस्यों को भरोसे में लें


नौ कांग्रेस विधायकों की बगावत से जाहिर है कि पार्टी के नेता रावत से नाराज थे. राज्य में अगले चुनाव होने वाले हैं ऐसे में उन्हें अपनी पार्टी के नेताओं को एकजुट रखना होगा.

माना जाता है कि कांग्रेस के जिन विधायकों ने बगावत की उन्हें पहले इशारा किया गया था कि वो या तो अपने लिए नई सीट चुन लें या फिर चुनाव न लडें.


6) पारदर्शिता बरकरार रखें


हरीश रावत को सीएम के तौर पर उपदेश देने से ज्यादा जमीनी काम पर ध्यान देना होगा. अपने दो साल के कार्यकाल में वो प्रशासन में पारदर्शिता लान में विफल रहे.

हरीश रावत को पार्टी को अंदरूनी मतभेदों से बचाने के लिए परिवारवाद से बचना होगा

उन्हें दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी होगी.  रावत ने अभी तक अपने निजी सचिव मोहम्मद शाहिद के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है. एक स्टिंग में शाहिद शराब के लाइसेंस के लिए पैसा मांगते नजर आए थे.

आपदा राहत कोष के दुरुपयोग का आरोपों पर भी रावत ने कुछ नहीं किया. जाहिर है जनता केवल जबानी जमाखर्च से लंबे समय तक संतुष्ट नहीं होने वाली.


7) परिवारवाद की राजनीति पर लगाम


हरीश रावत पर परिवारवाद को बढ़ावा देने के आरोप लगते रहे हैं. उनकी पत्नी रेणुका पिछले लोक सभा चुनाव में हरिद्वार से प्रत्याशी थीं.

पढ़ेंः उत्तराखंड में बहुमत परीक्षण से पहले रेखा आर्य ने बदला पाला

आगामी विधान सभा चुनाव में उनके तीन बेटे-बेटी(अनुपमा, आनंद और विरेंद्र) को संभावित प्रत्याशी माना जा रहा है. परिवारवाद की राजनीति पर लगाम लगा कर रावत पार्टी में होने वाले संभावित मतभेदों को रोक सकते हैं.

8) अंधविश्वासों से बचना होगा


हरीश रावत को समझना होगा कि अंधविश्वासों के पालन से उनकी प्रदर्शन नहीं सुधरने वाला. वो सीएम के आधिकारिक आवास में रहने नहीं गए फिर भी उनकी कुर्सी चली गई.

एक नई शुरुआत के लिए उन्हें सीएम के आधिकारिक आवास से ही शुरुआत करनी चाहिए.


9) बुनियादी नियमों का पालन करें


  • नए रोजगार का सृजन.
  • पहाड़ से पलायन पर रोक.
  • सरकार को खली के मुकाबले जैसे मनोरंजन कार्यक्रमों के आयोजन से बचना चाहिए.


10) प्रतिद्वंद्वी को कम करके न आंके


हरीश रावत को अपने दुश्मनों को दोस्त बनाने की कला सीखने होगी.

First published: 11 May 2016, 12:44 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी