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उत्तराखंडः भाजपा में अंतर्कलह कांग्रेस के लिए राहत की खबर!

आकाश बिष्ट | Updated on: 11 February 2017, 5:47 IST

उत्तराखंड में भाजपा की प्रदेश इकाई में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा. कई वरिष्ठ नेता इस बात पर रूठ गए हैं कि पार्टी में एक राय कायम नहीं हो पा रही कि आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी के प्रचार की कमान कौन संभालेगा.

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पार्टी के कद्दावर नेता जैसे भगत सिंह कोश्यारी, बीसी खण्डूरी और रमेश पोखरियाल निशंक केंद्रीय नेतृत्व के इस निर्णय से नाराज हैं कि कांग्रेस से आए सतपाल महाराज और विजय बहुगुणा को अधिक महत्व दिया गया.

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हाल ही में भीमताल में संपन्न हुई कोर कमेटी की बैठक में इन नेताओं के असंतोष को साफ देखा जा सकता था. यहां तक कि कोश्यारी ने तो बैठक में भाग ही नहीं लिया. खंडूरी बीच में ही बैठक छोड़ कर चले गए. इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि पार्टी में किस हद तक आपस में दरारें पड़ चुकी हैं. कोर समूह की लगातार तीसरी बैठक में कोश्यारी नहीं आए.

दूसरे नेताओं को प्राथमिकता देना ठीक नहीं

सूत्रों का कहना है कि पार्टी हाई कमान को प्रदेश इकाई में बढ़ते विघटन की जानकारी दे दी गई है और वरिष्ठ नेता व प्रदेश प्रभारी जेपी नड्डा व धर्मेन्द्र प्रधान शाीघ्र ही कोश्यारी व खंडूरी के साथ एक बैठक करने वाले हैं.

बहुगुणा के भी इन दोनों नेताओं से मिलने की संभावना है. पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों को हाल ही में घटे घटनाक्रम पर आपत्ति है और उनका कहना है कि वरिष्ठ नेताओं की बजाय कांग्रेस से बागी होकर पार्टी में आए सतपाल महाराज और दूसरे नेताओं को प्राथमिकता देना ठीक नहीं है.

भाजपा प्रदेश प्रमुख और विधानसभा में विपक्ष के नेता अजय भट्ट ने हाल ही में कहा था कि विधानसभा चुनावों में नेतृत्व के लिए पार्टी के पास कोई चेहरा नहीं है.

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उत्तराखंड भाजपा के एक नेता ने कहा, ‘ये भाजपा के पुराने रणनीतिकार रहे हैं, जिन्होंने पार्टी को सत्ता तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. ऐसे में अगर इनकी उपेक्षा की जाएगी तो इसका असर तो पड़ेगा ही.’ उन्होंने यह भी कहा कि इसका कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिया गया वह निर्देश भी हो सकता है कि 75 साल या उससे अधिक उम्र के लोगों को पार्टी में कोई प्रमुख स्थान न दिया जाए. शायद इसी वजह से इन वरिष्ठों को दरकिनार कर दिया गया.

खंडूरी इस साल 82 वर्ष के हो जाएंगे जबकि कोश्यारी 74 साल के हैं, दोनों ही प्रधानमंत्री द्वारा तय आयु के मापदंड के दायरे में नहीं आते. वहीं निशंक पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं इसलिए उन्हें कोई महत्वपूर्ण भूमिका मिलने की संभावना न के बराबर है.

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भाजपा निशंक को कोई भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपने से इसलिए बचना चाहती है कि कहीं कांग्रेस को बैठे बिठाए मुद्दा न मिल जाएगा. कांग्रेस उनके मुख्यमंत्रित्व काल में राज्य में हुए भ्रष्टााचार के मुद्दे को उछाल सकती है.

कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष जॉट सिंह बिष्ट ने कहा, 'अगर उन्हें लगता है कि हम उन्हें बहुगुणा, हरक सिंह रावत और भाजपा में हाल ही शामिल हुए बागियों पर नहीं घेरेंगे तो वे सोच रहे हैं. भाजपा संभवतः यह भूल गई है कि उसी ने बहुगुणा और हरक सिंह रावत पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए थे. अब क्या वे केवल इसीलिए ईमानदार कहे जा रहे हैं कि वे भाजपा में शामिल हो गए. हम इन दोनों को भी निशाना बनाएंगे.'

भाजपा की अंदरूनी कलह से कांग्रेस को राहत

भाजपा में चल रही अंदरूनी कलह ने कांग्रेस को कुछ राहत दी है जो स्वयं अंतर्कलह से जूझ रही है. प्रदेश कांग्रेस के कई बड़े नेता मुख्यमंत्री हरीश रावत के काम करने के तरीके से नाखुश हैं. इससे पहले कांग्रेस के बागी धड़े ने हरीश रावत के खिलाफ कुछ गंभीर आरोप लगाए थे और उन्हें हटाने की मांग की थी लेकिन जब कांग्रेस हाई कमान ने उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया तो वे बगावत पर उतर आए.

नतीजा यह हुआ कि कांग्रेस सरकार विधानसभा में बहुमत कायम नहीं रख पाई और राज्य में उपजे राजनीतिक संकट के चलते राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ा. हालांकि बाद में नैनीताल हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति शासन को गलत ठहरा दिया और राज्य में कांग्रेस सरकार बहाल कर दी गई. परन्तु पार्टी के मतभेद अब तक नहीं सुलझे हैं.

राजनीतिक उथल-पुथल के महीनों बीत जाने के बावजूद कांग्रेस के भीतर अब भी सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. रावत और प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष किशोर उपाध्यय के बीच मतभेद जगजाहिर हैं. पार्टी आलाकमान को इनके बीच बीच-बचाव करना पड़ा था.

उपाध्याय लगातार मुख्यमंत्री से यह मांग करते रहे हैं कि वे गठबंधन सहयोगी प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक फ्रंट (पीडीएपफ) के बजाय कांग्रेस विधायकों को मंत्रिमंडल में स्थान दे. हालांकि रावत ने उनके सुझावों का विरोध ही किया है.

इस बीच, भाजपा की अंदरूनी कलह से कांग्रेस को पलटवार करने का मौका मिल गया है, क्योंकि भाजपा में भी दो वरिष्ठतम नेता बगावत के कगार पर हैं.

खंडूरी और कोश्यारी की ओर इशारा करते हुए बिष्ट ने कहा कि इन दोनों नेताओं द्वारा बनाई गई नींव पर आज भाजपा खड़ी है; ‘अगर नींव ही हटा दी जाएगी तो इमारत तो गिरेगी ही. भाजपा खुद ही अपना सर्वनाश करने पर तुली है और हम यह सब देख कर बहुत खुश हैं.’

First published: 8 September 2016, 7:50 IST
 
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