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उत्तराखंड में चार धाम यात्रा पर संकट, भारी बारिश का अनुमान

कैच ब्यूरो | Updated on: 30 May 2016, 12:05 IST
(फाइल फोटो)

उत्तरखंड में चार धाम यात्रा पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं. शनिवार को तीन जगहों पर बादल फटने से हजारों श्रद्धालु फंस गए हैं. बारिश से चार धाम की यात्रा पर बुरा असर पड़ सकता है.

राज्य में अगले 36 घंटे के दौरान भारी बारिश होने का अनुमान लगाया गया है. नैनीताल, अल्मोड़ा और देहरादून में भारी बारिश की संभावना जताई गई है. साथ ही मौसम विभाग ने बद्रीनाथ और केदारनाथ में भी भारी बारिश का अनुमान जताया है.

केदारनाथ में चार धाम की यात्रा पर गए श्रद्धालुओं को सुरक्षित इलाके में रोका गया है. श्रद्धालुओं से दोपहर बाद यात्रा शुरू करने को कहा गया है. उत्तराखंड के टिहरी और उत्तरकाशी जिलों में बादल फटने से छह लोगों की मौत हो गई थी.

पढ़ें: टिहरी में बादल फटा, केदारनाथ मंदिर का रास्ता बंद

हजारों श्रद्धालु फंसे

भारी बारिश की वजह से टिहरी जिले के घनसाली क्षेत्र में शनिवार को सिलसिलेवार बादल फटे. वहीं बलगाना घाटी में आधा दर्जन से ज्यादा गांवों में सैकड़ों घर क्षतिग्रस्त हो गए. जिससे चार धाम यात्रा बाधित हो गई है.  केदारनाथ जा रहे सैकड़ों यात्री लांबगांव, कोटलगांव और चमियाला में फंस गए. तेज बारिश से कई जगह सड़कें बह गईं.

इससे पहले 16 जून 2013 को भारी बारिश के बाद राज्य के इतिहास की सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदा आई थी. इस दौरान केदारनाथ धाम में सबसे ज्यादा तबाही मची थी. मंदाकिनी के बहाव ने केदारनाथ से आगे बढ़ते हुए रामबाड़ा, गौरीकुंड, सोनप्रयाग, चंद्रापुरी, अगस्त्यमुनि और श्रीनगर जैसे इलाकों में भी जमकर तबाही मचाई थी.

16 जून 2013 को सबसे बड़ी आपदा

केदारनाथ में आई बाढ़ से पहले ही उत्तराखंड में कई जगह बड़े-बड़े भूस्खलन हुए. रास्ते कटने और पुल टूटने के बाद दो-तीन दिन तक अलग-अलग जगह पूरे राज्य में तांडव होता रहा.

इसी दौरान केदारनाथ में मंदाकिनी नदी के ऊपर बने दो पुल बह गए थे. केदारनाथ का ज़मीनी संपर्क कट चुका था. यही नहीं शंकराचार्य की 8वीं शताब्दी में बनी समाधि भी खत्म हो गई. 16 जून को आई इस तबाही के बाद केदारनाथ मंदिर परिसर मिनटों में पानी से लबालब भर गया था और सैकड़ों लोगों को जलसमाधि लेनी पड़ी.

First published: 30 May 2016, 12:05 IST
 
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