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उत्तराखंड: नौ बागी विधायकों को बड़ा झटका, बहुमत परीक्षण में नहीं डाल पाएंगे वोट

कैच ब्यूरो | Updated on: 9 May 2016, 11:16 IST

उत्तराखंड में 10 मई को होने वाले बहुमत परीक्षण से ठीक पहले बागी कांग्रेस विधायकों को झटका लगा है. नैनीताल हाईकोर्ट ने स्पीकर के सदस्यता रद्द करने वाले फैसले को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है.

पिछली सुनवाई के दौरान शनिवार को नौ बागी विधायकों की याचिका पर नैनीताल हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था. बागी विधायकों ने स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल के अयोग्य ठहराए जाने के फैसले को असंवैधानिक बताते हुए अदालत में चुनौती दी थी.

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जिन बागी विधायकों को बहुमत परीक्षण के दौरान वोट डालने का मौका नहीं मिलेगा, वो हैं- विजय बहुगुणा, हरक सिंह रावत, अमृता रावत, प्रदीप बतरा, प्रणव सिंह चैंपियन, शैलारानी रावत, शैलेंद्र मोहन सिंघल, सुबोध उनियाल और उमेश शर्मा.

इस बीच हाईकोर्ट के फैसले के बाद देहरादून में हरीश रावत के आवास के बाहर समर्थकों ने खुशी का इजहार किया.


10 मई को बहुमत परीक्षण


सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही 10 मई को होने वाले फलोर टेस्ट में बागी विधायकों को वोटिंग से दूर रहने का आदेश दिया था. राज्य में इस दिन दो घंटे (11 से 1 बजे तक) के लिए राष्ट्रपति शासन नहीं रहेगा.

शक्ति परीक्षण के दौरान होने वाली वोटिंग की वीडियोग्राफी भी की जाएगी. इसका नतीजा सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया जाएगा.

पढ़ें:उत्तराखंड में 10 मई को बहुमत परीक्षण, नौ बागी नहीं दे सकेंगे वोट

नैनीताल हाईकोर्ट ने 22 अप्रैल को उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन हटाने का फैसला दिया था. जिसके खिलाफ केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की. जिसके बाद हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी.

इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने रामेश्वर जजमेंट का हवाला देते हुए केंद्र को बहुमत परीक्षण कराने की सलाह दी थी. जिसे केंद्र सरकार ने मान लिया था. राज्य में 27 मार्च से राष्ट्रपति शासन लागू है. 

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विधानसभा स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल के वकील अमित सिब्बल के मुताबिक हाईकोर्ट ने ये कहते हुए बागी कांग्रेस विधायकों की याचिका खारिज कर दी कि स्पीकर के फैसले में दखल देने की कोई जरूरत नहीं है.

दूसरे स्टिंग से सियासी हड़कंप


वहीं अपदस्थ मुख्यमंत्री हरीश रावत को सीबीआई ने स्टिंग सीडी मामले की जांच के सिलसिले में आज पेश होने का समन जारी किया है. स्टिंग में कथित तौर पर उन्हें एक पत्रकार से बागी विधायकों का समर्थन हासिल करने के लिए डील करते हुए दिखाया गया था.

इस बीच एक दूसरा स्टिंग भी रविवार को सामने आया. एक निजी न्यूज़ चैनल द्वारा प्रसारित इस स्टिंग में कांग्रेस विधायक मदन सिंह बिष्ट ने कथित रूप से दावा किया था कि हरीश रावत ने कांग्रेस के 12 विधायकों को 25-25 लाख रुपये घूस दी है. 

वहीं इस दूसरे स्टिंग में मदन बिष्ट ने कथित तौर पर आरोप लगाया है कि खनन के जरिए हरीश रावत ने 27 करोड़ रुपये की काली कमाई की है.

स्टिंग में बागी विधायक हरक सिंह रावत और मदन बिष्ट के बीच बातचीत होते दिखाया गया है. हालांकि बिष्ट ने इस मामले में पुलिस से शिकायत करते हुए बागी खेमे पर धमकाने का आरोप लगाया है. 

पढ़ें: उत्तराखंड: कोर्ट ने केंद्र सरकार को दिया करारा झटका

18 मार्च को विधानसभा में विनियोग विधेयक पर मत विभाजन की बीजेपी की मांग का कांग्रेस के नौ विधायकों ने समर्थन किया था, जिसके बाद प्रदेश में सियासी संकट पैदा हो गया.

27 मार्च को राष्ट्रपति शासन लगाने के साथ हरीश रावत सरकार को बर्खास्त कर दिया गया. हालांकि विधानसभा को निलंबित रखा गया था.

First published: 9 May 2016, 11:16 IST
 
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