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उत्तराखंड: बागी विधायकों पर नौ मई को हाईकोर्ट सुनाएगा फैसला

कैच ब्यूरो | Updated on: 7 May 2016, 16:56 IST

उत्तराखंड में कांग्रेस के नौ बागी विधायकों की याचिका पर नैनीताल हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. हाईकोर्ट नौ मई को सुबह दस बजे बागियों की सदस्यता को लेकर अपना फैसला सुनाएगा.

इससे पहले शनिवार को नैनीताल हाईकोर्ट ने इस मामले में सुनवाई पूरी कर ली. बागी विधायकों ने स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल के अयोग्य ठहराए जाने के फैसले को अदालत में चुनौती दी है. 

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बाग़ी विधायकों की ओर से वरिष्ठ वकील सीए सुंदरम और दिनेश द्विवेदी ने हाईकोर्ट में पैरवी की, जबकि स्पीकर और शिकायतकर्ता की ओर से कपिल सिब्बल, उनके बेटे अमित सिब्बल जैसे वकील दलील देने में जुटे थे.

जिन बागी विधायकों के भविष्य का फैसला होना है, वो हैं- विजय बहुगुणा, हरक सिंह रावत, अमृता रावत, प्रदीप बतरा, प्रणव सिंह चैंपियन, शैलारानी रावत, शैलेंद्र मोहन सिंघल, सुबोध उनियाल और उमेश शर्मा.

10 मई को बहुमत परीक्षण


सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड में 10 मई को होने वाले फलोर टेस्ट में बागी विधायकों को वोटिंग से दूर रहने का आदेश दिया है. राज्य में इस दिन दो घंटे (11 से 1 बजे तक) के लिए राष्ट्रपति शासन नहीं रहेगा.

शक्ति परीक्षण के दौरान होने वाली वोटिंग की वीडियोग्राफी भी की जाएगी. इसका नतीजा सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया जाएगा.

पढ़ें:उत्तराखंड में 10 मई को बहुमत परीक्षण, नौ बागी नहीं दे सकेंगे वोट

नैनीताल हाईकोर्ट ने 22 अप्रैल को उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन हटाने का फैसला दिया था. जिसके खिलाफ केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की. जिसके बाद हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी.

इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने रामेश्वर जजमेंट का हवाला देते हुए केंद्र को बहुमत परीक्षण कराने की सलाह दी थी. जिसे केंद्र सरकार ने मान लिया था. राज्य में 27 मार्च से राष्ट्रपति शासन लागू है.

18 मार्च से सियासी संकट


18 मार्च को विधानसभा में विनियोग विधेयक पर मत विभाजन की बीजेपी की मांग का कांग्रेस के नौ विधायकों ने समर्थन किया था, जिसके बाद प्रदेश में सियासी संकट पैदा हो गया.

27 मार्च को राष्ट्रपति शासन लगाने के साथ हरीश रावत सरकार को बर्खास्त कर दिया गया. हालांकि विधानसभा को निलंबित रखा गया था.

वहीं अपदस्थ मुख्यमंत्री हरीश रावत को सीबीआई ने स्टिंग सीडी मामले की जांच के सिलसिले में पेश होने का समन जारी किया है. स्टिंग में कथित तौर पर उन्हें एक पत्रकार से बागी विधायकों का समर्थन हासिल करने के लिए डील करते हुए दिखाया गया था.

हालांकि रावत ने इसे बीजेपी की आपराधिक साजिश बताया था. वहीं रावत ने कहा है कि वो बहुमत परीक्षण के बाद इस मामले में पूछताछ के लिए सीबीआई के सामने हाजिर होंगे.

First published: 7 May 2016, 16:56 IST
 
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