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जिस संजीवनी को हनुमानजी भी नहीं खोज सके उसे उत्तराखंड सरकार खोजेगी

कैच ब्यूरो | Updated on: 29 June 2016, 8:17 IST
(कैच)

उत्तराखंड सरकार ने संजीवनी बूटी की तलाश में केंद्र सरकार से मदद मांगी है. रामायण में वर्णित मिथकीय औषधी संजीवनी के प्रयोग से राम के मुर्छित भाई लक्ष्मण के प्राणों की रक्षा की गई थी. अभी तक ऐसी किसी जड़ी-बूटी का पता नहीं चला है जिसकी तुलना रामायण में बताई गई संजीवनी से की जा सके.

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रामायण के अनुसार जब हनुमान संजीवनी बूटी को पहचान नहीं पाए तो वो समूचे 'द्रोण पर्वत' को 'लंका' उठा लाए. रामायण के अनुसार संजीवनी बूटी रात्रि में भी चमकती है. लंका के राजवैद्य सुषेण ने हनुमान को बताया कि हिमालय के द्रोण पर्वत पर जीवनदायक जड़ी-बूटी मिलती हैं जिनमें संजीवनी भी शामिल है.

उत्तराखंड की हरीश रावत सरकार में स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी मानते हैं कि ये बूटी राज्य के चमोली जिले में स्थित द्रोणगिरी पहाड़ियों में मिलती है.

शुरुआत

नेगी के अनुसार संजीवनी को तलाश करने वाली परियोजना की शुरुआत 25 करोड़ रुपये से हो सकती है. परियोजना में केंद्र से करीब 150 करोड़ रुपये मदद की जरूरत होगी. नेगी ने कहा, "जब परियोजना शुरू हो जाएगी तभी सही लागत का अनुमान लग सकेगा."

नेगी ने बताया कि उत्तराखंड के स्वास्थ्य मंत्रालय ने केंद्र सरकार को प्रारंभिक प्रस्ताव भेज दिया है. उन्होंने बताया कि इस परियोजना पर केंद्रीय आयुष मंत्री श्रीपद नायक से चर्चा हो चुकी है.

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नेगी ने कहा कि केंद्र को शीघ्र ही विस्तृत प्रस्ताव भेजा जाएगा. उन्होंने कहा, "हमने ब्योरा तैयार करने के लिए एक टीम बनाई है."

प्रारंभिक प्रस्ताव में केंद्र से आर्थिक मदद के अलावा संसाधनों (वैज्ञानिक इत्यादि) की भी मदद मांगी गई है.

नेगी ने बताया कि उत्तराखंड सरकार ने ऋषिकेश में शोध संस्थान बनाने के लिए जमीन भी चिह्नित कर ली है. ये संस्थान केवल संजीवनी बूटी समेत सभी जड़ी-बूटियों पर शोध करेगा.

खजाना

नेगी ने दावा किया कि उत्तराखंड में जड़ी-बूटियों का खजाना है. उन्होंने आंख में डाली जाने वाली जड़ी चिलमोरा का हवाला देते हुए कहा, "उनमें से कई अब विलप्त होने की कगार पर हैं." 

ये पहली बार नहीं है जब संजीवनी की तलाश करने की कोशिश की जा रही है. साल 2009 में पतंजलि कारोबारी समूह के बालकृष्ण ने संजीवनी खोजने का दावा किया था. बालकृष्ण द्रोणगिरी पर्वत शृंखला पर अपने दो साथियों के साथ इस जड़ी को खोजने गए थे.

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ये अलग बात है कि 80 रुपये में 40 ग्राम मिलने वाली पतंजलि की संजीवनी वटी जीवनदायक होने का दावा नहीं करती है. पतंजलि की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार यह "मियादी बुखार, सर्दी, खांसी सांसों में तकलीफ और दूसरी संक्रामक बीमारियों में लाभदायक है."

बालकृष्ण के दावे के बाद उत्तराखंड के तत्कालीन सीएम रमेश पोखरियाल निशंक ने तीन सदस्यों की टीम को इसका पता लगाने के लिए नियुक्त किया था.

First published: 29 June 2016, 8:17 IST
 
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