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उत्तराखंड: कोर्ट ने केंद्र सरकार को दिया करारा झटका

कैच ब्यूरो | Updated on: 21 April 2016, 21:25 IST

नैनीताल हाईकोर्ट ने उत्तराखंड से राष्ट्रपति शासन हटा दिया है. अदालत ने हरीश रावत को 29 अप्रैल को बहुमत साबित करने को कहा है. वहीं हाईकोर्ट ने कांग्रेस के नौ बागी विधायकों की सदस्यता रद्द करने के स्पीकर के फैसले को सही ठहराया है 

केंद्र सरकार इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगी. हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में केंद्र द्वारा राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के फैसले को गलत ठहराया है. 27 मार्च को उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लागू हुआ था.   

इस बीच फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए हरीश रावत ने कहा है कि हम बहुमत साबित करने के लिए तैयार हैं. प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रावत ने कहा कि उनके पास पूरा बहुमत है. रावत ने अपील की है कि सरकार को बाहर से समर्थन देने वाले छह विधायक उनका साथ दें.

हरीश रावत ने हाईकोर्ट के फैसले से पीएम नरेंद्र मोदी को सीख लेने की नसीहत दी. पीएम मोदी पर तंज कसते हुए रावत ने कहा कि हम कभी लड़ने की बात नहीं करते. वो बड़े लोग हैं. चौड़े सीने वाले लोग हैं.

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फैसले के बाद हरीश रावत ने कहा, "अंततः सत्य की विजय हुई, हम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं". वहीं कांग्रेस नेता इंदिरा हृदयेश ने कहा, "सत्य और न्याय की रक्षा के लिए हम न्यायपालिका को सलाम करते हैं." 

9 बागी विधायकों की सदस्यता रद्द

हाईकोर्ट ने इस मामले में कांग्रेस के नौ बागी विधायकों की सदस्यता रद्द कर दी है. अदालत ने स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल के बागियों की सदस्यता रद्द करने के फैसले को सही करार दिया है. 

हाईकोर्ट ने बागी विधायकों पर टिप्पणी करते हुए कहा, "आपको अयोग्य होकर दल-बदल करने के 'संवैधानिक गुनाह' की कीमत अदा करनी होगी." कोर्ट ने ये भी कहा कि धारा 356 का इस्तेमाल सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के खिलाफ किया गया. 

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उत्तराखंड विधानसभा में एक मनोनीत विधायक समेत कुल 71 सदस्य हैं. कांग्रेस के नौ विधायकों ने विजय बहुगुणा की अगुवाई में हरीश रावत सरकार के खिलाफ 18 मार्च को बगावत कर दी थी. 

जिसके बाद से रावत सरकार अल्पमत में आ गई थी. इस बीच हरीश रावत ने देहरादून में राज्यपाल केके पॉल से मुलाकात की है.

केंद्र सरकार को कड़ी फटकार

उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने के मामले में नैनीताल हाईकोर्ट ने आज केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई. अदालत ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि आप उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन क्यों नहीं हटा रहे हैं.

डिवीजन बेंच में सुनवाई के दौरान अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए केंद्र सरकार से पूछा कि अगर राष्ट्रपति शासन हटता है तो बड़ी पार्टी को सरकार बनाने का मौका क्यों नहीं मिलना चाहिए.

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साथ ही अदालत ने कहा कि केंद्र सरकार हाईकोर्ट से खेल नहीं सकती. हाईकोर्ट ने कहा कि क्या सरकार प्राइवेट पार्टी है. कोर्ट ने केंद्र से पूछा, "आप सरकार बनाने का मौका क्यों नहीं देते."

27 मार्च को लगा था राष्ट्रपति शासन

उत्तराखंड में 18 मार्च से सियासी संकट है. वित्त विधेयक पर मत विभाजन की विपक्ष की मांग स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल ने खारिज कर दी थी. स्पीकर ने मनी बिल को ध्वनि मत से पारित बताया था.

जिसके बाद विधानसभा में अजीब हालात पैदा हो गए. सदन के अंदर ही मंत्री प्रसाद नैथानी और हरक सिंह रावत में झड़प हो गई थी.  

विपक्ष और कांग्रेस के बागी विधायकों ने रावत सरकार को अल्पमत में बताते हुए बर्खास्त करने की मांग की थी. 

जिसके बाद राज्यपाल केके पॉल ने हरीश रावत सरकार को 28 मार्च तक बहुमत साबित करने का मौका दिया था. लेकिन उससे ठीक एक दिन पहले ही केंद्र की सिफारिश पर राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू हो गया.

राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के खिलाफ हरीश रावत ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी. सिंगल बेंच ने 31 मार्च को फ्लोर टेस्ट का आदेश दिया, लेकिन डिवीजन बेंच ने आदेश को पलट दिया था.

First published: 21 April 2016, 21:25 IST
 
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