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उत्तराखंड राष्ट्रपति शासन: हाईकोर्ट की टिप्पणी, प्यार और जंग में सब जायज

कैच ब्यूरो | Updated on: 19 April 2016, 17:04 IST

उत्तराखण्ड में राष्ट्रपति शासन लगाने के मामले में नैनीताल हाईकोर्ट में बुधवार को भी सुनवाई जारी रहेगी. केंद्र सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने इस मामले में पक्ष रखा.

इस दौरान अदालत ने एक दिलचस्प टिप्पणी की. अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी से कोर्ट ने कहा कि प्यार और जंग में सब जायज है. रोहतगी ने अपनी बहस को खत्म करते हुए कहा था कि हरीश रावत को एक और मौका नहीं दिया जाना चाहिए.

जिसके बाद हाईकोर्ट ने ये टिप्पणी की. हरीश रावत की ओर से पेश हुए कांग्रेस नेता और वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, "डिवीजन बेंच ने केंद्र और राज्य सरकार के वकीलों की दलील सुनी. हमारा पक्ष कल सुना जाएगा."

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राज्य में 27 मार्च को राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के खिलाफ हरीश रावत ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी. सिंगल बेंच ने 31 मार्च को फ्लोर टेस्ट का आदेश दिया था. लेकिन डिवीजन बेंच ने आदेश को पलटते हुए राष्ट्रपति शासन को बहाल रखा था.

'राष्ट्रपति शासन लगाना अलोकतांत्रिक'

वहीं सोमवार को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राष्ट्रपति शासन लगाने के केंद्र सरकार के फैसले पर सवाल उठाए थे. जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस वीके बिष्ट की डिवीजन बेंच ने कहा था कि ये लोकतंत्र की जड़ें काटने वाला कदम है.

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अदालत ने केंद्र सरकार के खिलाफ टिप्पणी करते हुए कहा, "वित्त विधेयक चाहे पास हुआ हो या नहीं आप इस तरह से एक चुनी हुई लोकतांत्रिक सरकार को नहीं गिरा सकते हैं."

हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने कहा कि राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई गई जबकि नए विधानसभा चुनाव होने में भी ज्यादा वक्त नहीं बचा था.

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First published: 19 April 2016, 17:04 IST
 
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