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उत्तराखंड: रावत को राहत, बहुमत परीक्षण से बाहर रहेंगे बागी

कैच ब्यूरो | Updated on: 9 May 2016, 17:06 IST

उत्तराखंड में बहुमत परीक्षण से एक दिन पहले बागी विधायकों को सुप्रीम कोर्ट से भी झटका लगा है. अदालत ने मामले पर सुनवाई करने से फिलहाल इनकार करते हुए उन्हें बहुमत परीक्षण में शामिल होने की इजाजत नहीं दी है.

इसके साथ ही बागी विधायकों को कोई राहत नहीं मिल पाई है. वहीं फ्लोर टेस्ट से ठीक पहले हरीश रावत के लिए सियासी समीकरण पहले से आसान हुए हैं.

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नौ बागी विधायकों ने इस मामले में हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. नैनीताल हाईकोर्ट ने आज ही स्पीकर के फैसले को बरकरार रखते हुए बागियों की याचिका खारिज कर दी थी.

फिलहाल सुनवाई से इनकार


सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में फिलहाल सुनवाई से इनकार कर दिया है. जिसके बाद अब कांग्रेस के नौ बागी विधायक मंगलवार को होने वाले बहुमत परीक्षण में हिस्सा नहीं ले पाएंगे. 

पढ़ें: उत्तराखंड: नौ बागी विधायकों को बड़ा झटका, बहुमत परीक्षण में नहीं डाल पाएंगे वोट

नैनीताल हाईकोर्ट ने स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल के नौ बागी विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने के फैसले को सही करार दिया था. जस्टिस यूसी ध्यानी की एक सदस्यीय बेंच ने मामले की सुनवाई की.

हाईकोर्ट से भी लगा था झटका


वहीं सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस शिवकीर्ति सिंह की डबल बेंच ने मामले पर सुनवाई की. इससे पहले बागी विधायकों की याचिका पर चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर ने निर्देश दिए थे कि मामला उसी बेंच के पास ले जाया जाए, जिसने फ्लोर टेस्ट का आदेश दिया था.

पढ़ें: हरीश रावत: आज इंसाफ हुआ, कल भी इंसाफ मिलने का पूरा भरोसा

सुप्रीम कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई 12 जुलाई को होगी. हरीश रावत को मंगलवार यानी 10 मई को विधानसभा में बहुमत साबित करना है.


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10 मई को शक्ति परीक्षण


सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड विधानसभा में 10 मई को बहुमत परीक्षण का आदेश दिया था. राज्य में इस दिन दो घंटे (11 से 1 बजे तक) के लिए राष्ट्रपति शासन नहीं रहेगा.

शक्ति परीक्षण के दौरान होने वाली वोटिंग की वीडियोग्राफी भी की जाएगी. इसका नतीजा सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट में 11 मई को दाखिल किया जाएगा.

नैनीताल हाईकोर्ट ने 22 अप्रैल को उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन हटाने का फैसला दिया था. जिसके खिलाफ केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की. जिसके बाद हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी.

इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने रामेश्वर जजमेंट का हवाला देते हुए केंद्र को बहुमत परीक्षण कराने की सलाह दी थी. जिसे केंद्र सरकार ने मान लिया था.

दूसरे स्टिंग से सियासी हड़कंप


हरीश रावत को सीबीआई ने स्टिंग सीडी मामले की जांच के सिलसिले में आज पेश होने का समन जारी किया है. स्टिंग में कथित तौर पर उन्हें एक पत्रकार से बागी विधायकों का समर्थन हासिल करने के लिए डील करते हुए दिखाया गया था.

इस बीच एक दूसरा स्टिंग भी रविवार को सामने आया. एक निजी न्यूज़ चैनल द्वारा प्रसारित इस स्टिंग में कांग्रेस विधायक मदन सिंह बिष्ट ने कथित रूप से दावा किया था कि हरीश रावत ने कांग्रेस के 12 विधायकों को 25-25 लाख रुपये घूस दी है. 

वहीं इस दूसरे स्टिंग में मदन बिष्ट ने कथित तौर पर आरोप लगाया है कि खनन के जरिए हरीश रावत ने 27 करोड़ रुपये की काली कमाई की है.

स्टिंग में बागी विधायक हरक सिंह रावत और मदन बिष्ट के बीच बातचीत होते दिखाया गया है. हालांकि बिष्ट ने इस मामले में पुलिस से शिकायत करते हुए बागी खेमे पर धमकाने का आरोप लगाया है. 

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18 मार्च को विधानसभा में विनियोग विधेयक पर मत विभाजन की बीजेपी की मांग का कांग्रेस के नौ विधायकों ने समर्थन किया था, जिसके बाद प्रदेश में सियासी संकट पैदा हो गया.

27 मार्च को राष्ट्रपति शासन लगाने के साथ हरीश रावत सरकार को बर्खास्त कर दिया गया. हालांकि विधानसभा को निलंबित रखा गया था.

First published: 9 May 2016, 17:06 IST
 
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