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उत्तराखंड: राजाजी टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर सहित कई अधिकारी थे बाघों के शिकार में शामिल

कैच ब्यूरो | Updated on: 15 February 2019, 11:42 IST

2017 से एक बाघ और तेंदुए के अवैध शिकार की घटनाओं की जांच रिपोर्ट में उत्तराखंड वन विभाग के अधिकारियों और श्रमिकों के शामिल होने की बात जांच में सामने आयी है. राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक सनातन सोनकर और राष्ट्रीय उद्यान में तैनात एक सहायक संरक्षक (ACF) इसमें शामिल हैं, इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार 22 मार्च, 2017 को देहरादून वन प्रभाग की टीम को राजाजी टाइगर रिजर्व के मोतीचूर रेंज के पास मांस, हड्डियां और एक तेंदुए की खाल मिली थी.

देहरादून स्थित वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) ने बाद में पाया कि मांस और हड्डियां दो बाघों और दो तेंदुओं की थीं. बुधवार को मुख्य वन संरक्षक मनोज चंद्रन ने देहरादून में राज्य सरकार, वन विभाग और सीजेएम कोर्ट को अवैध शिकार की जांच रिपोर्ट सौंपी. चंद्रन इस साल जून 2017 से जनवरी के बीच मामले के जांच अधिकारी (IO) थे.

रिपोर्ट में कहा गया है. इनपर घटनास्थल से बरामद साक्ष्य को छिपाने का आरोप लगे हैं. इनपर कथित अपराध भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 107 (एबेटमेंट), 201 (सबूतों के गायब करने) 202 (अपराध की सूचना देने के लिए जानबूझकर चूक) के तहत मामले दर्ज किये गए हैं.

रिपोर्ट में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, आईपीसी और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत उल्लंघन के लिए 14 शिकारियों का नाम है. रिपोर्ट में कहा गया है कि एसीएफ ने सबूत छिपाने की भी कोशिश की और जांच में सहयोग नहीं किया.

First published: 15 February 2019, 11:42 IST
 
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