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बनारस भगदड़: लाशों के बीच से जयगुरुदेव के झंडे बटोरते रहे भक्त

आवेश तिवारी | Updated on: 16 October 2016, 2:45 IST
QUICK PILL
  • वाराणसी के राजघाट पुल पर मची भगदड़ में मरने वालों की संख्या 25 हो चुकी है जबकि ज़ख़्मी भक्तों की संख्या 50 से ऊपर है.
  • मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सभी पीड़ितों पांच-पांच लाख मुआवज़े का एलान किया है. वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने संसदीय क्षेत्र में हुए इस हादसे पर शोक जताया है. 

वाराणसी में शनिवार की दोपहर भगदड़ के बाद राजघाट पुल पर हर तरफ़ जूते चप्पल, अनाज की थैलियां बिखरी थीं. हर कोई रो-रोकर आने-जाने वालों से अपने परिजनों का पता पूछ रहे थे. मगर इन सबके बीच बाबा जयगुरुदेव के समर्थक खून में सने सामानों को हटाकर उनके नाम के झंडे बटोर रहे थे. 

झंडे बीनने का मकसद क्या है? यह पूछने पर कार्यकर्ताओं ने जवाब दिया ‘ताकि बाबा जयगुरुदेव का अपमान ना हो जाए’. कार्यकर्ताओं के मुताबिक उन्हें ऐसा करने का हुक्म बाबा के उत्तराधिकारी पंकज महाराज ने दिया था. 

दूसरी तरफ़ उसी पुल पर बिखरे सामानों के बीच हज़ारों की भीड़ वहां से गुज़र रही थी. बाबा के समागम में देश के अलग-अलग हिस्सों से आई भीड़ को अंदाज़ा भी नहीं था कि महज़ कुछ देर पहले वहां 25 लाशें बिखरी पड़ी थीं. 

बाबा जयगुरुदेव के उत्तराधिकारी कभी उनके ड्राइवर थे

बनारस के रामनगर में यह शाकाहारी समागम पंकज महाराज ने करवाया था जो पहले बाबा जयगुरुदेव का ड्राइवर थे. जयगुरुदेव की मौत के बाद पंकज यादव को उनका राजपाट दिलवाने में समाजवादी पार्टी के ताक़तवर मंत्री और नेता शिवपाल यादव की भूमिका अहम थी.

प्रशासनिक चूक या राजनीतिक हनक?

कहा जा रहा है कि वाराणसी में हुए इस समागम के लिए पंकज को प्रशासनिक मदद भी वाया शिवपाल ही आई थी. वरना त्योहार के इस मौसम में वाराणसी जैसे शहर में बिना पुख़्ता बंदोबस्त के इतने बड़े समागम की इजाज़त ज़िले के अफ़सर नहीं देते. 

नाम नहीं छापने की शर्त पर कुछ लोगों ने बताया कि यह कहने को तो शाकाहार समर्थकों का आयोजन था लेकिन पंकज महाराज इस समागम का इस्तेमाल कर पूर्वांचल में समाजवादी पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश कर रहे थे. 

आयोजकों में से एक दिनेश कुमार सिंह ने इन आरोपों से इनकार किया है लेकिन आयोजन में हुई बदइंतज़ामी की बात उन्होंने स्वीकार की. उन्होंने माना कि भक्तों के लिए पीने के पानी का इंतजाम करना चाहिए था. यह भी ठीक नहीं था कि भारी संख्या में आये इन भक्तों को जिनमे बुजुर्ग महिलाओं और बच्चों की संख्या बेहद ज्यादा थी, 25 किलोमीटर पैदल पदयात्रा करके प्रचार करने का आदेश दिया गया था.

शाकाहार समागम

यह समागम बनारस से तक़रीबन 12 किलोमीटर दूर कटेसर में हुआ था. एक अनुमान के मुताबिक यहां तकरीबन पांच लाख भक्त इकट्ठा हुए थे. मगर शनिवार की दोपहर 1 बजे जब भीड़ का जत्था बनारस के मशहूर राजघाट पुल से गुज़र रहा था, तभी ये हादसा हो गया. 

भक्तों को कहा गया था कि वे सुबह 7 बजे बनारस जाकर शाकाहार के समर्थन में प्रचार करें, फिर वापस समागम में लौट आएं. मगर 11 बजते-बजते यहां हालात उस वक्त ख़तरनाक होने लगे, जब भक्तों की भीड़ अंग्रेजों के जमाने के बने जर्जर राजघात पुल पर इकठ्ठा होने लगी. 

दूसरी तरफ़ बनारस ज़िला प्रशासन इस समागम में जुटने वाली भीड़ से बेख़बर था. यही वजह है कि अफ़सरों ने शनिवार को ट्रैफिक डायवर्जन नहीं किया और भीड़ के साथ-साथ भारी वाहन पर राजघाट पुल पर आते-जाते रहे. 

हादसा

तकरीबन 1 बजे दोपहर जब एक ट्रेन पुल के नीचे बनी रेल की पटरियों से गुजरी, तभी पुल में कम्पन होने लगा. इससे वहां मौजूद भीड़ को लगा कि पुल गिर रहा है और सभी लोग इधर-उधर दौड़ने लगे. महज़ कुछ मिनट में राजघाट पुल का नज़ारा बदल गया था. भीड़ एक-दूसरे के ऊपर थी और दम घुटने की वजह से 25 लोगों की मौत हो चुकी थी.   

वहीं कैच न्यूज़ से बातचीत में दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि प्रशासन को भीड़ की संख्या के बारे में सूचना दी गई थी, लेकिन जिला प्रशासन इससे इनकार कर रहा है.

चश्मदीदों के मुताबिक हादसा होने पर चारों तरफ चीख-पुकार मची हुई थी. घायल पानी मांग रहे थे लेकिन पानी या पिलाने वाले वहां नहीं थे. इस हादसे के तकरीबन 45 मिनट बाद बनारस पुलिस मौके पर पहुंची. उत्तर प्रदेश के आईजी लॉ एंड ऑर्डर हरिराम शर्मा ने कहा है कि इस बात की जांच की जाएगी कि हादसे के लिए कौन जिम्मेदार हैं, भीड़ पर काबू पाने के लिए क्या इंतजाम किए गए और कहां कमियां रह गईं. 

इस दर्दनाक हादसे के फ़ौरन बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख जताया है. उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, ‘वाराणसी में भगदड़ के दौरान लोगों की मौत पर मुझे गहरा अफसोस है. शोक संतप्त परिवारों को मेरी संवेदनाएं. जो घायल हैं उनके लिए प्रार्थना कर रहा हूं.’ 

पीएम मोदी ने ट्वीट में आगे लिखा, ‘मैंने वाराणसी में अधिकारियों से बात की है. मैंने उनसे कहा है कि जो भी लोग भगदड़ की वजह से प्रभावित हुए हैं, उनकी हर मुमकिन मदद सुनिश्चित की जाए.’ 

उत्तर प्रदेश में एक हफ्ते के भीतर भगदड़ की यह दूसरी घटना है. इससे पहले लखनऊ में मायावती की रैली में मची भगदड़ में दो लोग मारे गए थे.

First published: 16 October 2016, 2:45 IST
 
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