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पी विजयन होंगे केरल के अगले मुख्यमंत्री

कैच ब्यूरो | Updated on: 21 May 2016, 15:44 IST

केरल में वीएस अच्युतानंदन को उम्र की वजह से किनारे करते हुए सीपीआई (एम) ने पी विजयन को अगला मुख्यमंत्री बनाने का फैसला लिया है. हालांकि नए मुख्यमंत्री की अभी औपचारिक घोषणा नहीं हुई है.

लेकिन सूत्रों के हवाले से खबर है कि पार्टी ने विजयन के नाम पर मुहर लगा दी है. विधानसभा चुनाव के नतीजों में वामपंथी गठबंधन (एलडीएफ) को दो तिहाई बहुमत के करीब सीटें मिली थीं. राज्य की 140 में से 91 विधानसभा सीटों पर एलडीएफ को विजय हासिल हुई थी. 

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नाम पर पार्टी की मुहर


बताया जा रहा है कि शुक्रवार की सुबह तिरुवनंतपुरम में सेंट्रल कमिटी की बैठक में सीपीआईएम महासचिव सीताराम येचुरी और प्रकाश करात ने विजयन के नाम पर मुहर लगाई.

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केरल चुनाव में जीत के बाद लेफ्ट के सामने सबसे बड़ी चुनौती ये थी कि 92 साल के वीएस अच्युतानंदन और पी विजयन में से किसको राज्य की कमान सौंपी जाए. 

अच्युतानंदन थे स्टार प्रचारक


पूर्व मुख्यमंत्री वीएस अच्युतानंदन के हाथ में एलडीएफ के चुनाव प्रचार की कमान थी. उन्होंने पूरे राज्य में धुआंधार रैलियां कीं. उनकी चुनावी रैलियों में सबसे ज्यादा भीड़ भी देखी गई.

वहीं सीपीएम पोलित ब्यूरो के सदस्य 72 साल के पिनरायी विजयन का भी पार्टी और संगठन में काफी दबदबा है. इस चुनाव में विजयन ने भी जमकर प्रचार अभियान में हिस्सा लिया था.

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राज्य की राजनीति में दोनों नेताओं को प्रतिद्वंद्विता अतीत में खुलकर सामने आ चुकी है. ऐसे में अगर अगले सीएम के नाम को लेकर विवाद बढ़ता है, तो लेफ्ट के लिए अच्छे संकेत नहीं होंगे. देश में अभी केवल त्रिपुरा में माणिक सरकार की अगुवाई वाली वामपंथी सरकार है.


कम उम्र विजयन ने मारी बाजी


केरल में पांच साल तक सत्ता से दूर रहने के बाद लेफ्ट को दोबारा सरकार बनाने का मौका मिला है. दिग्गज नेता वीएस अच्युतानंदन का तिरुवनंतपुरम में सीपीएम ऑफिस से बाहर निकलना काफी कुछ बयां कर रहा है.

एलडीएफ ने तय किया है कि पी विजयन ही अब राज्य के नए मुख्यमंत्री होंगे. माना जा रहा है कि विजयन ने स्टार प्रचारक और पूर्व सीएम अच्युतानंदन पर इसलिए बाजी मारी, क्योंकि विजयन उनसे 20 साल छोटे हैं. 72 साल के विजयन का पार्टी की राज्य समिति में बहुमत भी था. 

दोनों के बीच पुराने मतभेद


केरल की राजनीति में विजयन को ज़मीन से जुड़े नेता के तौर पर देखा जता है. पार्टी की कार्यशैली के साथ उनका सामंजस्य भी स्थापित है. वहीं जनता के नेता कहे जाने वाले अच्युतानंदन को केरल में ब्रांड तो समझा जाता है, लेकिन उन पर कई बार पार्टी के अनुशासन और नियमों को तोड़ने का आरोप लगता रहा है. 

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बतौर मुख्यमंत्री अच्युतानंदन के पहले कार्यकाल (2006-11) के दौरान विजयन के साथ अक्सर उनका मतभेद हो जाता था, जिससे पार्टी को अक्सर शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता था.

एक बार तो ऐसा भी हुआ कि पार्टी ने दोनों नेताओं का नाम पोलित ब्यूरो से हटा दिया. हालांकि विजयन को बहाल कर दिया गया था, लेकिन अच्युतानंदन केंद्रीय समिति के अतिथि बनकर ही रह गए. ऐसे में अगर दोनों के अतीत से जुड़ा विवाद फिर सिर उठाता है, तो लेफ्ट के लिए नई मुश्किल हो सकती है.

First published: 21 May 2016, 15:44 IST
 
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