Home » इंडिया » Veteran Literator Mudrarakshasa died in Lucknow after prolonged illness
 

साहित्यकार मुद्राराक्षस का लंबी बीमारी के बाद निधन

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 February 2017, 1:49 IST
(फाइल फोटो)

वयोवृद्ध साहित्यकार मुद्राराक्षस का सोमवार को लखनऊ में निधन हो गया. वह लंबे अरसे से बीमार चल रहे थे. मई में अचानक उनकी तबीयत बिगड़ जाने पर उन्हें बलरामपुर अस्पताल में भर्ती करवाया गया था.

हालत में कोई सुधार नहीं होने पर डॉक्टरों ने उन्हें किंग जॉर्ज मेडिकल यूनीवर्सिटी (केजीएमयू) रेफर कर दिया था. बीते एक हफ्ते पहले उन्होंने घर जाने की ज‌‌िद की, तो उन्हें घर ले आया गया. 

आज अचानक तबीयत ब‌िगड़ने पर उन्हें इलाज के लिए केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर लाया जा रहा था, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले रास्ते में ही उनकी मौत हो गई.

बीते दिनों उनकी बीमारी के दौरान साहित्यकारों ने उनकी आर्थिक मदद की भी कोशिश की थी. साह‌ित्य के क्षेत्र में अमूल्य योगदान देने वाले मुद्राराक्षस का जन्म 21 जून 1933 को हुआ था.

बहुमुखी प्रतिभा के धनी

मुद्राराक्षस बहुमुखी क्षमता से समपन्न साहित्कार थे. नाट्य लेखन, मंचन, कथा, व्यंग्य, कहानी, उपन्यास, आलोचना, अनुवाद, सम्पादन, पत्रकारिता आदि अनेक विधाओं में उन्होंने काम किया.

उन्होंने बीस से ज्यादा नाटकों का सफल निर्देशन, दस से ज्यादा नाटकों का लेखन, बारह उपन्यास, पांच कहानी संग्रह, तीन व्यंग्य संग्रह, इतिहास सम्बन्धी तीन पुस्तकें और आलोचना सम्बन्धी पांच पुस्तकें लिखीं.

ज्ञानोदय और अनुब्रत का संपादन

इसके अलावा मुद्राराक्षस ने ज्ञानोदय और अनुब्रत जैसी तमाम प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिकाओं का लम्बे समय तक संपादन भी किया. उनकी किताबों का दुनिया के कई देशों में अंग्रेजी समेत दूसरी भाषाओं में अनुवाद भी हुआ है.

15 साल से भी ज्यादा समय तक वे आकाशवाणी में एडिटर (स्क्रिप्ट्स) और ड्रामा प्रोडक्शन ट्रेनिंग के मुख्य निर्देशक रहे. साहित्य के अलावा समाज और सियासत से भी उनकी नातेदारी रही. पीपुल्स पॉलिटिक्स और प्रगतिशील मूल्यों में यकीन रखने वाले मुद्राराक्षस समय-समय पर सामाजिक आंदोलनों से भी जुड़े. 

साहित्य नाटक अकादेमी अवॉर्ड

अभिव्यक्ति की आज़ादी, साम्प्रदायिकता, जातिवाद, महिला-उत्पीड़न और सरकारी मनमानी आदि मुद्दों पर वे कई बार लखनऊ की सड़कों पर उतरे. साहित्य-संस्कृति की दुनिया में मुद्राराक्षस का नाम बड़े अदब और सम्मान के साथ लिया जाता है.

उन्हें साहित्य नाटक अकादेमी, साहित्य भूषण, दलित रत्न और जन सम्मान जैसे अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका था.

First published: 13 June 2016, 4:33 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी