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विश्वविद्यालयों में उठ रही अभिव्यक्ति की आजादी पर मुखर हुए उपराष्ट्रपति अंसारी

कैच ब्यूरो | Updated on: 25 March 2017, 18:43 IST
(एएनआई)

उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने शनिवार को पंजाब विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में विश्वविद्यालयों में उठ रही आजादी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि आजादी के नाम पर संकीर्ण सोच आज के वक्त में विश्वविद्यालयों के सामने सबसे बड़ी चुनौती है.

दीक्षांत समारोह के दौरान पंजाब के राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर, हरियाणा के राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी, सांसद किरण खेर, मुरली मनोहर जोशी, अभिनेता अनुपम खेर समेत कई दिग्गज मौजूद रहे. इस दौरान 5 छात्रों को स्पेशल यूनिवर्सिटी मेडल तो 213 छात्रों को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया.

देश के विश्वविद्यालयों में बिगड़ते माहौल पर चिंता जताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा, "विश्वविद्यालयों की स्वतंत्रता को चुनौती मिल रही है और यह चुनौती कुछ संकीर्ण सोच की विचारधारा से मिल रही है. आश्चर्य है कि इस संकीर्ण सोच को जनहित में बताया जा रहा है. विश्वविद्याल उदार मूल्यों के नवीनीकरण के स्रोत रहे हैं. इन मूल्यों से ही सामाजिक गतिशीलता मिलती है और लोगों को समानता के अवसर मिलत हैं."

 

उन्होंने आगे कहा कि असहमित और आंदोलन का अधिकार हमें देश के संविधान निर्माताओं ने बहुत पहले ही दिया था. यह अधिकार हमारे मौलिक अधिकारों में शामिल है. इसका फायदा यह है कि भारत जैसे विविधतापूर्ण देश को महज संकीर्ण सोच के आधार पर परिभाषित नहीं किया जा सकता है. हमारे संविधान के प्रावधान देश को वैचारिक या धार्मिक मापदंडों के आधार पर परिभाषित करने से रोकते हैं.

गौरतलब है कि उपराष्ट्रपति की यह टिप्पणी दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (एआईएसए) के बीच अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर हुई बहस के सिलसिले में आया है.

इससे पूर्व में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, हैदराबाद विश्वविद्यालय समेत अन्य विश्वविद्यालयों में भी छात्रों के बीच विचारधारा विवाद से जुड़ी कई खबरें आई हैं.

First published: 25 March 2017, 18:43 IST
 
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