Home » इंडिया » Vice President Hamid Ansari is right: the “harm” that Narasimha Rao did does live on
 

हामिद अंसारी: नरसिम्हा राव की विरासत आज भी देश को भारी पड़ रही है

चारू कार्तिकेय | Updated on: 10 February 2017, 1:49 IST
QUICK PILL
  • पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव पर लिखी गई किताब का विमोचन करते हुए उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी ने कहा कि उनके गलत फैसलों का नतीजा आज भी देश भुगत रहा है.
  • अंसारी ने राव की विरासत को याद करते हुए उनके कार्यकाल में हुए सामजिक और राजनीतिक उथल पुथल का जिक्र किया, जिसका जिक्र अक्सर नहीं किया जाता है.

उप-राष्ट्रपति हामिद अंसारी का पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के बारे में दिया गया बयान बताता है आप कब और कैसे विनम्र होते हुए भी अपनी बात रख सकते हैं. 

राव का कार्यकाल भारत के लिए विशेष रहा लेकिन वह अपने योगदान के लिए याद नहीं किए जाते हैं. उनकी विरासत को उनके द्वारा लिए गए फैसले और कई मामलों में फैसले नहीं लिए जाने के लिए याद किया जाता है.

अंसारी पत्रकार विनय सीतापति की राव पर लिखी गई किताब हाफ लॉयन के विमोचन के मौके पर बोल रहे थे. अंसारी ने कहा, 'राव ने जो अच्छा किया वह आज उनके जाने के बाद भी मौजूद हैं. लेकिन जो नुकसान हुआ वह भी आज मौजूद है और उसकी कीमत चुकानी पड़ रही है.' किताब के विमोचन के मौके पर बोलते हुए उन्होंने किताब के केवल दो हिस्से मसलन संसद का प्रबंधन और बाबरी विध्वंस के बारे में बातचीत की.

राव भारत के 9वें प्रधानमंत्री थे और वह 21 जून 1991 से 16 मई 1996 तक प्रधानमंत्री रहे. कई लोग उन्हें भारतीय आर्थिक सुधारों का मसीहा बताते हैं क्योंकि उन्होंने लाइसेंस राज का खात्मा करते हुए वैश्वीकरण और उदारीकरण का रास्ता खोला.

अंसारी ने राव की विरासत को याद करते हुए उनके कार्यकाल में हुए सामजिक और राजनीतिक उथल पुथल का जिक्र किया, जिसका जिक्र अक्सर नहीं किया जाता है. राव के कुछ खराब  फैसलों पर एक नजर, जिससे नुकसान हुआ.

संसद का नुकसान

अंसारी के मुताबिक 1992 का विश्वासमत हर लिहाज से दु:स्वपन की तरह था. कांग्रेस बहुमत से करीब 10 सीट दूर थी. प्रधानमंत्री कमजोर लग रहे थे. इसलिए सरकार बचाना सबसे बड़ा मकसद था. इस दौरान अनैतिक तरीकों का इस्तेमाल किया गया जो निश्चित तौर पर कानूनी भी नहीं था.

अंसारी जिस 'अनैतिक तरीकों' का जिक्र कर रहे थे वह विश्वास मत के दौरान झारखंड मुक्ति मोर्चा के सांसदों को लाखों रुपये देने का है. इसे जेएमएम घूस कांड के नाम से जाना जाता है. बाद में सीबीआई की विशेष अदालत ने राव को इस मामले में दोषी ठहराया. राव इस तरह से देश के पहले प्रधानमंत्री हुए जिन्हें आपराधिक मामलों में दोषी पाया गया.

संस्थाओं को नुकसान

विश्वास मत के दौरान घूस दिए जाने के अलावा राव को कई अन्य भ्रष्टाचार के आरोपों  का सामना करना पड़ा. उनके खिलाफ सीबीआई के दो मामले थे. 

यह मामला लखुभाई पाठक धोखाधड़ी और सेंट किट्स धोखाधड़ी का मामला था. उनका चंद्रास्वामी के साथ कथित रिश्ता था जिनके खिलाफ वित्तीय अनियिमितता के आरोप थे. स्वामी को लखुभाई पाठक मामले में 1996 में गिरफ्तार भी किया गया. 

इसके अलावा उनके बेटे के खिलाफ भी भ्रष्टाचार के कई आरोप थे.

भारत की धर्मनिरपेक्ष छवि को नुकसान

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में बाबरी मस्जिद को गिराए जाने की घटना राव के कार्यकाल में ही हुई. पूर्व प्रधानमंत्री पर इस विध्वंस को रोकने की दिशा में कुछ भी नहीं किए जाने का आरोप है. बाबरी विध्वंस की वजह से कई जगह दंगे हुए और इससे देश के धर्मनिरपेक्ष ढांचे को नुकसान हुआ.

हालांकि लिब्रहान आयोग ने राव को इन आरोपों से मुक्त कर दिया लेकिन राव की विफलता को अंसारी समेत कई लोग बता चुके हैं. 

अंसारी ने पूर्व प्रधानमंत्री को गलत फैसला लेने का दोषी करार दिया. उन्होंने किताब में तत्कालीन गृह सचिव की तरफ से मुहैया कराए गए आपातकालीन योजना का जिक्र किया. योजना में अनुच्छेद 355 के सीमित इस्तेमाल तक की बात की गई थी जो केंद्र को आंतरिक अशांति से राज्य को सुरक्षित करने का अधिकार देता है.

सांप्रदायिक अशांति के मामले में भी राव की भूमिका को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है. 1984 के सिक्ख दंगों के दौरान वह केंद्रीय गृह मंत्री थे. 1992 की तरह ही उन पर 84 के दंगों के दौरान लापरवाही बरतने का आरोप लगा. इस दंगे में हजारों सिक्ख मारे गए थे.

First published: 29 June 2016, 8:03 IST
 
चारू कार्तिकेय @charukeya

असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़, राजनीतिक पत्रकारिता में एक दशक लंबा अनुभव. इस दौरान छह साल तक लोकसभा टीवी के लिए संसद और सांसदों को कवर किया. दूरदर्शन में तीन साल तक बतौर एंकर काम किया.

पिछली कहानी
अगली कहानी