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हामिद अंसारी: नरसिम्हा राव की हिंदूवादी सोच बाबरी विध्वंस की जिम्मेदार

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 February 2017, 1:49 IST
(फाइल फोटो)

उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने एक पुस्तक विमोचन समारोह के दौरान दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में हुए कई नुकसान की भारी कीमत चुकानी पड़ रही है.

विनय सीतापति द्वारा लिखित किताब 'हाफ लायन' में छह दिसंबर 1992 (बाबरी मस्जिद गिराए जाने का दिन) से पहले पैदा हुए हालात को लेकर नरसिम्हा राव की भूमिका का बचाव किया गया है.

पुस्तक के विमोचन के मौके पर उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने कहा कि संसद के प्रबंधन और बाबरी मस्जिद के विध्वंस से संबंधित पुस्तक के दो हिस्से टिप्पणियां आमंत्रित करेंगी. पुस्तक के बारे में प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कई सवाल खड़े किए. 

'26 जुलाई 1992 का अभिशाप'

हामिद अंसारी ने कहा, "अभिशाप 26 जुलाई 1992 को विश्वास मत के साथ आया. सरकार का उद्देश्य किसी भी कीमत पर अपना अस्तित्व बचाए रखना था. अनैतिक हथकंडों का सहारा लिया गया. ये आखिरकार कानून की सीमा से परे पाए गए. स्पष्ट है कि यह नरसिम्हा राव के करियर का सबसे खराब राजनैतिक फैसला था."

बाबरी मस्जिद के विध्वंस पर अंसारी ने पुस्तक के आकलन को उद्धृत किया जिसमें सीतापति ने कहा है, "राव मस्जिद को बचाना चाहते थे और हिंदू भावनाओं की रक्षा करना चाहते थे. और खुद की भी रक्षा करना चाहते थे.

बाबरी मस्जिद को गिरा दिया गया. हिंदुओं ने कांग्रेस से मुंह मोड़ लिया और उनकी अपनी भी प्रतिष्ठा तार-तार हो गई." 

'नरसिम्हा राव की सोच की भारी कीमत'

इसे विस्तार से बताते हुए हामिद अंसारी ने कहा, "निष्कर्ष अपरिहार्य है कि हिचक राजनैतिक दृष्टि से थी, न कि संवैधानिक लिहाज से थी. निष्कर्ष के तौर पर कहा जा सकता है कि नरसिम्हा राव ने देश के लिए जो अच्छा किया वो उनके बाद भी है और नुकसान भी बदस्तूर जारी है और भारी कीमत वसूल रहा है."

वहीं पुस्तक विमोचन के बाद विनय सीतापति ने कहा कि राव की भूमिका 1984 के सिख विरोधी दंगों में ज्यादा गंभीर थी क्योंकि वह उस वक्त गृहमंत्री थे. इस परिचर्चा में पूर्व विदेश मंत्री के नटवर सिंह, वरिष्ठ पत्रकार शेखर गुप्ता और विदेश नीति के जानकार सी राजा मोहन ने भी हिस्सा लिया. 

'सजग होने से किया इनकार'

इस दौरान वरिष्ठ कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने कहा, "हमने प्रधानमंत्री को खतरे के प्रति सजग होने के लिए राजी करने की कोशिश की लेकिन उस व्यक्ति ने खतरे के प्रति सजग होने से इनकार कर दिया."

विनय सीतापति की किताब हाफ लायन में उन बातों को खारिज करने की कोशिश की गई है कि पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने जान-बूझकर मस्जिद को गिराए जाने से रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया.

First published: 28 June 2016, 3:30 IST
 
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