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गुजरात: संघ के समर्थन से भाजपा ने दिया पहला अल्पसंख्यक मुख्यमंत्री

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 August 2016, 9:27 IST

विजय रुपानी गुजरात के नए मुख्यमंत्री होंगे. सीएम पद के प्रमुख दावेदार और पटेल समुदाय से आने वाले नितिन पटेल को उप मुख्यमंत्री बनाया गया है. शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के विधायक दल की बैठक में रुपानी के नाम पर मुहर लगी.

जैन समुदाय से आने वाले रुपानी बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के काफी करीबी माने जाते हैं. रुपानी साफ़ सुथरी छवि के नेता हैं. सौराष्ट में उनकी अच्छी पकड़ है. वर्तमान में वह प्रदेश अध्यक्ष के साथ-साथ ट्रांसपोर्ट मंत्री भी हैं. आलाकमान ने उन्हें 'एक व्यक्ति एक पद' से छूट दी है.

रुपानी बीजेपी के बहुत पुराने कार्यकर्ता रहे हैं. सौराष्ट्र के राजकोट से पहले वो सामान्य पार्षद थे, फिर शहर के मेयर बने. धीरे-धीरे पार्टी में उनका रसूख बढ़ा तो वो पार्टी के राज्य के महामंत्री रहे.

फिर मुख्यमंत्री नहीं बन पाए पटेल

पिछले दो दिनों से मीडिया में नितिन पटेल का नाम नए मुख्यमंत्री के तौर पर सामने आ रहा था. 2014 में जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनकर दिल्ली आए तो उस समय भी पटेल मुख्यमंत्री बनने की रेस में सबसे आगे थे, लेकिन उनकी जगह आनंदीबेन पटेल को मुख्यमंत्री बनाया गया.

आनंदीबेन के इस्तीफे के बाद गुजरात के मुख्यमंत्री पद के लिए दो नेताओं के नाम सबसे आगे चल रहे थे. पहले नितिन पटेल और दूसरे विजय रुपानी. गौरतलब है कि नितिन पटेल वहां के पाटीदार समुदाय से ही ताल्लुक रखते हैं और हाल में हुई पाटीदार आंदोलन के चलते उत्पन्न स्थितियों में माना जा रहा था कि नितिन पटेल ही मुख्यमंत्री होंगे. हालांकि, इन तमाम कयासों को धता बताते हुए विजय रुपानी गुजरात प्रांत के मुख्यमंत्री चुन लिए गए हैं.

कौन हैं विजय रुपानी?

मुख्यमंत्री पद की रेस में विजय रुपानी डार्क हॉर्स बनकर उभरे और आगे निकल गए. अमित शाह और भाजपा ने सबको लगभग चकमा देते हुए उन्हें नया मुख्यमंत्री घोषित किया. देश की अधिकांश जनता भले ही रुपानी का नाम पहली बार सुन रही हो लेकिन वे भाजपा के भीतर वे जाने-माने चेहरा हैं.

जैन समुदाय से ताल्लुक रखते हैं और गुजरात प्रांत में बीजेपी के अध्यक्ष भी हैं. बीजेपी संगठन में उनकी अच्छी है. कुछ दिन पहले जब उन्हें गुजरात भाजपा का अध्यक्ष बनाया गया था तब भी यह बात कही गई थी कि उनकी संगठन क्षमता काबिले तारीफ है. राजकोट पश्चिम से विधायक रुपानी के पास गुजरात सरकार में परिवहन, वॉटर सप्लाई और लेबर एंड एम्प्लॉय जैसे मंत्रालय हैं.

करियर की शुरुआत?

रुपानी उसी रास्ते से भाजपा में आए हैं जिससे उसके ज्यादातर कार्यकर्ता आते हैं यानी संघ या उसके आनुषांगिक संगठन. आज वे भले ही गुजरात के मुख्यमंत्री पद पर काबिज है लेकिन उन्होंने अपनी राजनीति में काफी संघर्ष किया है. अपने पढ़ाई के दिनों से ही आरएसएस के विद्यार्थी संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े रहे हैं.

रुपानी अहमदाबाद में एबीवीपी के पूर्णकालिक कार्यकर्ता के तौर पर काम किया है. इसके बाद वे जनसंघ में आ गए. वे भारतीय जनता पार्टी के शुरुआती दिनों से ही संगठन का हिस्सा हैं. वे राजकोट के पार्षद रहने के अलावा राज्यसभा के भी सदस्य रह चुके हैं.

इस बार नितिन पटेल को उप मुख्यमंत्री बनाया गया है. पटेल फिलहाल गुजरात सरकार में मंत्री हैं और उनके पास स्वास्थ्य, मेडिकल, शिक्षा, परिवार कल्याण, सड़क और परिवहन के अलावा कैपिटल प्रोजेक्ट्स का जिम्मा है. इससे पहले वह जल आपूर्ति, जल संसाधन और शहरी विकास मंत्री थे जिसे गुजरात सरकार का अहम विभाग माना जाता रहा है. नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में वह राज्य के वित्तमंत्री भी रह चुके हैं.

विजय रुपानी गुजरात प्रांत से ताल्लुक रखने वाले उन चुनिंदा नेताओं में से हैं जो इमरजेंसी के विरोध में जेल भी जा चुके हैं. वे आज की तारीख में गुजरात प्रांत के सबसे अनुभवी नेताओं के तौर पर भी शुमार किए जा सकते हैं.

बहुमत वाली सरकार में पहली बार बीजेपी ने बनाया उप मुख्यमंत्री

कहा जा रहा था कि पाटीदार आंदोलन के बाद दलितों के विरोध प्रदर्शन के बाद बीजेपी पटेलों की नाराजगी दूर करने के लिए किसी पटेल उम्मीदवार को मुख्यमंत्री बनाएगी. पिछले एक साल में पटेलों के आंदोलन की वजह बीजेपी को काफी नुकसान हो चुका है.

बीजेपी के 120 विधायकों में से 34 पटेल हैं. वहीं पूरी विधानसभा में 182 में से 44 विधायक पटेल हैं. खबर आई थी कि पटेल नेताओं और आनंदीबेन पटेल ने पार्टी नेतृत्व से साफ कहा कि नितिन पटेल के नाम पर ही मुहर लगनी चाहिए. राजनीतिक जानकारों के अनुसार पटेल समुदाय ज्यादा नाराज हो जाए इसलिए नितिन पटेल को उप मुख्यमंत्री बनाया गया है.

बहुमत वाली सरकार में बीजेपी ने कभी अपना उप मुख्यमंत्री नहीं बनाया है. असम विधानसभा चुनाव में मिली जीत के बाद भी कहा जा रहा था कि हेमंत विश्वसर्मा को उप मुख्यमंत्री बनाया जाएगा लेकिन पार्टी ने उन्हें यह जिम्मेदारी नहीं दी.

बहरहाल उनके सामने कांटों भरा ताज और पहाड़ सरीखी उम्मीदें हैं. दलित और पाटीदार समाज की नाराजगी के बाद गुजरात का अगला विधानसभा चुनाव बेहद महत्वपूर्ण होने वाला है. दूसरी तरफ गुजरात जिसे भगवा ब्रिगेड की प्रयोगशाला कहा जाता है उसे बचाए रखने की चुनौती भी आन पड़ी है. रूपानी यह सब कर पाएंगे या नहीं देखना होगा. मुख्यमंत्री का ताज दिसंबर 2017 तक उनके लिए राजपाट का ताज नहीं है, तनाव का ताज है.

First published: 6 August 2016, 9:27 IST
 
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