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मोहन भागवत का भाषण भाजपा और नरेंद्र मोदी के लिए फ़ायदेमंद होगा?

सुहास मुंशी | Updated on: 11 February 2017, 5:47 IST
QUICK PILL
  • नरेन्द्र मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद लगातार तीसरी बार आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत के विजयदशमी सम्बोधन का सरकारी चैनल दूरदर्शन द्वारा लाइव टेलीकास्ट किया गया.
  • वर्ष 2014 का भाषण एक ‘नई आशा’ (मोदी सरकार के सत्ता में आने से) व भारत की विविधता का जश्न मनाने की जरूरत व उसे सम्मान देने के बारे में था. और 2015 का भाषण मुसलमानों की बढ़ती आबादी व डॉक्टर अम्बेडकर के बारे में.

भागवत का 2016 का भाषण न केवल कश्मीर बल्कि पाक अधिकृत कश्मीर पर भारत के प्रभुत्व पर जोर देने, गोरक्षकों का बचाव करने, जिन पर कि हाल ही नरेन्द्र मोदी ने हमला किया था, सर्जिकल स्ट्राइक्स की रोशनी में भारतीय सशस्त्र सेनाओं की प्रशंसा करने और नई शिक्षा नीति के बारे में टीएसआर कमेटी की रिपोर्ट के पुनरावलोकन पर केंद्रित था.

  

उत्तर प्रदेश का चुनाव जीतने के लिए बीजेपी एड़ी चोटी का जोर लगा रही है. ब्राह्मण सम्मेलनों के आयोजन से लेकर पूरे प्रदेश में बौद्ध भिक्षुओं की यात्राएं निकालने (दलित व ओबीसी वोटों को लुभाने के लिए), दयाशंकर सिंह की पत्नी को बढ़ावा देने (ठाकुर वोटों को लुभाने के लिए), आंतरिक सर्वे करने और इसके साथ ही राज्य के चारों कोनों से परिवर्तन यात्राएं निकालने समेत लखनऊ में दशहरा आयोजित करने तक (इतने वर्षों में पहली बार प्रधानमंत्री ने दिल्ली में नहीं बल्कि लखनऊ में दशहरा मनाया) के कार्यक्रम इसमें शामिल हैं.

लेकिन पार्टी जानती है कि आरएसएस कार्यकर्ताओं के विशाल नेटवर्क के समर्थन के बिना वह सफल नहीं हो सकती और मोदी द्वारा 80 प्रतिशत गौरक्षकों को जाली व अपराधी बताए जाने के बाद इनमें से अधिकांश कार्यकर्ता क्रोधित थे. इसलिए समझा जा सकता है कि भागवत द्वारा गौरक्षकों के बचाव और सेना के जवाबी सर्जिकल हमलों की प्रशंसा क्यों की. 

उन्होंने कहा, 'गौ माता है और इसका काम करने वाले सारे गौरक्षक भले लोग हैं जो कानून, संविधान के अंदर रहके काम करते हैं. मैं अभिनंदन करता हूं सेना ने जो साहस दिखाया... उपद्रवियों को संकेत मिला है कि सहनशीलता की भी सीमा होती है.'

भागवत ने एक ही झटके में संघ व स्वयंसेवकों को राजनेताओं से बढ़कर बता दिया, उनका मनोबल बढ़ाया है और अपने कार्यकर्ताओं को वह मुद्दा दिया है जिस पर वे बिना किसी शिकायत बीजेपी के लिए काम कर सकें. 

एक अन्य पहलू यह भी है कि सर्जिकल स्ट्राइक्स के संदेश और ‘पाकिस्तान के कूटनीतिक अलगाव’ के रूप में बीजेपी व आरएसएस को राम मंदिर मुद्दे से लोगों का ध्यान बांटने में मदद मिल सकती है क्योंकि राज्य में देर-सबेर यही चर्चा का मुद्दा बनने वाला है.

पाक अधिकृत कश्मीर

भागवत कश्मीर के बारे में भी बोले. उन्होंने कहा कि दुनिया में हर कोई जानता है कि कश्मीर में अलगाववादी तत्वों को सीमा पार की ताकतों (पाकिस्तान की ओर संकेत) से मदद मिल रही है. उन्होंने कहा कि न केवल कश्मीर बल्कि इस बात पर भी जोर देने की जरूरत है कि पाक अधिकृत कश्मीर भी हमारा है. मीरपुर, मुजफ्फराबाद और गिलगिट-बाल्टिस्तान समेत पूरा कश्मीर हमारा है.  

गौरतलब है कि केवल कुछ ही दिन पहले नरेन्द्र मोदी ने भी कोझीकोड में बीजेपी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में गिलगिट और बाल्टिस्तान का उल्लेख किया था.

भागवत ने कहा कि अब चूंकि घाटी में पुनः शांति की स्थापना हो चुकी है तो उस क्षेत्र में राष्ट्रवाद के विचारों पर जोर देने की जरूरत है. लेकिन उन्होंने जम्मू-कश्मीर राज्य की भाजपा-पीडीपी सरकार की भी आलोचना की. उन्होंने कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास के काम में भी तेजी लाने की बात कही.

'राज्य और केन्द्र की नीति में कुछ कोताही बरती गई है. लोगों में भावना है कि हमें कुछ नहीं मिलता. यह राज्य सरकार को देखना पड़ेगा.' भागवत पाक अधिकृत कश्मीर से आए हिन्दू शरणार्थियों के बारे में भी बोले. उन्होंने कहा कि आश्वासनों के बावजूद उनकी तीसरी पीढ़ियां आज राज्य में बिना नागरिकता के रह रही हैं. सरकार को इस मामले की ओर तत्काल देखना चाहिए.

नई शिक्षा नीति पर ज़ोर

भागवत ने अपने भाषण में जो एक अन्य मुद्दा उठाया, वह था नई शिक्षा नीति का. उन्होंने कहा कि नई नीति में नैतिक शिक्षा पर पर्याप्त जोर दिया जाना चाहिए और इसे यह सुनिश्चित करना चाहिए कि शिक्षा केवल व्यवसाय न बन जाए.

शिक्षा संघ का एक फोकस एरिया रहा है. यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां संघ ने अपने प्रभाव का काफी जोरदार ढंग से इस्तेमाल किया है. कथित रूप से नई शिक्षा नीति को प्रभावित करने के लिए संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने एचआरडी मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और उनसे पहले स्मृति ईरानी के साथ कई बैठकें की हैं. जावड़ेकर के साथ हाल ही की एक बैठक में संघ के संयुक्त मंत्री कृष्णगोपाल के साथ पार्टी अध्यक्ष अमित शाह भी मौजूद रहे.

टीएसआर सुब्रमणियन कमेटी ने नई शिक्षा नीति के लिए सुझाव दिए हैं . वह संघ के कई सुझावों को पहले ही अपनी रिपोर्ट में शामिल कर चुकी है. खबरों के अनुसार कमेटी स्कूलों में मूल्यवान शिक्षा को जोड़ने, मातृभाषा में शिक्षा को प्राथमिकता देने,  अनुत्तीर्ण नहीं करने की नीति समाप्त करने, जीवंत भाषा के रूप में संस्कृत को बढ़ावा देने और शिक्षा में योग को शामिल करने की मांगें पहले ही मान चुकी है. 

सरसंघचालक ने मंगलवार को नई शिक्षा नीति के बारे में कहा, ‘अब प्रतीक्षा बहुत हुई .’ इससे दिखाई देता है कि नई शिक्षा नीति को लागू करने के लिए सरकार जिस गति से काम कर रही है उसके प्रति संघ कितना अधीर है. रोचक यह रहा कि अपने भाषण के अंत में भारतीय सभ्यता की प्रशंसा करते हुए भागवत ने अल्लामा इकबाल को उनकी देशभक्तिपूर्ण नज्म ‘सारे जहां से अच्छा ’ के लिए याद किया, जिन्हें पाकिस्तानी अपना आध्यात्मिक पिता मानते हैं. 

‘यूनान-ओ मिस्र ओ रोम सब मिट गए जहां से,

 अब तक मगर है बाकी नामोनिशां हमारा, 

कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी .

आरएसएस के सरसंघचालक अपने शब्दों का चयन बहुत सावधानी पूर्वक करते हैं. विजयदशमी के अपने भाषण के माध्यम से आरएसएस प्रमुख अपने लाखों कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हैं और उन्हें अगले साल के लिए दिशानिर्देश देते हैं. इसलिए शब्दों और कवि का उनका चयन मात्र संयोग नहीं हो सकते. 

इस बारे में केवल अनुमान ही लगाया जा सकता है कि क्या इकबाल का चयन उन्होंने ज्यादा श्रोताओं तक पहुंचने के लिए किया, न केवल भारत में बल्कि पाक अधिकृत कश्मीर में भी. और क्या यह सरकार की विदेश नीति में बदलाव का संकेत है.

First published: 13 October 2016, 7:52 IST
 
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